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फ्रांस के साथ राफेल विमानों के सौदे पर पर्रिकर बोले, इससे वायुसेना को मिलेगी राहत

Updated at : 11 Apr 2015 5:06 PM (IST)
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फ्रांस के साथ राफेल विमानों के सौदे पर पर्रिकर बोले, इससे वायुसेना को मिलेगी राहत

पणजी: रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने आज कहा कि फ्रांस के साथ 36 राफेल लडाकू विमानों की खरीद का सौदा होने से भारतीय वायु सेना को कुछ राहत मिलेगी. इन विमानों को दो वर्ष में वायुसेना में शामिल किया जाएगा.पेरिस में कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलोंद के बीच बातचीत के […]

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पणजी: रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने आज कहा कि फ्रांस के साथ 36 राफेल लडाकू विमानों की खरीद का सौदा होने से भारतीय वायु सेना को कुछ राहत मिलेगी. इन विमानों को दो वर्ष में वायुसेना में शामिल किया जाएगा.पेरिस में कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलोंद के बीच बातचीत के बाद इन लडाकू विमानों को खरीदने के बारे में हुए निर्णय को पर्रिकर ने ‘‘बहुत अच्छा’’ करार दिया और कहा कि इससे वायुसेना को मजबूती प्रदान करने में काफी मदद मिलेगी.

पर्रिकर ने यहां कहा, ‘‘भारतीय वायुसेना को इस सौदे से जरुरी न्यूनतम राहत मिलेगी. वास्तव में हमने (पिछले) 17 वर्षों में नई पीढी का कोई बडा विमान नहीं खरीदा है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बेहतर शर्तों पर किया गया अच्छा निर्णय है. दो स्क्वाड्रन के लिए 36 विमान खरीदना एक अत्यंत सकारात्मक निर्णय है जिसकी जरुरत थी.’’

मोदी ने कल पेरिस में कहा था कि भारत ‘‘देश में लडाकू विमानों की महत्वपूर्ण परिचालन जरुरतों को ध्यान में रखते हुए’’ फ्रांस से जल्द ही 36 राफेल लडाकू विमान उडान भरने के लिए तैयार अवस्था में खरीदेगा.

पर्रिकर ने कहा, ‘‘इन विमानों की खरीद के लिए अनुरोध पत्र कई वर्षों से अटका हुआ था. इसकी शुरुआत 2000 में हुई थी और काफी उलझनों के चलते यह पूरा नहीं हो पा रहा था, इसलिए मैं काफी प्रसन्न हूं कि प्रधानमंत्री ने यह पहल की है.’’

पर्रिकर ने कहा कि लडाकू विमानों को दो वर्ष की अवधि के भीतर वायुसेना में शामिल किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस सौदे को लेकर अंतत: सफलता मिली. पर्रिकर ने इसका कोई कारण नहीं बताया कि इन बहुप्रतीक्षित लडाकू विमानों को वायुसेना में शामिल करने के लिए अधिकतम दो वर्ष का समय क्यों लगेगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि समय की जरुरत ,आगे कीमत को लेकर होने वाली बातचीत और विमान को भारतीय जरुरतों के हिसाब से दुरुस्त करने में पडेगी. हो सकता है कि दोनों सरकारों के बीच बातचीत पूरी हो गई हो लेकिन संभव है कि बलों को उत्पादन कंपनी दसाल्त के साथ सौदे को अंतिम रुप देना हो.

पर्रिकर ने कहा कि 36 राफेल विमान के लिए प्रारंभिक खरीद के बाद देश के पास ‘‘मेक इन इंडिया पहल या राफेल तरह की व्यवस्था’’ के तहत ऐसे और विमान होंगे. मंत्री ने कहा कि राफेल पांचवीं पीढी का विमान है जो मिग21, मिग27 और सुखोई30 जैसे पुरानी पीढी के लडाकू विमानों के साथ वायुसेना में शामिल होगा.

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास पुरानी पीढी के विमान हैं जिन्हें सीमित जीवन काल के लिए अपग्रेड किया गया. वास्तव में मिग21 अपने जीवन के आखिरी हिस्से में है.’’

रक्षा मंत्री पर्रिकर ने कहा कि राफेल को भारतीय वायुसेना में शामिल करने में दो वर्ष का समय लग सकता है क्योंकि ‘‘उडान भरने के लिए तैयार अवस्था’’ का मतलब यह नहीं है कि हमें वह कल ही मिल जाएंगे.’’ उन्होंने कहा, ‘‘विमानों को भारत की जरुरत के मुताबिक डिजाइन करना होगा. ’’ उन्होंने कहा कि कीमत को लेकर बातचीत होगी जिसे वर्तमान में 700 करोड रुपया आंका गया है.

उन्होंने कहा, ‘‘हमें एकल इंजन तरह के हल्के विमान की जरुरत है. यद्यपि साथ ही हमें गहरी पैठ वाले दोहरे इंजन वाले विमानों भी की जरुरत है जिसकी प्रौद्योगिकी एवं अन्य उपकरण नवीनतम हों जो भारत को उसके पारंपरिक दुश्मनों पर बढत प्रदान कर सके.’’ उन्होंने कहा कि 36 विमानों की खरीद अंतर को तत्काल भरने के लिए है. उन्होंने कहा कि हल्के लडाकू विमान तेजस का अगले महीने अंतिम उडान परीक्षण होगा. उन्होंने कहा, ‘मेक इन इंडिया’ भारत की वायुसेना की ताकत के लिए एक दीर्घकालिक हल है.

पर्रिकर ने कहा, ‘‘हमें तेजस के विकास को आगे बढाना होगा और हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हम कुछ उच्च श्रेणी के विमान भी बनायें.’’

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