हुर्रियत कान्फ्रेंस ने भारत-पाक के फिर से बातचीत करने के फैसले का स्वागत किया
Updated at : 16 Dec 2015 7:40 PM (IST)
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श्रीनगर : हुर्रियत कान्फ्रेंस के नरमपंथी धडे ने व्यापक द्विपक्षीय वार्ता करने के भारत और पाकिस्तान के फैसले का आज स्वागत किया और उनके राजनैतिक नेतृत्व से पारंपरिक रुख से उपर उठने और कश्मीर समेत सभी जटिल मुद्दों का समाधान करने में शासनकला और ‘गंभीरता’ दिखाने की अपील की. हुर्रियत कान्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर […]
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श्रीनगर : हुर्रियत कान्फ्रेंस के नरमपंथी धडे ने व्यापक द्विपक्षीय वार्ता करने के भारत और पाकिस्तान के फैसले का आज स्वागत किया और उनके राजनैतिक नेतृत्व से पारंपरिक रुख से उपर उठने और कश्मीर समेत सभी जटिल मुद्दों का समाधान करने में शासनकला और ‘गंभीरता’ दिखाने की अपील की.
हुर्रियत कान्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारुक की अध्यक्षता में कार्यकारिणी और आम परिषद की हुई बैठक में इस महीने की शुरूआत में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की हालिया पाकिस्तान यात्रा और प्रधानमंत्री नवाज शरीफ समेत नेतृत्व के साथ हुई बैठकों का स्वागत किया गया.
एक प्रस्ताव में हुर्रियत कान्फ्रेंस के नरमपंथी धडे ने भारत-पाक नेतृत्व से अपने पारंपरिक राजनैतिक रुख से ऊपर उठने और क्षेत्र में टिकाऊ शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जटिल मुद्दों का समाधान करने के लिए शासनकला और गंभीरता दिखाने को कहा.” हुर्रियत कान्फ्रेंस ने कहा कि समूह दक्षिण एशिया में टिकाऊ शांति के लिए दोनों देशों को साथ लाने के लिए सेतु के तौर पर काम करने को तैयार है. मीरवाइज ने कहा कि रकी हुई बातचीत को बहाल करने का फैसला एक स्वागत योग्य कदम है और हुर्रियत कान्फ्रेंस हर तरीके से उसमें योगदान देना चाहेगी ताकि दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध कायम रहे.
मीरवाइज ने बैठक के बाद कहा, ‘‘हुर्रियत कान्फ्रेंस हमेशा भारत और पाकिस्तान के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों के पक्ष में रही है और कश्मीर समेत सभी विवादास्पद मुद्दों के समाधान के लिए बातचीत सर्वाधिक कारगर तरीका है.” उन्होंने कहा, ‘‘हमारी एकमात्र उम्मीद है कि पहले के विपरीत बातचीत को जब किसी एक बहाने या किसी और बहाने रोका गया था उसे पूरी गंभीरता और सार्थक तरीके से आगे बढाया जाएगा.” उन्होंने कहा कि कश्मीर दोनों देशों के बीच लंबित सर्वाधिक महत्वपूर्ण मुद्दा है इसलिए इसपर उतना ध्यान दिया जाना चाहिए जितने का यह हकदार है क्योंकि इस मुद्दे का जारी रहना दक्षिण एशियाई क्षेत्र की संपूर्ण स्थिरता और प्रगति में बडा बाधक है.
मीरवाइज ने उम्मीद जताई कि बातचीत से कश्मीर मुद्दे पर नए सिरे से विश्वास बहाली के कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने इस बात को दोहराया कि कश्मीर बुनियादी तौर पर एक राजनैतिक और मानवीय मुद्दा है और उसका राजनैतिक समाधान किए जाने की आवश्यकता है. दोनों देशों को एक तंत्र विकसित करना चाहिए ताकि बातचीत में कश्मीर की जनता को शामिल किया जा सके क्योंकि उनकी भागीदारी और उनकी आकांक्षाओं पर गौर किए बिना इस मुद्दे का कोई उचित और सहमति योग्य समाधान नहीं हो सकता.
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