मौत के 45 साल बाद हुआ जगमाल का अंतिम संस्कार

रेवाड़ी : वायुसेना के परिवहन विमान हादसे में जान गंवाने के 45 साल बाद नॉन कमीशन्ड ऑफीसर (एनसीओ) जगमाल सिंह यादव के अवशेषों का यहां रेवाड़ी जिले में उनके पैतृक गांव मीरपुर में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. एनसीओ का शव 22 अगस्त को पश्चिमी कमान के डोगरा स्काउट्स द्वारा खोजा […]
रेवाड़ी : वायुसेना के परिवहन विमान हादसे में जान गंवाने के 45 साल बाद नॉन कमीशन्ड ऑफीसर (एनसीओ) जगमाल सिंह यादव के अवशेषों का यहां रेवाड़ी जिले में उनके पैतृक गांव मीरपुर में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया.
एनसीओ का शव 22 अगस्त को पश्चिमी कमान के डोगरा स्काउट्स द्वारा खोजा गया था जिसे उनके गांव लाया गया. फरवरी 1968 में यहां से लेह के लिए रवाना होने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हुए वायुसेना के एएन 12 विमान में सवार 102 सैनिकों में से जगमाल सहित पांच सैनिकों के शव मिल चुके हैं.
मेजर वरुण ने बताया कि जगमाल सिंह की सबसे पहले पहचान उनकी बाजू पर बंधे एल्युमीनियम के बैज से हुई थी. इस पर जगमाल सिंह का नाम लिखा हुआ था. शव के साथ जगमाल सिंह की जेब से पर्स भी मिला है. पर्स में दस रुपये का नोट भी मिला है, जो अब पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है. इसके अतिरिक्त परिजनों द्वारा 1968 में लिखी गई चिट्ठी तथा एक बीमा पालिसी भी मिली है. शव के निकट जगमाल सिंह का फौजी बैग बरामद हुआ है, जिसमें से एक टार्च, पानी की बोतल, हवाई चप्पल, शेविंग रेजर, टूथब्रश मिले है.
सेना द्वारा सौंपे गए सामान को रामचंद्र पिता की यादों के रूप में सहेज कर रखना चाहते है. सेना द्वारा सौंपे गए सारे सामान को रामचंद्र ने ग्रामीणों को दिखाया. जो टार्च मिला है, उसे रामचंद्र ड्यूटी पर जाते समय घर से ले गया था.
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