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शिवसेना ने पूछा - भाजपा सरकार के शासन में नहीं, तो कब बनेगा राम मंदिर

Updated at : 03 Jan 2019 4:39 PM (IST)
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शिवसेना ने पूछा - भाजपा सरकार के शासन में नहीं, तो कब बनेगा राम मंदिर

मुंबई : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए शिवसेना ने गुरुवार को कहा कि उसे इस बात पर ताज्जुब है कि अगर भाजपा के नेतृत्ववाली वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं होगा तो कब होगा. पार्टी ने कहा कि अगर राम मंदिर का निर्माण 2019 चुनावों से […]

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मुंबई : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए शिवसेना ने गुरुवार को कहा कि उसे इस बात पर ताज्जुब है कि अगर भाजपा के नेतृत्ववाली वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं होगा तो कब होगा.

पार्टी ने कहा कि अगर राम मंदिर का निर्माण 2019 चुनावों से पहले नहीं हुआ, तो यह देश के लोगों को धोखा देने जैसा होगा जिसके लिए भाजपा एवं आरएसएस को उनसे माफी मांगनी होगी. केंद्र एवं महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी शिवसेना ने हालिया साक्षात्कार में मोदी की टिप्पणी के लिए उन पर हमला बोला है. मोदी ने कहा था कि मंदिर निर्माण पर सरकार कोई भी कदम न्यायिक प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही उठायेगी. इस साक्षात्कार को कई टीवी चैनलों ने प्रसारित किया था. शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र सामना में एक संपादकीय में कहा, वह (मोदी) राम के नाम पर सत्ता में आये थे, हालांकि उनके मुताबिक भगवान राम कानून से बड़े नहीं हैं. अब सवाल यह है कि अगर बहुमतवाली सरकार में मंदिर का निर्माण नहीं होगा तो कब बनेगा.

संपादकीय में कहा गया कि मोदी सरकार ने गुजरात में सरदार वल्लभभाई पटेल की भव्य प्रतिमा बनायी है, लेकिन राम मंदिर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदारवाला साहस नहीं दिखाया. साथ ही कहा कि यह इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा. इसमें बताया गया कि राम मंदिर के लिए आंदोलन 1991-92 में शुरू हुआ था और सैकड़ों ‘कारसेवकों’ ने अपनी जान गंवायी थी. इसमें पूछा गया, किसने यह नरसंहार किया और क्यों? एक ओर सैकड़ो हिंदू कारसेवक मारे गये साथ ही मुंबई बम धमाकों में दोनों पक्ष (हिंदू एवं मुस्लिम समुदाय) के सैकड़ों लोग मारे गये. अगर, फैसला उच्चतम न्यायालय को ही करना था, तो यह नरसंहार एवं खूनखराबा क्यों?

उद्धव ठाकरे नीत पार्टी ने आगे पूछा कि क्या भाजपा एवं आरएसएस इन हत्याओं एवं खूनखराबे की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार है. संपादकीय में कहा गया, सिखों के नरसंहार (1984 के सिख विरोधी दंगों के बाद) के लिए जिस तरह से कांग्रेस को माफी मांगनी पड़ी. उसी प्रकार हमें भी उन लोगों की भावनाओं को समझना होगा जो हिंदुओं के नरसंहार के लिए (भाजपा से) माफी की मांग करते हैं.

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