ट्रेन की चपेट में आने से तीन साल में करीब 50 हजार लोगों की हुई मौत

नयी दिल्ली : भारतीय रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक 2015 और 2017 के बीच रेल पटरियों पर ट्रेनों की चपेट में आने से करीब 50,000 लोगों की जान गयी है. अमृतसर में 19 अक्टूबर को रावण दहन देखने के दौरान एक ट्रेन की चपेट में आने से रेलवे पटरियों पर खड़े कम से कम 59 […]
नयी दिल्ली : भारतीय रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक 2015 और 2017 के बीच रेल पटरियों पर ट्रेनों की चपेट में आने से करीब 50,000 लोगों की जान गयी है.
अमृतसर में 19 अक्टूबर को रावण दहन देखने के दौरान एक ट्रेन की चपेट में आने से रेलवे पटरियों पर खड़े कम से कम 59 लोगों की मौत हो गयी. इसके बाद सवाल खड़ा हो गया है कि रेलवे ऐसी मौतों को कैसे रोक सकती है. रेलवे द्वारा मुहैया कराये गये आंकड़ों के मुताबिक 2015 और 2017 के बीच रेल पटरियों पर लोगों के ट्रेनों की चपेट में आने के कारण 49,790 जानें गई हैं.
इनमें सबसे अधिक मौत उत्तर रेलवे जोन में हुयी है और यह आंकड़ा 7,908 है. इसके बाद दक्षिण रेलवे जोन में 6,149 और पूर्वी रेलवे जोन में 5,670 लोगों की मौत हुई हैं. रेल पटरियों पर मौत जबरन घुस जाने, सुरक्षा और चेतावनी निर्देशों का उल्लंघन करने, ओवर-ब्रिजों का उपयोग नहीं करने और रेलवे पटरियां पार करते समय मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों का इस्तेमाल करने के कारण हुई है.
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