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केंद्र ने जल्लीकट्टू परंपरा को दी मंजूरी, अधिसूचना जारी, VIDEO

Updated at : 08 Jan 2016 12:41 PM (IST)
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केंद्र ने जल्लीकट्टू परंपरा को दी मंजूरी, अधिसूचना जारी, VIDEO

नयी दिल्ली : केंद्र सरकार ने आज तमिलनाडु में जल्लीकट्टू परंपरा को अनुमति दे दी है. इसको लेकर सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है.तमिलनाडुसरकार व कई किसानसंगठनों ने भी केंद्र से इस आशयकी मांगकीथी. उल्लेखनीय है कि सांडों के इस खेल पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने 2011 में एक अधिसूचना जारी कर रोक लगा […]

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नयी दिल्ली : केंद्र सरकार ने आज तमिलनाडु में जल्लीकट्टू परंपरा को अनुमति दे दी है. इसको लेकर सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है.तमिलनाडुसरकार व कई किसानसंगठनों ने भी केंद्र से इस आशयकी मांगकीथी. उल्लेखनीय है कि सांडों के इस खेल पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने 2011 में एक अधिसूचना जारी कर रोक लगा दी थी. उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में भी उस अधिसूचना को कायम रखा था.

समझा जाता है कि पोंगल पर होने वाले इस आयोजन को लेकर तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के विशेष आग्रह पर नरेंद्र मोदी सरकार ने यह फैसला लिया है. पर्यावरण मंत्रालय ने अपनी 2011 की अधिसूचना में कहा था किसांड़ उस श्रेणी के पशु हैं, जिन्हें ऐसे आयोजनों के लिए प्रशिक्षित नहीं किया जा सकता है, अत: उनका उपयोग ऐसे कार्यों में नहीं किया जा सकता है.

वहीं, वन व पर्यावरण मंत्रालय ने अपनी आज की अधिसूचना में ऐसे आयोजनों को अनुमति दी है. केंद्र ने अपनी अधिसूचना में कहा कि ऐसे अायोजन 15 मीटर के दायरे में ही होंगे. इसके अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, केरल व गुजरात में परंपरागत बैलगाड़ी दौड़ भी हो सकती है. इसके लिए शर्त यह रखी गयी है कि ऐसे आयोजन विशेष ट्रैक पर हों, जो 200 मीटर से ज्यादा लंबी नहीं हो.

अधिसूचना में कहा गया, ‘‘केंद्र सरकार इस तरह निर्दिष्ट करती है कि यह अधिसूचना जारी करने की तारीख से प्रभाव के साथ भालू, बंदर, बाघ, चीते और सांड को प्रदर्श पशुओं (परफार्मिंग एनिमल) के तौर पर प्रदर्शित या प्रशिक्षित नहीं किया जाएगा.’ इसमें कहा गया, ‘‘हालांकि किसी समुदाय के रीति रिवाजों या परंपराओं के तहत तमिलनाडु में जल्लीकट्टू और महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, केरल और गुजरात में बैलगाडी कीदौड़ जैसे कार्यक्रमों में सांडों को प्रदर्श पशु के तौर पर प्रदर्शित या प्रशिक्षित करना जारी रखा जा सकता है.’

जल्लीकट्टू के मामले में सांड के घेराव से बाहर जाते ही उसे 15 मीटर की अर्धव्यास दूरी के भीतर काबू करना होगा और यह भी सुनिश्चित करना होगा कि पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों से सांडों की उचित जांच करायी जाए ताकि यह सुनिश्चित हो कि ये जानवर कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए अच्छी शारीरिक दशा में हैं.

पशु अधिकार समूहों की आपत्तियों के बावजूद देश के दूसरे हिस्सों में जल्लीकट्टू और बैल गाड़ियों की दौड़ को मंजूरी दी गयी है.

पोंगल के त्यौैहार से थोड़ ही समय पहले फैसला आने के साथ तमिलनाडु के दक्षिणी जिलों में पटाखे छोड़कर और मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया गया. जल्लीकट्टू तमिलनाडु में पोंगल के त्यौहार के हिस्से के तौर पर मट्टू पोंगल के दिन आयोजित किया जाता है. तमिलनाडु की सीएम जयललिता ने पत्र लिख कर इस फैसले के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद दिया है.

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