विस चुनाव नतीजों से कांग्रेस उत्साहित, मध्य प्रदेश लोकसभा की 29 सीटें, भाजपा 1996 से जीतती रही है दो तिहाई से ज्यादा सीटें
Updated at : 26 Feb 2019 6:29 AM (IST)
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भोपाल : मध्य प्रदेश में राज्य विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव के नतीजे को अपने पक्ष करने और अपने रिकॉर्ड को बचाने की चुनौती बेशक बड़ी होगी. राज्य विभाजन के पूर्व से मप्र भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है. 1996 से 2014 तक छह लोकसभा चुनाव हुए और […]
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भोपाल : मध्य प्रदेश में राज्य विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव के नतीजे को अपने पक्ष करने और अपने रिकॉर्ड को बचाने की चुनौती बेशक बड़ी होगी. राज्य विभाजन के पूर्व से मप्र भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है. 1996 से 2014 तक छह लोकसभा चुनाव हुए और सब में भाजपा ने सीटों की संख्या के मामले में बड़े अंतर से कांग्रेस को पीछे छोड़ा. राज्य विभाजन के बाद भी लोकसभा चुनावों में भाजपा का जादू कायम रहा.
वहीं कांग्रेस के लिए 1991 वाली स्थिति को हासिल करना आसान नहीं होगा. राज्य विभाजन से पहले मध्य प्रदेश में 40 लोकसभा सीटें थीं. 2000 में राज्य विभाजन के बाद 11 सीटें छत्तीसगढ़ में चली गयीं. मप्र में 29 सीटें रह गयीं. 1991 में कांग्रेस ने अंतिम बार यहां लोकसभा चुनाव में भारी बढ़त हासिल की थी, जब उसे 40 में से 27 सीटें मिली थीं. तब भाजपा के खाते में 12 और बसपा के खाते में एक सीट गयी थी.
उसके बाद के चुनाव में भाजपा ने राज्य की सबसे मजबूत पार्टी होने का ताज उससे छीन लिया. राज्य बंटवारे के पहले तक लोस के तीन चुनाव हुए और तीनों में भाजपा ने जबर्दस्त बढ़त ली. 1996 में भाजपा ने 40 में 27 सीट जीतने का कांग्रेस का पिछला आंकड़ा अपने खाते में कर लिया और कांग्रेस को सात सीटों पर रोक दिया. 1998 में भाजपा दो सीटें और जीत कर 30 पर पहुंच गयी. हालांकि कांग्रेस के भी खाते में दो अंकों का सुधार हुआ और वह दस सीटें जीत सकी.
विस चुनाव का ट्रेंड रहा कायम, तो 14 सीटों का हेरफेर
राज्य विधानसभा के दिसंबर में आये चुनाव परिणाम के लिहाज से देखें, तो अगर वोटरों का ट्रेंड वही रहा, तो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 16 और बीजेपी को 13 सीटें मिल सकती हैं, यानी कांग्रेस को 14 सीटों का लाभ और भाजपा को 14 सीटों का नुकसान हो सकता है. विधानसभा की कुल 230 सीटों में से कांग्रेस को 114 (56 सीटाें का लाभ) और भारतीय जनता पार्टी को 109 (56 सीटों का नुकसान) सीटें मिली थीं.
राज्य विभाजन के पहले कुल सीटें : 40
नोट : दोनों 40-40 सीटों पर लड़ीं. 1998 एवं 1991 में कांग्रेस के एक-एक एवं 1996 में 04 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई. भाजपा के एक भी उम्मीदवार की जमानत जब्त नहीं हुई.
राज्य विभाजन के बाद कुल सीटें : 29
नोट : भाजपा और कांग्रेस ने 29-29 सीटों पर चुनाव लड़ा था. 2004 और 2009 के चुनावों में कांग्रेस के एक-एक तथा 2004 में भाजपा के चार उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई थीं.
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