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मेरी चीन यात्रा एशिया के लिए मील का नया पत्थर साबित होगी : प्रधानमंत्री

Updated at : 13 May 2015 1:53 PM (IST)
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मेरी चीन यात्रा एशिया के लिए मील का नया पत्थर साबित होगी : प्रधानमंत्री

नयी दिल्ली : सीमा मुद्दे और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में चीन की आधारभूत परियोजनाओं जैसे परेशान करने वाले मुद्दों के बीच चीन की अपनी तीन दिवसीय यात्रा पर जा रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कल चीनी नेतृत्व से मुलाकात कठिन चुनौती होगी हालांकि, उन्होंने उम्मीद जतायी है कि यह एशिया के लिए नया […]

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नयी दिल्ली : सीमा मुद्दे और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में चीन की आधारभूत परियोजनाओं जैसे परेशान करने वाले मुद्दों के बीच चीन की अपनी तीन दिवसीय यात्रा पर जा रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कल चीनी नेतृत्व से मुलाकात कठिन चुनौती होगी हालांकि, उन्होंने उम्मीद जतायी है कि यह एशिया के लिए नया मील का पत्थर साबित होगा.

प्रधानमंत्री के तौर पर चीन की अपनी पहली यात्रा पर जा रहे मोदी एक शिखर सम्मेलन के लिए सामान्य प्रोटोकॉल से हटकर एक असाधारण कदम के तहत कल राष्ट्रपति शी जिनपिंग के गृह शहर, प्राचीन शहर जियान पहुंचेंगे. पिछले साल सितंबर में भारत दौरे के दौरान मोदी ने भी चीनी नेता का अहमदाबाद में स्वागत किया था.
अपने दौरे के पहले प्रधानमंत्री ने चीनी मीडिया से कहा, मैं चीन के अपने दौरे के लिए आशान्वित हूं, 21 वीं सदी एशिया की है. हिंदी में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि उनके दौरे से भारत-चीन का संबंध आगे अधिक प्रगाढ होगा और एशिया तथा विकासशील देशों के लिए नया मील का पत्थर साबित होगा.
अपने दौरे के पहले सरकारी सीसीटीवी से मोदी ने कहा, मेरा मानना है कि चीन के मेरे दौरे से केवल चीन-भारत दोस्ती ही प्रगाढ नहीं होगी बल्कि यह दौरा एशिया में विकासशील देशों के साथ ही दुनिया भर में संबंधों के लिए नया मील का पत्थर होगा. इसमें जरा भी संदेह नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत और चीन ने हालिया वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों में बडी प्रगति की है और धैर्य व परिपक्वता के साथ अपने मतभेदों को दूर करने की कोशिश की है.
मोदी ने कहा, चीनी मीडिया के साथ संवाद कर मैंने भारत-चीन संबंधों की मजबूत संभावनाओं को रेखांकित किया है. उन्होंने कहा, मैंने खासकर, गरीबी उन्मूलन में विकासशील देशों की मदद के लिए हमारी साझा जिम्मेदारी पर बात की. एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, बुद्ध की जमीन होने के नाते एशिया पर यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है कि यह सदी जंग से मुक्त हो. मोदी ने जिक्र किया कि उन्होंने पिछले एक साल में राष्ट्रपति शी से तीन बार मुलाकात की और विविध मुद्दों पर समग्र बातचीत की.
दो साल पहले शी के सत्ता में आने के बाद यह पहली बार है जब वह बीजिंग के बाहर किसी विदेशी नेता का स्वागत करेंगे और मोदी के साथ अनौपचारिक तौर पर संवाद के लिए इतना वक्त गुजारेंगे.
शी ने इससे पहले जिस दूसरे नेता के साथ इस तरह टहलकर वक्त बिताया, वह थे बराक ओबामा जिनसे वह एपेक सम्मेलन के दौरान मिले. अमेरिकी राष्ट्रपति को वह बीजिंग में इंपेरियल गार्डन जोजानहाई ले गए जहां पर चीन का नेतृत्व रहता है. बहरहाल, दोनों देश जिन बातों पर गौर करेंगे उसमें सीमा विवाद से लेकर भारत के चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को चीन का समर्थन भी शामिल है.
मोदी कल चीन में शांक्शी की प्रांतीय राजधानी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शहर जियान पहुंचेंगे तथा देर शाम बीजिंग लौटने से पहले वह वहां शी के साथ अनौपचारिक बातचीत करेंगे. अगले दिन वह चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग से बातचीत करेंगे और फिर शंघाई रवाना होंगे, जहां वे कारोबारियों के सम्मेलन को संबोधित करेंगे. इसके अलावा वे फ्यूडन यूनिवर्सिटी में महात्मा गांधी पीठ का उद्घाटन करेंगे और भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे.
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