तमिलनाडु में नवोदय विद्यालय खोलने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, वकील ने कहा- बच्चों की मुफ्त शिक्षा पर राजनीति नहीं

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वकील प्रियदर्शिनी राहुल

वकील प्रियदर्शिनी राहुल

upreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में नवोदय विद्यालय (जेएनवी) खोलने के मामले में राज्य सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं. अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों की शिक्षा पर राजनीतिक मतभेदों का असर नहीं पड़ना चाहिए. मामला क्या है और आगे क्या हो सकता है, जानिए.

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Supreme Court : तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी) खोलने का मामला एक बार फिर चर्चा में है. पीटीआई न्यूजेंसी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बच्चों की मुफ्त शिक्षा पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए. इस मामले की वकील प्रियदर्शिनी राहुल ने कहा कि यह मामला तमिलनाडु में नवोदय विद्यालय स्थापित करने से जुड़ा है. उन्होंने बताया कि नवोदय विद्यालय देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली छात्रों को निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराते हैं, लेकिन तमिलनाडु ऐसा एकमात्र राज्य है जहां अभी तक कोई नवोदय विद्यालय नहीं है.

एनजीओ की याचिका के बाद शुरू हुई कानूनी लड़ाई

वकील प्रियदर्शिनी राहुल के मुताबिक, ‘कुमारी महा सभा’ नामक एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) ने मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. याचिका में राज्य में नवोदय विद्यालय खोलने की मांग की गई थी. हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला देते हुए तमिलनाडु में नवोदय विद्यालय स्थापित करने का आदेश दिया था. इसके बाद राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी.

2017 में मिली थी रोक, 2025 में कोर्ट ने दिए नए निर्देश

तमिलनाडु सरकार को साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक मिल गई थी. लेकिन दिसंबर 2025 में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना की पीठ ने राज्य सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए. अदालत ने कहा कि राज्य सरकार स्कूल खोलने के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान करे और उसे उपलब्ध कराए ताकि प्रक्रिया आगे बढ़ सके.

बच्चों की शिक्षा पर मतभेदों का असर नहीं पड़े: कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच किसी भी प्रकार के राजनीतिक या प्रशासनिक मतभेद का असर बच्चों की शिक्षा पर नहीं पड़ना चाहिए. अदालत ने जोर देकर कहा कि ग्रामीण छात्रों को मिलने वाली मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. अब इस मामले की अगली सुनवाई और राज्य सरकार के रुख पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.

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