17 महीने पुरानी कार नई बताकर बेची: डॉक्टर की शिकायत पर कंज्यूमर आयोग सख्त, नई E20 कार और एक लाख मुआवजे का आदेश

रायपुर के एक कंज्यूमर फोरम ने उस डॉक्टर के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसे मारुति ग्रैंड विटारा का पुराना मॉडल बेचा गया था. ( फोटो स्रोत - सोशल मीडिया )
Raipur District Consumer Disputes Redressal Commission : रायपुर में एक डॉक्टर को 17 महीने पुरानी कार को नया बताकर बेचने का मामला सामने आया है. उपभोक्ता आयोग ने डीलर और निर्माता कंपनी को सख़्त निर्देश देते हुए 45 दिनों के भीतर E20 मॉडल की नई कार या पूरी रकम वापस करने का आदेश दिया है.
Raipur District Consumer Disputes Redressal Commission : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक कार डीलर और निर्माता कंपनी के खिलाफ सख्त फैसला सुनाया है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, आयोग ने आदेश दिया कि शिकायतकर्ता डॉ प्रेमराज देबता को उसी मॉडल की नई E20 पेट्रोल समर्थित कार 45 दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाए. ऐसा नहीं होने पर कार की पूरी कीमत लौटानी होगी. साथ ही मानसिक उत्पीड़न के लिए 1 लाख रुपये का मुआवजा भी देने का निर्देश दिया गया है.
खरीद के कुछ महीनों बाद शुरू हुई परेशानी
शिकायतकर्ता डॉ प्रेमराज देबता ने जून 2024 में करीब 18.29 लाख रुपये में मारुति ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस खरीदी थी. इसके अलावा उन्होंने बीमा और आरटीओ शुल्क के रूप में लगभग 1.86 लाख रुपये भी चुकाए. करीब पांच महीने में कार 21,913 किलोमीटर चली, लेकिन नवंबर 2024 में अचानक डैशबोर्ड पर इंजन की खराबी का संकेत आया और वाहन बीच रास्ते में बंद हो गया.
डीलर ने खराब पेट्रोल को बताया जिम्मेदार
डॉ देबता कार को तुरंत शोरूम ले गए, जहां जांच के बाद डीलर ने दावा किया कि मिलावटी या खराब गुणवत्ता वाले पेट्रोल की वजह से इंजन खराब हुआ है. इसके बाद भी कई बार कार की मरम्मत की गई, लेकिन समस्या खत्म नहीं हुई. बाद में डॉक्टर को बताया गया कि उन्हें पुराना मॉडल बेचा गया था और इसके लिए सेल्स मैनेजर से संपर्क करने को कहा गया.
बदलने से इनकार, उल्टा रखी शर्तें
जब डॉ प्रेमराज देबता ने कंपनी के जनरल मैनेजर से संपर्क किया तो उन्हें साफ कह दिया गया कि न तो कार बदली जाएगी और न ही पैसे लौटाए जाएंगे. उन्हें कंपनी की ओर से कहा गया कि कार 12 लाख रुपये में बेच दें या फिर 5.30 लाख रुपये खर्च कर इंजन और अन्य हिस्से बदलवाएं. इस बीच कार डीलर के पास प्रतिदिन 200 रुपये के शुल्क पर खड़ी रही, जिसके बाद डॉ देबता ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया.
आयोग ने माना डीलर की सेवा में कमी
इस मामले की सुनवाई के दौरान उपभोक्ता आयोग ने पाया कि कार का निर्माण जनवरी 2023 में हुआ था, जबकि उसे जून 2024 में नई कार बताकर बेचा गया, यानी करीब 17 महीने पुरानी कार को नया बताकर ग्राहक को सौंपा गया. आयोग ने यह भी माना कि वाहन E20 पेट्रोल के अनुरूप नहीं था, जबकि देश में E20 ईंधन का उपयोग बढ़ाया जा रहा है. ऐसे में इंजन संबंधी समस्या के लिए ग्राहक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.
45 दिन में नई कार या पूरी रकम लौटाने का आदेश
उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में कहा कि डीलर और कंपनी ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार किया है. इसलिए 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को उसी मॉडल की नई E20-अनुकूल कार दी जाए. यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो ग्राहक द्वारा चुकाई गई पूरी राशि वापस करनी होगी. इसके अलावा मानसिक पीड़ा के लिए 1 लाख रुपये का मुआवजा भी देना होगा. तय समय में भुगतान न करने पर इस राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना पड़ेगा.
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