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मुसलिमों के अलावा दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों का सरकार ने नहीं कराया है सामाजिक-आर्थिक अध्ययन

Updated at : 17 Dec 2014 4:52 PM (IST)
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मुसलिमों के अलावा दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों का सरकार ने नहीं कराया है सामाजिक-आर्थिक अध्ययन

नयी दिल्ली : लोकसभा में आज भाजपा के एक सदस्य ने सरकार से सवाल किया कि किसी समुदाय को उसकी कितनी आबादी बढने के बाद अल्पसंख्यक श्रेणी से निकाले जाने का प्रावधान है. हालांकि इस पर सरकार ने कहा कि अभी तक ऐसे कोई मापदंड तय नहीं किए गए हैं. लोकसभा में भाजपा के सदस्य […]

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नयी दिल्ली : लोकसभा में आज भाजपा के एक सदस्य ने सरकार से सवाल किया कि किसी समुदाय को उसकी कितनी आबादी बढने के बाद अल्पसंख्यक श्रेणी से निकाले जाने का प्रावधान है. हालांकि इस पर सरकार ने कहा कि अभी तक ऐसे कोई मापदंड तय नहीं किए गए हैं.

लोकसभा में भाजपा के सदस्य भैरों प्रसाद मिश्र ने सवाल किया कि किसी समुदाय की कितनी आबादी बढने के बाद उस समुदाय को अल्पसंख्यक श्रेणी से बाहर निकाले जाने का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि क्योंकि तमाम ऐसे वर्ग हैं जो आज इस आबादी से ज्यादा हो गए.
इनकी आबादी कहीं 15 फीसदी तो कहीं 20 फीसदी हो गयी है. उन्होंने कहा कि उसका मानक क्या है और कितनी आबादी के बाद उनको अल्पसंख्यक दर्जे से हटाने का भारत सरकार का नियम है.
इस पर अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने कहा कि अभी इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है कि किसी समुदाय को कितनी आबादी के बाद अल्पसंख्यक श्रेणी से निकाले जाने का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित योजनाओं को बनाते समय केवल उस समुदाय की सामाजिक आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाता है.
मुसलमानों के अलावा अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की सामाजिक आर्थिक स्थिति के आकलन के लिए सरकार द्वारा किसी प्रकार का अध्ययन किए जाने से इंकार करते हुए नजमा ने कहा कि मुस्लिमों के उत्थान के लिए सरकार ने कई प्रकार की योजनाएं लागू की हैं.
उन्होंने बताया कि मुस्लिमों के शैक्षणिक सशक्तीकरण के लिए मौलाना आजाद शिक्षा फाउंडेशन द्वारा दी जाने वाली छात्रवृत्तियों की राशि को बढाने के साथ ही इस श्रेणी में दी जाने वाली छात्रवृत्तियों को अनुसूचित जाति, जनजाति के छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्तियों के बराबर किए जाने के लिए भी वित्त मंत्रालय से विचार विमर्श किया गया है.
नजमा ने सच्चर कमेटी की सिफारिशों के संबंध में बताया कि इसकी 76 सिफारिशों में से 72 सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया है और इनके क्रियान्वयन की स्थिति का पता लगाने के लिए गठित की गयी प्रोफेसर कुंडू की रिपोर्ट मंत्रालय को मिल गयी है और सरकार इस रिपोर्ट पर विचार कर रही है.
माकपा के मोहम्मद सलीम ने प्रोफेसर कुंडू रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखे जाने की भी मांग की.
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