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अपोलो अस्पताल में जयललिता के निधन की जांच के लिए गठित आयोग की कार्यवाही पर रोक

Updated at : 26 Apr 2019 7:11 PM (IST)
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अपोलो अस्पताल में जयललिता के निधन की जांच के लिए गठित आयोग की कार्यवाही पर रोक

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता की चेन्नई स्थित अपोलो अस्पताल में दिसंबर 2016 में हुई मृत्यु की जांच कर रहे जांच आयोग की कार्यवाही पर शुक्रवार को रोक लगा दी. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ अन्नाद्रमुक सुप्रीमो जयललिता की मृत्यु […]

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नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता की चेन्नई स्थित अपोलो अस्पताल में दिसंबर 2016 में हुई मृत्यु की जांच कर रहे जांच आयोग की कार्यवाही पर शुक्रवार को रोक लगा दी.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ अन्नाद्रमुक सुप्रीमो जयललिता की मृत्यु के मामले की जांच के लिए अरूमुगस्वामी आयोग गठित करने पर अपोलो अस्पताल की आपत्ति ठुकराने के मद्रास उच्च न्यायालय के चार अप्रैल के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी. यह आयोग 2016 में 75 दिन इलाज के लिए जयललिता के भर्ती रहने के दौरान उनके उपचार से संबंधित पहलुओं की जांच के लिए गठित किया गया है. तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता का पांच दिसंबर, 2016 को अपोलो अस्पताल में कथित रूप से जबर्दस्त दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था. पीठ ने अपने आदेश में तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी करने के साथ ही जांच आयोग की कार्यवाही पर रोक लगा दी.

अपोलो अस्पताल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीए सुंदरम ने जांच आयोग की कार्यवाही पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुए कहा कि आयोग एक नेता के अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उन्हें दिये गये चिकित्सीय उपचार की छानबीन नहीं कर सकता है. उन्होने कहा, समिति कहती है कि आपको आपरेशन करना चाहिए था जो आपने नहीं किया. क्या इन पहलुओं पर वह विचार कर सकता है. राज्य सरकार के वकील ने कहा कि 90 प्रतिशत जांच पूरी हो चुकी है और इस पर रोक नहीं लगायी जानी चाहिए. अस्पताल की इस अपील का शुक्रवार को सबेरे उल्लेख करते हुए इस पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया था और पीठ ने इसे स्वीकार कर लिया था. उच्च न्यायालय ने अस्पताल की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि कार्य की शर्तों के तहत अरूमुगास्वामी जांच आयोग को यह अधिकार प्राप्त है और वह इस मामले में गौर कर सकता है.

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