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दिल्ली के आर्चबिशप के पत्र से राजनीतिक उफान, आलोचनाओं के बाद दिया स्पष्टीकरण

नयी दिल्ली : दिल्ली के आर्चबिशप अनिल क्यूटो ने अपनी इस टिप्पणी से तूफान पैदा कर दिया कि देश में ‘अशांत राजनीतिक माहौल’ ने भारत के संवैधानिक सिद्धांतों और धर्मनिरपेक्ष तानेबाने के समक्ष खतरा पैदा किया है. सरकार ने मंगलवारको इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये टिप्पणियां उनकी ‘पूर्वाग्रहपूर्ण’ सोच को दिखाती […]

नयी दिल्ली : दिल्ली के आर्चबिशप अनिल क्यूटो ने अपनी इस टिप्पणी से तूफान पैदा कर दिया कि देश में ‘अशांत राजनीतिक माहौल’ ने भारत के संवैधानिक सिद्धांतों और धर्मनिरपेक्ष तानेबाने के समक्ष खतरा पैदा किया है. सरकार ने मंगलवारको इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये टिप्पणियां उनकी ‘पूर्वाग्रहपूर्ण’ सोच को दिखाती है.

क्यूटो ने 12 मई को कर्नाटक चुनावों से कुछ दिनों पहले दिल्ली में अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आनेवाले सभी चर्चों के पादरियों और धार्मिक संस्थानों को एक पत्र लिखा था तथा 2019 के आम चुनावों के मद्देनजर ‘प्रार्थना अभियान’ चलाने की अपील की. ईसाईयों से हर शुक्रवार को ‘देश के लिए’ उपवास रखने की अपील करनेवाले आर्चबिशप ने मंगलवारको स्पष्ट किया कि उनके पत्र का नरेंद्र मोदी सरकार से कुछ लेना-देना नहीं है. गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत धर्म या पंथ के आधार पर भेदभाव नहीं करता, जबकि उनके मंत्रिमंडल के सहयेागी मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि आर्चबिशप अपनी ‘पूर्वाग्रहपूर्ण’ सोच से बाहर निकलें और उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार में अल्पसंख्यकों ने तेजी से प्रगति की है.
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि धर्म के आधार पर लोगों का ध्रुवीकरण करना ‘उचित नहीं’ है. आर्चबिशप ने बाद में स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी सरकार के लिए नहीं थीं. पत्र के बारे में पूछे जाने पर क्यूटो ने कहा, ‘मैंने कहा कि हमारे देश के लिए सप्ताह में एक बार समय निकालें और खासतौर से जब चुनाव आ रहे हों और सरकार हमारी चिंता का विषय हो. अत: यह कहीं से भी नरेंद्र मोदी या किसी अन्य की सरकार से जुड़ा नहीं है.’ आर्चबिशप ने अपने पत्र में लिखा था, ‘हम अशांत राजनीतिक माहौल देख रहे हैं जो संविधान में दिये गये लोकतांत्रिक सिद्धांतों और हमारे देश के धर्मनिरपेक्ष तानेबाने के लिए खतरा पैदा करता हैं.’ पत्र में कहा गया है, ‘देश और उसके नेताओं के लिए हर समय प्रार्थना करने की हमारी पवित्र रीति रही है और तो और जब हम आम चुनावों के लिए जाते हैं तब भी. हम 2019 की ओर देख रहे हैं, जब हमारी एक नयी सरकार होगी, तो चलिये 13 मई से हमारे देश के लिए एक प्रार्थना अभियान चलायें.’
क्यूटो की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए नकवी ने कहा कि मोदी सरकार ने ‘बगैर भेदभाव के विकास’ के लिए काम किया है. अल्पसंख्यक कार्य मंत्री ने कहा कि जब तक लोग पूर्वाग्रहपूर्ण सोच के साथ नरेंद्र मोदी के नेतृत्ववाली सरकार को देखेंगे, तब तक उन्हें प्रगति नहीं दिखायी देगी. उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार के तहत अल्पसंख्यकों की सुरक्षा मजबूत हुई है, जबकि गृह मंत्री ने कहा कि भारत धर्म या पंथ के आधार पर किसी से भी भेदभाव नहीं करता है. सिंह ने कहा, ‘मैं कह सकता हूं कि भारत ऐसा देश है जहां धर्म या पंथ के आधार पर किसी के भी खिलाफ भेदभाव नहीं होता. ऐसी चीजों की कभी इजाजत नहीं दी जा सकती.’
संवाददाताओं से बातचीत में शाह ने कहा कि धर्म के आधार पर लोगों का ध्रुवीकरण उचित नहीं है. विपक्षी नेताओं एन चंद्रबाबू नायडू और ममता बनर्जी द्वारा क्यूटो का समर्थन करने पर भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘यह जाहिर है कि हमारे प्रतिद्वंद्वी ऐसे बयान का समर्थन करेंगे. अगर कोई हमें हराने के बारे में बात करता है तो यह स्वाभाविक है कि वे उनका समर्थन करेंगे.’ केंद्रीय पर्यटन मंत्री केजे अल्फोंस ने कहा कि ये टिप्पणियां सरकार के लिए अनुचित हैं और पादरी को राजनीति से दूर रहना चाहिए. अल्फोंस ने कहा, बंबई ऑस्वाल्ड कार्डिनल ग्रैशियस के आर्चबिशप और शीर्ष बिशप से बात की. वे प्रधानमंत्री से सहमति रखते हैं. कुछेक लोग हैं जो प्रधानमंत्री को पसंद नहीं करते. पादरियों को राजनीति से दूर रहना चाहिए.’
अन्य केंद्रीय मंत्री गिरीराज सिंह ने ट्वीट कर कहा, ‘चर्च को इटली से आदेश मिलते हैं और वे पाकिस्तान से आनेवाले छद्म धर्मनिरपेक्ष लोगों के समर्थन में फतवा देते हैं. वह दिन दूर नहीं है जब हिंदू इसे पहचानेंगे और इन आवाजों का मुंहतोड़ जवाब देंगे.’ माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि क्यूटो लोगों से प्रार्थना करने की अपील कर रहे हैं और कह रहे हैं कि धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र के संविधान के मूल्यों की रक्षा की जानी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘आर्चबिशप के प्रवक्ता ने कहा कि वार्षिक प्रार्थना की अपील हमेशा की जाती है. भारत में अल्पसंख्यकों के लिए केवल वही गारंटी है जो संविधान में उन्हें बराबरी का वादा किया गया है.’
पत्र पर प्रतिक्रियाओं के बीच क्यूटो ने कहा कि सत्ता में आनेवाली हर सरकार को लोगों के अधिकारों और आजादी की रक्षा करनी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘चुनाव हम पर असर डालते हैं. इसलिए हम चुनावों के बारे में बात करते हैं क्योंकि सरकार से हमें फर्क पड़ता है. हम सरकार से दूर नहीं रह सकते. हम प्रार्थना करते हैं कि हमारे पास ऐसी सरकार हो जो ईसाई समुदाय के लोगों की स्वतंत्रता, अधिकारों और कल्याण की चिंता करे.’ क्यूटो के सचिव फादर रॉबिन्सन ने कहा कि यह पत्र आठ मई को जारी किया गया था और सभी चर्चों में पहले ही पढ़ा जा चुका है. उन्होंने कहा, ‘यह दो सप्ताह पुराना पत्र है. इसमें लोगों को चुनावों, देश और सभी नेताओं के लिए प्रार्थना करने के लिए आमंत्रित किया गया है. इसमें कुछ भी गलत नहीं है.’
Prabhat Khabar Digital Desk
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