केदारनाथ: आज भी है बिखरे कंकालों को अंतिम संस्कार का इंतजार

Updated at : 13 Jun 2014 5:38 PM (IST)
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केदारनाथ: आज भी है बिखरे कंकालों को अंतिम संस्कार का इंतजार

देहरादून: केदारनाथ में हुई तबाही के एक साल पूरे हो गये लेकिन आज भी इन इलाकों में अजीब सी सिहरन और खामोशी नजर आती है. एक तरफ इन हादसों के कारण देव भूमि में आने वाले श्रद्धालुओं में कमी आ गयी, तो दूसरी और कई नरकंकालें अभी भी इन रास्तों में अपनों का इंतजार कर […]

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देहरादून: केदारनाथ में हुई तबाही के एक साल पूरे हो गये लेकिन आज भी इन इलाकों में अजीब सी सिहरन और खामोशी नजर आती है. एक तरफ इन हादसों के कारण देव भूमि में आने वाले श्रद्धालुओं में कमी आ गयी, तो दूसरी और कई नरकंकालें अभी भी इन रास्तों में अपनों का इंतजार कर रहे हैं. हादसे के बाद सरकार ने दावा किया कि लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है लेकिन इन रास्तों पर नरकंकालें कोई और ही कहानी बयां करते है.

जब प्राकृतिक आपदाआयी, तो कई लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊंची जगहों पर पहुंचे लेकिन खोजी दल वहां तक नहीं पहुंच पाया. न जाने कितने लोगों ने भूख और ठंड में सिसक- सिसक कर अपनी जान गवां दी. आज भी लाखों लोग लापता है. सरकार ने तबाही के उन मंजरों को मिटाने और श्रद्धालुओं को एक बार फिर देव भूमि की ओर आकर्षित करने में कोई कोर कसर नही छोड़ी. लेकिन आज भी इन रास्तों में ना मिटाये जा सकने वाले अंशमौजूद है. उत्तराखंड सरकार की नींंद एक साल बाद भी नही खुली है . पूरे एक साल के बाद सरकार ने फैसला किया है कि लावारिस लाशों की तलाश की जायेगी और उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा. सरकार का यह कदम सोचने पर मजबूर करता है कि इतने सालों के बाद आखिर उन लावारिस लाशों का खयाल क्यूं आया. क्या ये लाशें भी इतने सालों से राजनीति का शिकार होते रहे.

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मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने आज उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार से त्रासदी के दौरान तथा मौजूदा दशा के संबंध में श्वेतपत्र जारी करने की मांग की.‘आपदा आये एक साल हो चुका है, हमारी मांग है कि राज्य सरकार आपदा पर श्वेतपत्र जारी कर यह बताये कि प्रभावित लोगों की दशा सुधारने के लिये इस अवधि के दौरान उसने क्या किया. ’ भाजपा का यह आरोप एक निजी टेलीविजन चैनल द्वारा केदारनाथ मार्ग पर पडने वाले जंगलचट्टी के पास स्थित जंगलों में सड चुके शवों का एक वीडियो फुटेज प्रसारित किये जाने के एक दिन बाद आया है. चैनल ने यह भी दावा किया है कि उस स्थान पर कम से कम 100 से ज्यादा नरकंकाल मौजूद होंगे.

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एक टीवी चैनल लावारिस लाशों की आवाज सरकार तक पहुंचाने में लगा है जबकि सरकार इस एक साल में उस भीषण हादसे को सबके दिलो दिमाग से पूरी तरह मिटाने पर लगा है. तीन दिवसीय विधानसभा सत्र के दौरान भी उनकी पार्टी ने सरकार से आपदा पर एक श्वेतपत्र जारी करने की मांग करते हुए यह बताने को कहा था कि केंद्र तथा अन्य एजेंसियों से प्राप्त धन कहां खर्च किया गया. प्रदेश सरकार उस भयावह हादसे को याद नहीं करना चाहती लेकिन केदारानाथ हादसे के एक साल पूरे होने के कारण आज पूरी मीडिया का ध्यान इस तरफ है इसी बहाने इस देवभूमि में उनकी आत्माओं की शाांति का रास्ता भी साफ होता नजर आ रहा है जो इतने सालों से अपनों की राह देख रहीं थी.

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