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महबूबा मुफ्ती का भड़काऊ बयान- 35 A के साथ छेड़छाड़ बारूद को हाथ लगाने के बराबर

Updated at : 28 Jul 2019 1:13 PM (IST)
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महबूबा मुफ्ती का भड़काऊ बयान- 35 A के साथ छेड़छाड़ बारूद को हाथ लगाने के बराबर

जम्मूः जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री व पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने 35 A पर चेतावनी दी है. उऩ्होंने कहा है कि आर्टिकल 35 A के साथ छेड़छाड़ करना बारूद को हाथ लगाने के बराबर है. जो हाथ 35 A के साथ छेड़ छाड़ करने के लिए उठेंगे, वो हाथ ही नहीं बल्कि सारा जिस्म […]

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जम्मूः जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री व पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने 35 A पर चेतावनी दी है. उऩ्होंने कहा है कि आर्टिकल 35 A के साथ छेड़छाड़ करना बारूद को हाथ लगाने के बराबर है. जो हाथ 35 A के साथ छेड़ छाड़ करने के लिए उठेंगे, वो हाथ ही नहीं बल्कि सारा जिस्म जल कर राख हो जाएगा. वो रविवार को पीडीपी के 20वें स्थापना दिवस पर श्रीनगर में कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं.

उन्होंने कहा, हमारे पास जो कुछ भी है, उसे बचाने के लिए कश्मीरियों की जरूरत है, हमारा अपना संविधान है, हमारे पास एक ऐसा दर्जा है जो बाहर के लोगों को यहां संपत्ति खरीदने की अनुमति नहीं देता है. आज घाटी में जो हालात हैं, वे डरावने हैं, जम्मू कश्मीर बैंक खत्म हो चुका है और धीरे-धीरे वे सब कुछ खत्म करने की कोशिश कर रहे.

शनिवार को ही जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने घाटी में अतिरिक्त 10 हजार सैनिकों की तैनाती के केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाए थे. मुफ्ती ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के इस फैसले ने घाटी के लोगों में भय जैसा माहौल पैदा कर दिया है.

दरअसल, 25 जुलाई को गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीआरपीएफ, बीएसएफ, एसएसबी और आईटीबीपी) के अतिरिक्त 10 हजार जवानों की तैनाती के लिए एक आदेश जारी किया था. इसका मकसद आतंकवाद रोधी (सीआई) ग्रिड को मजबूत बनाया है ताकि कानून व्यवस्था बनाई रखी जा सके. स्वतंत्रता दिवस से पहले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बंदोस्त को और सख्त करने के लिए सरकार ने ये फैसला किया है.

बता दें कि 35 A को लेकर कश्मीर के नेता अक्सर विवादित बयान देते रहते हैं. फारूक अब्दुल्ला ने भी कई मौकों पर संविधान के अनुच्छेदों 370 और 35 A को ‘छूकर दिखाने’ की चुनौती दी है. महबूबा मुफ्ती ने लोकसभा चुनाव के वक्त कहा था कि ‘अनुच्छेद 35-ए में अगर किसी तरह का बदलाव किया गया तो राज्य के लोग राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा की बजाय किसी और झंडे को भी थाम सकते हैं. गु
आइए जानें कि अनुच्छेद 35-ए से जुड़ी जरूरी बातें :
1- अनुच्छेद 35-ए संविधान का वह आर्टिकल है जो जम्मू कश्मीर विधानसभा को लेकर प्रावधान करता है कि वह राज्य में स्थायी निवासियों को पारिभाषित कर सके.
2- साल 1954 में 14 मई को राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने एक आदेश पारित किया था. इस आदेश के जरिए संविधान में एक नया अनुच्छेद 35 A जोड़ दिया गया. आर्टिकल 370 के तहत यह अधिकार दिया गया है.
3- साल 1956 में जम्मू कश्मीर का संविधान बना जिसमें स्थायी नागरिकता को परिभाषित किया गया.
4- जम्मू कश्मीर के संविधान के मुताबिक, स्थायी नागरिक वह व्यक्ति है जो 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या फिर उससे पहले के 10 सालों से राज्य में रह रहा हो, और उसने वहां संपत्ति हासिल की हो.
5- साल 2014 में एक एनजीओ ने अर्जी दाखिल कर इस आर्टिकल को समाप्त करने की मांग की थी. इस मामले की सुनवाई अभी भी सुप्रीम कोर्ट में चल रही है.
आर्टिकल 35A के विरोध में दलील
– यहां बसे कुछ लोगों को कोई अधिकार नहीं
– 1947 में जम्मू में बसे हिंदू परिवार अब तक शरणार्थी
– ये शरणार्थी सरकारी नौकरी हासिल नहीं कर सकते
– सरकारी शिक्षण संस्थान में दाख़िला नहीं
– निकाय, पंचायत चुनाव में वोटिंग राइट नहीं
– संसद के द्वारा नहीं, राष्ट्रपति के आदेश से जोड़ा गया आर्टिकल 35A
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