Explainer: 24 घंटे में 22 बार डोली अंडमान-निकोबार की धरती, जानें भूकंप की वजह और बचाव के उपाय

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 05 Jul 2022 1:57 PM

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Earthquakes in Andaman Sea: 22 बार आये भूकंप के झटके में सबसे कम तीव्रता 3.8 मापी गयी जबकि सबसे ज्‍यादा तीव्रता 5.0 रही. जानें आखिर क्‍यों आता है भूकंप और इससे बचाव के उपाय क्‍या हैं. भूकंप के संबंध में पूरी जानकारी यहां पढ़ें

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Earthquake Explainer: अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए पर्यटन के नक्शे पर पहचान बनाने वाले केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार की चर्चा भूकंप की वजह से पूरे देश में हो रही है. दरअसल बात ही कुछ ऐसी है. पिछले 24 घंटे में 22 बार यहां की धरती डोली है. मंगलवार की सुबह भी अंडमान निकोबार में भूकंप के झटके महसूस किये. 22 बार आये भूकंप के झटके में सबसे कम तीव्रता 3.8 मापी गयी जबकि सबसे ज्‍यादा तीव्रता 5.0 रही. हालांकि राहत की बात ये है कि भूकंप से किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ. बताया जा रहा है कि अभी तक आज सुबह से 11 झटके महसूस किये जा चुके हैं.

आइए जानते हैं क्‍या होता है भूकंप

दरअसल भूकंप का शब्‍दिक अर्थ भूमि के कंपन से होता है. इसका मतलब है भूमि के अंदर होने वाला कंपन. पृथ्वी की सतह पर यदि हलचल महसूस होती है तो इसका मतलब होता है कि पृथ्‍वी की आंतरिक दर्जा बाहर निकल रही है. इससे भूकंपीय तरंगों का निर्माण होता है. भूकंपीय तरंगों की वजह से पृथ्‍वी की अवस्‍था में परिवर्तन होने लगता है. इस परिवर्तन को ही भूकंप कहा जाता है.

कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भूकंप की तरंगों को मापने के लिए एक यंत्र का उपयोग किया जाता है. इस यंत्र को सिस्‍मोग्राफ कहा जाता है. इसके अलावा बता दें कि भूकंप की तीव्रता को रिएक्‍टर पैमाने में मापा जाता है.

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उत्पत्ति के आधार पर भूकंप का वर्गीकरण

1. सामान्य भूकंप (Tectonic Earthquake): इस भूकंप की बात करें तो यह भ्रंश तल के किनारे चट्टानों के सरक जाने के कारण उत्पन्न होते हैं.

2. ज्वालामुखी जन्य भूकंप (Volcanic Earthquake): यह भूकंप ज्वालामुखी के उत्पन्न होने की वजह से महसूस किये जाते हैं. ऐसे भूकंप ज्‍यादातर का सक्रिय ज्वालामुखी क्षेत्रों तक सीमित रहते हैं.

3. नियात भूकंप (Collapse Earthquake) : इस भूकंप की बात करें तो ये खनन क्षेत्रों यह महसूस किये जाते हैं. कभी-कभी अत्याधिक खनन कार्य से भूमिगत खानों की छत ढह जाती है जिससे हल्के झटके महसूस लोग करते हैं.

4. विस्फोटक भूकंप (Explosion Earthquake) : यह भूकंप परमाणु या रासायनिक विस्फोटों के कारण महसूस किये जाते हैं.

5. बांध जनित भूकंप (Reservoir Earthquake) : ऐसे भूकंप बड़े बांधों को टूटने की वजह से महसूस किये जाते हैं.

भूकंप आने पर क्‍या करना चाहिए जानें

1. भूकंप आने पर यदि आप किसी बिल्डिंग के अंदर से लिफ्ट में हो तो उसे तुरंत उतर जाए. ऐसी स्थिति में बिल्डिंग से उतरने के लिए सीढ़ियां का इस्तेमाल करना उचित होता है.

2. घर की इलेक्ट्रिसिटी करंट को ऑफ कर देना चाहिए. हर इलेक्ट्रॉनिक सामान का पलक बिजली के सॉकेट से बाहर निकाल देना चाहिए.

3. यदि घर या बिल्डिंग के अंदर फंस जाएं तो घर में रखे में मेज, चौकी, डेस्क के अंदर छिपने की कोशिश करें.

4. यदि आप उस समय कार चला रहे हैं तो कार को धीमा कर लें. कार को एक खाली स्थान पर ले जाकर पार्क कर दें. तब तक कार से नहीं उतरें जबतक झटके खत्म नहीं हो जाते हैं.

5. पेड़ों और बिजली के तारों से दूर रहने का प्रयास करें.

6. यदि आप बाहर सड़क पर या बाजार में हो तो पास में मैदान या खुली जगह पहुंचने का प्रयास करें.

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लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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