अदालत ने केंद्र से पूछा: क्या वह श्रीलंका के शरणार्थियों के बच्चों को मेडिकल कॉलेज में दाखिले का प्रावधान करेगा
Updated at : 12 Jun 2015 2:06 AM (IST)
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चेन्नई: मद्रास उच्च न्यायालय ने आज अपने अंतरिम आदेश में केंद्र सरकार से पूछा कि क्या वह मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस पाठ्यक्रमों में श्रीलंका के शरणार्थियों के बच्चों को दाखिल देने का कोई प्रावधान बनाना चाहता है. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति टी एस शिवज्ञानम की पीठ ने ऐसा तब कहा जब […]
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चेन्नई: मद्रास उच्च न्यायालय ने आज अपने अंतरिम आदेश में केंद्र सरकार से पूछा कि क्या वह मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस पाठ्यक्रमों में श्रीलंका के शरणार्थियों के बच्चों को दाखिल देने का कोई प्रावधान बनाना चाहता है.
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति टी एस शिवज्ञानम की पीठ ने ऐसा तब कहा जब गृह मंत्रलय के अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल जी राजगोपालन ने कहा कि ऐसे बच्चे श्रीलंका के नागरिकों समेत दोस्ताना राष्ट्रों के उम्मीदवारों को समायोजित करने वाली योजना के तहत दाखिले के हकदार नहीं हैं. पीठ ने केंद्र स्पष्ट कहा कि उसे यह दिमाग में रखना चाहिए कि यह मामला श्रीलंका के शरणार्थी की बेटी से जुडा है जो भारत में पैदा हुई और शिक्षा पायी.
वकील आर श्री प्रिया ने याचिका दायर कर चेन्नयी के सरकारी किलपौक मेडिकल कॉलेज के डीन को नंदिनी के लिए एक एमबीबीएस सीट आरक्षित करने का निर्देश देने की मांग की है. नंदिनी का आवेदन पूरी तरह इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि वह श्रीलंका के शरणार्थी की बेटी है.
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