फायरिंग में मारे गए किशोर के परिजनों को 11 लाख दे बीएसएफ:अदालत
Updated at : 03 Sep 2014 5:43 PM (IST)
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शिलांग:सात साल पहले सीमा सुरक्षा बल की फायरिंग में मारे गए 16 वर्षीय किशोर के मामले पर मेघालय हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि बीएसएफ मारे गए किशोर के परिवार को 11 लाख का मुआवजा दे. यह घटना बांग्लादेश की सीमा पर स्थित सुदूर गांव की है. न्यायमूर्ति सुदीप रंजन सेन ने सोमवार को […]
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शिलांग:सात साल पहले सीमा सुरक्षा बल की फायरिंग में मारे गए 16 वर्षीय किशोर के मामले पर मेघालय हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि बीएसएफ मारे गए किशोर के परिवार को 11 लाख का मुआवजा दे. यह घटना बांग्लादेश की सीमा पर स्थित सुदूर गांव की है.
न्यायमूर्ति सुदीप रंजन सेन ने सोमवार को अपने आदेश में कहा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि सीमा सुरक्षा बल की फायरिंग के कारण ही किशोर की मौत हुई है. अतएव प्रतिवादी पर यह दायित्व बनता है कि वह याचिकाकर्ता को अपना पुत्र गंवाने को लेकर मुआवजा दे.
अदालत ने इस तथ्य के मद्देनजर मृतक के परिवार को 11,28,000 रुपए बतौर मुआवजा देने का निर्देश दिया कि लडका अकुशल श्रमिक था और वह अपने शेष जीवनकाल के 45 से अधिक सालों तक आजीविका अर्जित करता.
याचिकाकर्ता बैती संगमा और उनके बेटे मिथुन ए मराक उन लोगों में शामिल थे जो तीन मार्च, 2007 को विवाद होने पर रंगकू के समीप खासिमारा गांव में इकट्ठा हुए थे.
सीमा सुरक्षा बल ने दावा किया था कि उसे कुछ ग्रामीणों को तितर-बितर करने के लिये फायरिंग की क्योंकि वे बांग्लादेश के लिये बांस की तस्करी का प्रयास कर रहे थे. दूसरी ओर ग्रामीणों में से गवाहों ने कहा था कि बल ने गांव की दो लडकियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी.
याचिकाकर्ता की बल के जवानों ने बुरी तरह पिटाई की थी और इसके बाद अंधाधुंध फायरिंग की जिसमें याचिकाकर्ता का 16 वर्षीय पुत्र मिथुन मारा गया था.
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