भूमि अध्यादेश की तरह राम मंदिर निर्माण के लिए भी अध्यादेश लाया जाना चाहिए: विनय कटियार

अयोध्या : एक जमाने में भाजपा के फायर ब्रांड नेता रहे विनय कटियार ने अपनी ही पार्टी की सरकार पर शब्दों का बाण दागा है. कटियार ने कहा है कि वाजपेयी की सरकार के पास तो खुद का बहुमत नहीं था लेकिन मोदी सरकार के पास तो पूर्ण बहुमत है इसलिए भाजपा सरकार को राम […]
अयोध्या : एक जमाने में भाजपा के फायर ब्रांड नेता रहे विनय कटियार ने अपनी ही पार्टी की सरकार पर शब्दों का बाण दागा है. कटियार ने कहा है कि वाजपेयी की सरकार के पास तो खुद का बहुमत नहीं था लेकिन मोदी सरकार के पास तो पूर्ण बहुमत है इसलिए भाजपा सरकार को राम मंदिर को बनाने को लेकर कुछ संकेत देना चाहिए. उन्होंने कहा है कि सरकार ने जैसे भूमि अधिग्रहण पर अध्यादेश लाया है, वैसे ही मंदिर पर भी अध्यादेश लाना चाहिए.
कटियार ने कहा कि राम मंदिर के लिए रामभक्तों ने काफी कुर्बानियां दी हैं, इसलिए इस मुद्दे को अब ज्यादा दिन टाला नहीं जा सकता. भूमि अधिग्रहण की तरह राम मंदिर के भव्य निर्माण के लिए भी अध्यादेश लाया जाना चाहिए.उन्होंने कहा कि राम मंदिर का भव्य निर्माण जल्दी होना चाहिए, क्योंकि इसे अब लटकाया गया तो रामभक्तों का गुस्सा फूट सकता है.
विनय कटियार का यह औपचारिक बयान है लेकिन राजनीतिकविश्लेषक मान रहे हैं कि इसमें कही न कही विनय कटियार के अंदर की कुछ नाराजगी है. कटियार को अभी पार्टी में और न ही सरकार में कोई बडी भूमिका मिली है.ऐसे में उनके इस बयान को राम मंदिर के प्रति उनके समर्पण के साथ राजनीतिक निशाने के रूप में भी देखा जा रहा है.
जनता को पता लगना चाहिए कि राम मंदिर पर किये गये वायदे को पूरा करने के लिए सरकार क्या कुछ कर रही है. उन्होंने कहा कि इससे लोगों के दिमाग में हमारे इरादों को लेकर उपजा भ्रम खत्म होगा और यह दुष्प्रचार करने वालों का भी पर्दाफाश हो जाएगा कि हम मंदिर मुद्दे पर गंभीर नहीं हैं. कटियार ने कहा कि सभी समस्याएं बातचीत के जरिए हल हो सकती हैं और दशकों पुराने इस विवाद को लेकर वार्ता जारी रहनी चाहिए.
मंदिर आंदोलन के केंद्र में रहे कटियार ने कहा कि मोदी सरकार इस मुद्दे पर सत्ता में नहीं आयी है लेकिन ये मुद्दा भाजपा के वोटरों के लिए देश के विकास जितना ही महत्वपूर्ण है. जब विलंब के कारण राम भक्तों में रोष की ओर ध्यान दिलाया गया तो उन्होंने कहा कि यदि मामले को और लंबे समय तक ठंडे बस्ते में रखा गया तो उनके गुस्से की सभी सीमाएं पार हो सकती हैं.
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह कह चुके हैं कि सरकार कानून बनाकर इस मुद्दे का हल निकालने की स्थिति में नहीं है क्योंकि राज्यसभा में उसके पास बहुमत नहीं है.
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