23 वर्षीया छात्रा ने बनायी कूड़ा इस्तेमाल की मशीन

Updated at : 28 Oct 2018 6:20 AM (IST)
विज्ञापन
23 वर्षीया छात्रा ने बनायी कूड़ा इस्तेमाल की मशीन

कॉलेज जानेवाले रास्ते पर एकत्र कचड़े को हटाने के आइडिया ने 23 वर्षीया निवेधा आरएम को शानदार स्टार्टअप दिया. इस वर्ष बेंगलुरु आधारित ‘ट्रैश कॉन’ नाम के स्टार्टअप को टेक 30 स्टार्टअप के रूप में चुना गया. यह कंपनी आपके घर से कूड़ा-कचड़ा इकट्ठा करती है और फिर उसमें से सॉलिड वेस्ट को अलग करने […]

विज्ञापन
कॉलेज जानेवाले रास्ते पर एकत्र कचड़े को हटाने के आइडिया ने 23 वर्षीया निवेधा आरएम को शानदार स्टार्टअप दिया. इस वर्ष बेंगलुरु आधारित ‘ट्रैश कॉन’ नाम के स्टार्टअप को टेक 30 स्टार्टअप के रूप में चुना गया. यह कंपनी आपके घर से कूड़ा-कचड़ा इकट्ठा करती है और फिर उसमें से सॉलिड वेस्ट को अलग करने के साथ-साथ रिसाइकल करती है.
ट्रैश कॉन की फाउंडर निवेधा आरएम बताती हैं कि उनके दोस्त कॉलेज जाने वाले रास्ते से गुजरना पसंद नहीं करते थे क्योंकि वहां पर कूड़े आदि की वजह से गंदी महक आया करती थी. सब इस समस्या से मुंह फेर लेते थे, लेकिन इसका समाधान ढूंढने का प्रयास कोई भी नहीं करता था. निवेधा ने इस समस्या को व्यापक तौर पर देखा और ठान लिया कि वह इसका उपाय खोज निकालेंगी.
निवेधा ने बेंगलुरु के आरवी इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई की है. उन्होंने वेस्ट मटेरियल को अलग-अलग करने वाली एक मशीन बनायी. यह मशीन नगर निगम द्वारा इकट्ठा किये जाने वाले कूड़े के ढेर से गीले और सूखे कचरे को अलग करती है. निवेधा कहती हैं कि उनकी मशीन की सबसेखास बात यह है कि मशीन किसी भी वेस्ट मटेरियल को प्रॉसेस करने में समर्थ है. चाहे वह मटेरियल किसी प्रारूप में हो.
पांच टन वेस्ट मटेरियल प्रॉसेस रोजाना
निवेधा का कहना है िक एक ही साइज के चाकू या ब्लेड की मदद से सभी प्रकार के वेस्ट मटेरियल को काट पाना संभव नहीं है, इसलिए हमें इस समस्या को सुलझाने के लिए काफी रिसर्च करनी पड़ी. उनकी बनायी ट्रैश कॉन मशीन बायोडिग्रेडेबल और नॉन-बायोडिग्रेडेबल वेस्ट मटेरियल को अलग-अलग कर देती है. निवेधा का दावा है कि ऐसी ही एक मशीन बेंगलुरु के श्रीनगर वार्ड (नंबर 156) में काम कर रही है और इस मशीन की मदद से रोजाना पांच टन तक वेस्ट मटीरियल प्रॉसेस किया जाता है.
कैसे काम करती है ट्रैश कॉन मशीन
गीले और सूखे कचरे का मिश्रण प्लास्टिक बैग में जमा होता है और इन बैग्स को एक बैग ब्रेकिंग सिस्टम में प्रॉसेस किया जाता है. इसके बाद कचरे को एक बेल्ट के माध्यम से श्रेडर मशीन में ले जाया जाता है.
निवेधा का कहना है कि 500 से अधिक घरों वाली टाउनशिप परियोजनाओं, कॉर्पोरेट दफ्तरों, वेस्ट मैनेजमेंट कंपनियों और नगर निगम द्वारा इस मशीन का इस्तेमाल किया जात सकता है. फिलहाल, क्षमता के आधार चार प्रकार की मशीनें हैं. ये मशीनें क्रमशः 500 किलो, 2 टन, 5 टन और 10 टन क्षमता वाली हैं.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola