शबे-बरात मुक्ति की रात है हुडदंग की नहीं

Updated at : 08 Jun 2014 11:28 AM (IST)
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शबे-बरात मुक्ति की रात है हुडदंग की नहीं

नयी दिल्ली : पिछले कुछ साल से शबे-बरात की रात को गुमराह युवकों द्वारा सडकों पर हुडदंग मचाने और मोटरसाइकलों से स्टंट करने के बढते चलन से परेशान मुस्लिम समुदाय ने इस बार इसे रोकने की कोशिशें तेज कर दी हैं. समुदाय के धार्मिक नेता और अन्य जिम्मेदार व्यक्ति, लोगों से अपील कर रहे हैं […]

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नयी दिल्ली : पिछले कुछ साल से शबे-बरात की रात को गुमराह युवकों द्वारा सडकों पर हुडदंग मचाने और मोटरसाइकलों से स्टंट करने के बढते चलन से परेशान मुस्लिम समुदाय ने इस बार इसे रोकने की कोशिशें तेज कर दी हैं.

समुदाय के धार्मिक नेता और अन्य जिम्मेदार व्यक्ति, लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे शबे-बरात की रात अपने बच्चों को मोटर साइकिल और स्कूटर न दें। साथ ही यह संदेश भी पहुंचाया जा रहा है कि यह रात इबादत की होती है ना कि शोर-शराबा करके उसमें खलल डालने या लोगों को परेशान करने की. दिल्ली पुलिस भी इस बार हुडदंग को रोकने के लिए खासी मुस्तैद नजर आ रही है. पुलिस ने मस्जिदों के इमाम और अन्यों के साथ बैठकें की हैं. पर्चे बांट कर भी लोगों से अपील की जा रही है.

इस महीने की 13 तारीख को शबे-बरात है. चांदनी चौक स्थित फतेहपुरी शाही मस्जिद के इमाम मौलाना मुफ्ती मुकर्रम ने कहा, ‘‘शबे-बरात तो असल में इबादत की रात है. इसमें कहां से आ गया बाजार जाना, सैर सपाटा करना, बाइक चलाना. यह वक्त की बर्बादी है और गुनाह है. यह पवित्र रात है. हमें अल्लाह से दुआ करनी चाहिए. चाहे हम मस्जिद में बैठें या घर में। हमें इस रात को अपने गुनाहों और बीती जिंदगी में किए गए कर्मो का जायजा लेना चाहिए और अल्लाह से तौबा करनी चाहिए.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मोहल्ला कमेटियां और धर्म गुरु युवाओं को बताएं कि शबे बरात क्या है और उन्हें नेक कामों में लगाएं. उन्हें समझाएं कि ऐसा कोई काम नहीं होना चाहिए जिससे दूसरों को पेरशानी हो या खुद के लिए समस्या पैदा हो। मैं खुद पिछले 15 दिनों से इस काम में लगा हुआ हूं. मुझे उम्मीद है कि इस बार कुछ अच्छा असर पडेगा और हम इसी तरह लगे रहे तो साल दो साल में यह समस्या खत्म हो जाएगी.’’

इस्लामिक विद्वान प्रोफेसर अख्तर-उल-वासे ने कहा कि शबे-बरात मुक्ति की रात होती है और इस रात में अंतिम सत्य मौत को याद करना चाहिए. इसलिए लोग कब्रिस्तान जाते हैं क्योंकि वो अंतिम जगह है. उन्होंने कहा कि यह चिंतन करने की रात होती है. इस रात को अपने रब को गंभीरता से याद करना चाहिए, जिसके पास सबको एक दिन जाकर अपने कर्मां का हिसाब देना है. वासे ने कहा कि यह रात शलीनता से पेश आने की रात है न कि सडकों पर उतर कर शोरगुल करने की. जो लोग ऐसा करते हैं और लोगों को परेशान करते हैं तथा अपनी जिंदगी को खतरों में डालते हैं, वे मुसलमानों का, इस्लाम का और अपने परिवार वालों का नाम खराब करते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों का इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं है.

वहीं मुस्लिम इलाकों के जिम्मेदार लोग भी शबे-बरात के प्रति लोगों को जागरुक करने में लगे हुए हैं. हौज काजी इलाके में रहने वाले मोहम्मद तकी ने अपने खर्चे पर दस हजार पर्चे छपवा कर जुमे की नमाज के बाद बंटवाएं हैं. इस पर्चे में उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे शबे-बरात की रात अपने बच्चों को बाइक और स्कूटर न ले जानें दे और अपने बच्चों से इलाकों की मस्जिदों में ही इबादत कराएं.

वहीं मध्य जिला के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आलोक कुमार ने कहा कि सभी मस्जिदों के इमामों की एक बैठक बुलाई गई थी जिसमें उनसे अनुरोध किया गया है कि वे मोटर साइकिलों पर स्टंट करने वालों को समझाएं की यह इबादत की रात है ,इबादत करें. उन्होंने कहा कि पुलिस लोगों को जागरुक करने के लिए पर्चे भी बांट रही है. दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने कहा कि लोगों से अपील की जा रही है और उम्मीद है लोग इसे मानेंगे. इस हुडदंग को रोकने के लिए जो कोशिशें करनी चाहिए वो की जा रही हैं.

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