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एनबीसीसी ने हाई कोर्ट में पुनर्विकास के लिए चार जुलाई तक पेड़ ना काटने पर सहमति जतायी

नयी दिल्ली : एनबीसीसी ने हाई कोर्ट में दक्षिण दिल्ली के पुनर्विकास के लिए चार जुलाई तक पेड़ ना काटने पर सहमति जतायी है. 6 कॉलोनियों में सरकारी आवास बनाने के लिए क़रीब 16 हज़ार पेड़ काटने की योजना के ख़िलाफ़ सोमवार को हाइकोर्ट में सुनवाई हुई जिसमें एनबीसीसी ने पेड़ ना काटने पर सहमति […]

नयी दिल्ली : एनबीसीसी ने हाई कोर्ट में दक्षिण दिल्ली के पुनर्विकास के लिए चार जुलाई तक पेड़ ना काटने पर सहमति जतायी है. 6 कॉलोनियों में सरकारी आवास बनाने के लिए क़रीब 16 हज़ार पेड़ काटने की योजना के ख़िलाफ़ सोमवार को हाइकोर्ट में सुनवाई हुई जिसमें एनबीसीसी ने पेड़ ना काटने पर सहमति जतायी. इससे पहले 22 जून को दिल्ली हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार की दी हुई मंज़ूरी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. हाइकोर्ट ने आवास और पर्यावरण मंत्रालयों के साथ एनबीसीसी, सीपीडब्ल्यूडी और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी को नोटिस जारी किया था.

कोर्ट ने तब कहा था कि वो एकतरफ़ा आदेश देने की इच्छुक नहीं है और कोई भी निर्देश जारी करने से पहले एनबीसीसी का पक्ष वह सुनना चाहती है. डॉ कौशल कांत मिश्र ने जो अर्ज़ी दायर की थी उसमें कहा गया था कि जहां पेड़ कटने हैं वो कॉलोनियां हैं सरोजनी नगर, नैरोजी नगर, नेताजी नगर, त्यागराज नगर, मोहम्मदपुर और कस्तूरबा नगर शामिल हैं. इस मामले में दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने दिल्ली के मुख्य सचिव और पर्यावरण सचिव को ख़त लिखा.

ख़त में उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट की दोबारा रिपोर्ट दें जिसमें कम पेड़ काटने की ज़रूरत की बात हो, साथ ही पेड़ काटने की बजाए उन्हें दिल्ली के दूसरे इलाक़ों में शिफ़्ट करने पर विचार किया जाए.

चिपको आंदोलन
इधर , सरोजिनी नगर इलाके में करीब 1,500 प्रदर्शनकारियों ने पेड़ों को गले लगाकर अपने ‘चिपको आंदोलन’ की शुरुआत की है. यदि आपको याद हो तो 1970 के दशक में उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) में पेड़ों की कटाई के विरोध में लोगों ने यह आंदोलन चलाया था. लोगों ने पेड़ों को ‘राखी’ के तौर पर हरे रंग का रिबन भी बांधने का काम किया.

Prabhat Khabar Digital Desk
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