अमेरिकी हैकर का दावा- हैकिंग के बारे में जानते थे मुंडे इसलिए कराई हत्या
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Jan 2019 8:30 AM
मुंबई : पिछले लोकसभा चुनावों में ईवीएम हैकिंग की जानकारी होने के कारण भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे की हत्या का साइबर विशेषज्ञ द्वारा दावा किए जाने के बाद भाजपा नेता के भतीजे और राकांपा नेता धनंजय मुंडे ने सोमवार को मामले की जांच रॉ या उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश से कराने की मांग की. महाराष्ट्र […]
मुंबई : पिछले लोकसभा चुनावों में ईवीएम हैकिंग की जानकारी होने के कारण भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे की हत्या का साइबर विशेषज्ञ द्वारा दावा किए जाने के बाद भाजपा नेता के भतीजे और राकांपा नेता धनंजय मुंडे ने सोमवार को मामले की जांच रॉ या उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश से कराने की मांग की. महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता मुंडे ने अमेरिका में रह रहे भारतीय स्वयंभू साइबर विशेषज्ञ के दावे पर आश्चर्य जताया.
उन्होंने कहा कि गोपीनाथ मुंडे से प्रेम करने वालों ने उनकी मृत्यु पर हमेशा सवाल उठाया है. उन्होंने पूछा है कि यह दुर्घटना थी या कोई साजिश. 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा को जीत मिलने के कुछ ही सप्ताह के भीतर दिल्ली में एक सड़क दुर्घटना में गोपीनाथ मुंडे की मृत्यु हो गई थी.
राकांपा नेता ने ट्वीट किया है, एक साइबर विशेषज्ञ ने सनसनीखेज दावा किया है कि गोपीनाथ राव मुंडे साहेब की हत्या की गई. इन दावों की तुरंत रॉ/उच्चतम न्यायालय से जांच कराने की जरूरत है क्योंकि यह एक जननेता से जुड़े हैं.
दरअसल, अमेरिका में राजनीतिक शरण चाह रहे एक स्वयंभू भारतीय साइबर विशेषज्ञ ने सोमवार को सनसनीखेज दावा किया कि भारत में 2014 के आम चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के जरिये ‘धांधली’ हुई थी. उसका दावा है कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है. चुनाव आयोग ने उनके इस दावे को खारिज कर दिया है। वहीं भारत में भाजपा और आम आदमी पार्टी ने जहां इस दावे को खारिज कर दिया, कांग्रेस ने कहा कि ये आरोप बेहद गंभीर हैं.
स्काइप के जरिये लंदन में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सैयद शुजा ने दावा किया कि अपनी टीम के कुछ सदस्यों के मारे जाने के बाद वह भारत से भाग गए क्योंकि उन्हें देश में अपनी जान को खतरा था. यद्यपि वह स्काइप के जरिये स्क्रीन पर सामने आए लेकिन उनका चेहरा ढंका हुआ था. शुजा ने दावा किया कि टेलीकॉम क्षेत्र की बड़ी कंपनी रिलायंस जियो ने कम फ्रीक्वेंसी के सिग्नल पाने में भाजपा की मदद की थी ताकि ईवीएम मशीनों को हैक किया जा सके.
हालांकि, उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया. हालांकि, जियो का 2014 में कोई अस्तित्व नहीं था और उसकी सेवाएं सितंबर 2016 में शुरू हुई थीं. शुजा ने यह कहकर सनसनी फैला दी कि भाजपा के अलावा सपा, बसपा, आप और कांग्रेस भी ईवीएम के जरिये धांधली में शामिल है.
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