सर्जिकल स्ट्राइक : रक्षा विशेषज्ञों ने क्यों इस तरह की कार्रवाई को जरूरी बताया?
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :29 Sep 2016 7:43 PM (IST)
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नयी दिल्ली : शीर्ष रक्षा विशेषज्ञों ने आज नियंत्रण रेखा के पार पीओके में घुसपैठ के लिए बने ठिकानों पर लक्षित हमलों को ‘परिचालनगत जरूरत’ बताया और कहा कि सहिष्णुता की सीमा पार हो जाने के बाद इसकी जरूरत आन पड़ी थी. सेना के पूर्व शीर्ष अधिकारियों ने सुरक्षाबलों की बहादुरी और नपे-तुले कदम तथा […]
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नयी दिल्ली : शीर्ष रक्षा विशेषज्ञों ने आज नियंत्रण रेखा के पार पीओके में घुसपैठ के लिए बने ठिकानों पर लक्षित हमलों को ‘परिचालनगत जरूरत’ बताया और कहा कि सहिष्णुता की सीमा पार हो जाने के बाद इसकी जरूरत आन पड़ी थी.
सेना के पूर्व शीर्ष अधिकारियों ने सुरक्षाबलों की बहादुरी और नपे-तुले कदम तथा सेना को यह काम करने की इजाजत देने के लिए सरकार की भी प्रशंसा की एवं कहा कि काफी समय से लंबित यह कर्ज आज चुका दिया गया. उन्होंने यह कहते हुए इन हमलों को सही ठहराया कि सुरक्षा बल पाकिस्तान के कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र में घुसे.
पूर्व डीजी इंफ्रैटरी लेफ्टिनेंट जनरल एस प्रसाद ने कहा, ‘‘मैं बहुत खुश हूं कि सरकार सेना को वह करने दे रही है जो उसे करने की जरूरत है. पाकिस्तानी सेना को पता चलने दीजिए कि यह हमने किया है और यदि वह अपना चाल-ढाल नहीं ठीक करती है तो हम ऐसा करते रहेंगे. हमें ऐसा करने के लिए बड़े दिल की जरूरत है.’
उन्होंने कहा, ‘‘आतंकवादियों के ठिकानों के बारे में सटीक सूचना देने के लिए हमें खुफिया सूत्रों को धन्यवाद देना है. हमें सेना को खुली छूट देने के लिए सरकार को धन्यवाद देने की जरूरत है. स्पष्ट है कि सरकार ने सेना को स्पष्ट कार्रवाई निर्देश दिया जिसने लक्षित हमला किया और अच्छा नतीजा मिला. ‘ उन्होंने कहा कि सशस्त्रबलों ने अपने हमलों में बड़ा नपा-तुला कदम उठाया और इसी तरह भारत सरकार को सेना को अपना करने की छूट देकर प्रतिक्रिया देनी चाहिए.
पूर्व रॉ प्रमुख सी डी सहाय ने कहा कि ये हमले तो होने ही थे और अपरिहार्य थे और इन्हें पठानकोट या उरी हमलों से जोड़ कर नहीं देखना चाहिए क्योंकि सीमापार घुसपैठ का लंबा इतिहास रहा है. उन्होंने शांति बनाए रखने के लिए पूरी परिपक्वता के साथ ऐसे मामलों से निबटने को लेकर भारत को बधाई दी.
सहाय ने कहा, ‘‘लाल रेखाएं पार हो चुकी थीं. सहिष्णुता की हद पार हो गयी है और यह होना ही था. मैं उन्हें बधाई दूंगा लेकिन अब भी मैं (भारत से) अनुरोध करूंगा इसको लेकर युद्धोन्माद में नहीं जाना चाहिए. यह परिचालनगत जरूरत है. यह सुरक्षा आवश्यकता है. यह किया जाना था. मैं सभी से यहां से दूर हट जाने एवं (तनाव) नहीं बढ़ाने की अपील करूंगा.’ भारत ने कल रात जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पार आतंकी ठिकानों पर लक्षित हमला किया तथा आतंकवादियों और उनके प्रश्रयदाताओं को भारी नुकसान पहुंचाया.
सेना की इस आकस्मिक कार्रवाई की घोषणा डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने आज की. करीब ग्यारह दिन पहले पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने कश्मीर के उरी में सैन्य शिविर पर हमला किया था. तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि हमलावर बख्शे नहीं जायेंगे तथा 18 जवानों की शहादत बेकार नहीं जाएगी.
जम्मू कश्मीर में आतंकवाद निरोधक अभियानों में शामिल रहे पूर्व डीजीएमओ मेजर जनरल बख्शी ने कहा कि यह पुराना ऋण था जिसे विशेष बलों ने सटीकता के साथ चुका दिया है. बख्शी ने कहा, ‘‘यह पुराना बकाया था जिसे आज चुकाया गया. उन्हें निगरानी में रखा गया और जब ये घुसपैठ के लिए ये ठिकाने आतंकवादियों से भर गए तब हमारे विशेष बल बहुत सटीकता से पहुंचाये गये और उन्होंने वहां कोहराम मचा दिया. उन्होंने उन शिविरों और ठिकानों को नष्ट कर दिया और बड़ी संख्या में वहां (आतंकवादियों को) हताहत किया. ‘
पश्चिम कमान के पूर्व सी इन सी एयर मार्शल पी एस अहलूवालिया ने कहा कि भारत ने यह दिखाने के लिए पहले कूटनीतिक अभियान चलाया, फिर आर्थिक और अंतत: सैन्य कि हमारे पास ऐसे लक्षित सैन्य अभियानों को चलाने के लिए सामरिक ताकत है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान तो इनकार करता रहेगा और वह लक्षित हमलों को स्वीकार नहीं करेगा, वह इसे गोलीबारी और घुसपैठ करार देगा लेकिन उन्होंने इस बात के लिए और सतर्क होने का आह्वान किया कि वह पलटवार करेगा.
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