तो क्या जीतने पर अमेठी सीट छोड़ेंगे राहुल गांधी?
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :05 Apr 2019 7:31 AM (IST)
विज्ञापन

नयी दिल्ली : देश की राजनीति में वरिष्ठ नेताओं का लोकसभा या विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर लड़ना नयी बात नहीं है. दो से अधिक सीटों से चुनाव लड़ने पर कानूनी रोक से पहले, कई नेता तीन-तीन सीटों पर भी लड़े. दिलचस्प यह है कि दोनों सीटों पर जीतने की स्थिति में खुद के […]
विज्ञापन
नयी दिल्ली : देश की राजनीति में वरिष्ठ नेताओं का लोकसभा या विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर लड़ना नयी बात नहीं है. दो से अधिक सीटों से चुनाव लड़ने पर कानूनी रोक से पहले, कई नेता तीन-तीन सीटों पर भी लड़े.
दिलचस्प यह है कि दोनों सीटों पर जीतने की स्थिति में खुद के लिए मजबूत मानी जाने वाली परंपरागत सीट से ही इस्तीफा दिया. ऐसे में सवाल है कि क्या दो सीट से लड़ने वाले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दोनों सीटों पर जीतने की स्थिति में अमेठी की जगह वायनाड को वरीयता देंगे? दरअसल, दो सीटों पर चुनाव जीतने के बाद पार्टियां यह देखती हैं कि किस सीट पर अन्य चेहरा खड़ा करने पर आसानी से जीत मिल सकती है. इसलिए नेता अपनी नयी सीट रखना पसंद करते हैं, ताकि उनकी पारंपरिक या पुरानी मजबूत सीट छोड़ने पर उपचुनाव में वहां उनका प्रत्याशी आसानी से जीत सके.
कई बार ऐसे नेता दूसरे राज्यों में पार्टी का आधार बनाने के लिए भी कमजोर और परंपरागत नहीं मानी जाने वाली सीट से इस्तीफा देने से बचते रहे हैं. इन्हीं वजहों से ज्यादातर ऐसे मामलों में दोनों सीटों पर जीत मिलने की स्थिति में नेताओं ने परंपरागत और मजबूत सीट से ही इस्तीफा दिया है.
दो सीटें जीतने के बाद मजबूत या पारंपरिक सीट छोड़ने का रहा है रिकॉर्ड
पिछले चुनाव में मोदी ने वडोदरा व मुलायम ने मैनपुरी सीट छोड़ी थी
इंदिरा ने रायबरेली सीट छोड़ी थी और आडवाणी ने नयी दिल्ली
1980 में हुए चुनाव में इंदिरा गांधी ने परंपरागत मानी जाने वाली रायबरेली और कर्नाटक की मेडक सीट से चुनाव लड़ा. उन्होंने रायबरेली से इस्तीफा दिया और अरुण नेहरू को चुनाव जितवाया. 1991 में लालकृष्ण आडवाणी नयी दिल्ली के अलावा गांधीनगर सीट से चुनाव लड़े.
दोनों पर जीते. बाद में नयी दिल्ली सीट छोड़ दी. हालांकि, उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस के राजेश खन्ना से हार गये. बीते चुनाव में भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी वाराणसी-वडोदरा तथा तत्कालीन सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव मैनपुरी-आजमगढ़ की सीट से लड़े. दोनों नेता दोनों सीटों पर जीते.
मोदी ने अपने गृह राज्य वडोदरा की सीट से इस्तीफा दिया, वहीं मुलायम ने परंपरागत मैनपुरी को अलविदा कहा. उपचुनाव में वडोदरा में भाजपा और मैनपुरी में सपा की जीत हुई. वर्ष 2009 के चुनाव में अखिलेश यादव ने फिरोजाबाद और कन्नौज दोनों सीटें जीती. बाद में मजबूत मानी जाने वाली फिरोजबाद से इस्तीफा दिया.
अटल-सोनिया ने पेश की अलग मिसाल
अटल बिहारी वाजपेयी दूसरे आम चुनाव में लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से चुनाव लड़े. सिर्फ बलरामपुर में जीत हासिल हुई. बाद में लखनऊ को अपना कर्मस्थल बनाया. 1999 के चुनाव में सोनिया गांधी ने अमेठी के अलावा बेल्लारी से जीत दर्ज की. उन्होंने बेल्लारी से इस्तीफा दे दिया.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










