माओवादी क्षेत्रों में काम करने वालों को मिलेगी कैश, प्रमोशन व मनपसंद पोस्टिंग

नयी दिल्ली: सरकार नक्सल समस्या से निपटने के लिए एक नई रणनीति तैयार कर रही है. इसके तहत माओवादी हिंसा प्रभावित इलाकों में काम करने वाले नौकरशाहों और सुरक्षाकर्मियों को अपना कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद विशेष आर्थिक लाभ, आउट आफ टर्न प्रमोशन और पसंद की पोस्टिंग आदि दिये जा सकते हैं. देश में […]
नयी दिल्ली: सरकार नक्सल समस्या से निपटने के लिए एक नई रणनीति तैयार कर रही है. इसके तहत माओवादी हिंसा प्रभावित इलाकों में काम करने वाले नौकरशाहों और सुरक्षाकर्मियों को अपना कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद विशेष आर्थिक लाभ, आउट आफ टर्न प्रमोशन और पसंद की पोस्टिंग आदि दिये जा सकते हैं.
देश में नक्सल हिंसा प्रभावित इलाकों को ‘सबसे खतरनाक इलाके’ मानते हुए सरकार इन इलाकों में तैनात अर्धसैनिक बलों के जवानों का ‘हार्डशिप भत्ता’ बढाएगी. ये भत्ता जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर में कार्य करने के दौरान मिलने वाले भत्ते से अधिक होगा.
फिलहाल जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर में कार्य करने वाले अर्धसैनिक बल के एक कांस्टेबल को इस समय सामान्य वेतन और भत्तों के अलावा लगभग 8000 रुपये मासिक अतिरिक्त मिलते हैं. सरकारी सूत्रों ने बताया कि माओवादी हिंसा की समस्या को रोकने के लिए उठाये जा रहे कदमों की समीक्षा के लिए गृह मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा बुलायी गयी बैठक के दौरान इस बारे में चर्चा की गयी. इन प्रोत्साहनों का मकसद प्रतिभाशाली आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को नक्सल हिंसा प्रभावित इलाकों में जाने के लिए तैयार करना है.
एक अन्य कदम के तहत नई सरकार ने गृह मंत्रालय में अपने नक्सल प्रबंधन संभाग का नाम बदलकर वामपंथी उग्रवाद संभाग करने का फैसला किया है. गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चूंकि नक्सल बेहद सीमित शब्द है इसलिए नई सरकार इसे काफी बडा नाम देना चाहती है.
सिंह ने जोर दिया है कि बलों का मनोबल उंचा रखा जाना चाहिए और विकास तभी होगा जब सुरक्षा स्थिति में सुधार हो. ये नीतिगत बदलाव अमेरिकी माडल से प्रेरित लगते हैं, जिसमें सुरक्षाबलों को खतरे का वेतन, अत्यधिक खतरे का वेतन, हार्डशिप ड्यूटी वेतन, प्रीमियम वेतन रेस्ट जैसे विशेष प्रोत्साहन मिलते हैं और उन्हें अपनी पसंद की पोस्टिंग का विकल्प भी दिया जाता है.
सूत्रों ने बताया कि गृह मंत्री और गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू को आज वामपंथी उग्रवाद के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी गयी. उन्हें ये भी बताया गया कि इसे नियंत्रित करने के लिए कौन से कदम उठाये जा रहे हैं.गृह मंत्री ने नक्सल हिंसा प्रभावित इलाकों में मौजूदा विकास परियोजनाओं को पूरा करने पर जोर दिया. इनमें 10000 करोड रुपये की लागत से 5000 किलोमीटर लंबी सडकों का निर्माण और 3000 करोड रुपये की राशि से 2199 मोबाइल फोन टावर लगाना शामिल है.
सिंह ने वायदा किया कि सभी विकास परियोजनाओं के लिए धन का प्रवाह नियमित तौर पर सुनिश्चित किया जाएगा.गृह मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे उस नीति की समीक्षा करें, जिसके तहत वन भूमि भूमिहीन आदिवासियों को दी जाती है ताकि सही आवेदकों को पट्टे दिये जा सकें. छत्तीसगढ, झारखंड और बिहार देश के नक्सल हिंसा प्रभावित राज्यों में से सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्य हैं.
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