जस्टिस केएम जोसेफ की नियुक्ति पर आज सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की बैठक, केंद्र ने जताया है एतराज
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :02 May 2018 11:02 AM (IST)
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नयी दिल्ली : उत्तराखंड उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस केएम जोसफ की सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में नियुक्ति पर आज सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की बैठक होने वाली है. गौरतलब है कि पिछले माह केंद्र सरकार ने जस्टिस जोसफ की नियुक्ति से संबंधित सिफारिश को वापस कर दिया था और अपना एतराज जताया था. […]
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नयी दिल्ली : उत्तराखंड उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस केएम जोसफ की सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में नियुक्ति पर आज सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की बैठक होने वाली है. गौरतलब है कि पिछले माह केंद्र सरकार ने जस्टिस जोसफ की नियुक्ति से संबंधित सिफारिश को वापस कर दिया था और अपना एतराज जताया था. आज की बैठक में कोलेजियम के पांच सदस्य चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस जे चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ, कानून मंत्री रवि शंकर द्वारा भेजे गये नोट पर बारीकी से चर्चा करेंगे और उसके बाद ही कोई निर्णय किया जायेगा.
कानून के जानकारों के अनुसार अगर कोलेजियम दोबारा अपनी सिफारिशों को सरकार के पास भेजती है, तो केंद्र सरकार जस्टिस केएम जोसेफ की नियुक्ति करने के लिए बाध्य है. गौरतलब है कि एक जनवरी को कोलेजियम ने सार्वजनिक तौर पर यह कहा था किजस्टिस जोसेफ सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में एक योग्य और क्षमतावान व्यक्ति हैं.
सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति को लेकर सरकार और सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के बीच टकराव के आसार बन गए हैं. सुप्रीम कोर्ट कोलिजियम ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के एम जोसेफ और वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा का नाम भेजा था, लेकिन सरकार ने जस्टिस जोसेफ के नाम पर एतराज जताया है.
इधर कांग्रेस पार्टी ने मुद्दे पर सरकार की खिंचाई शुरू कर दी है और कहा कि यह फैसला सीधे-सीधे उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन को खारिज करने के उनके फैसले की वजह से लिया गया. जस्टिस जोसफ की नियुक्ति के लिए दोबारा सिफारिश भेजी जाये. पूर्व अटार्नी जनरल सोली सोराबजी ने भी इस मामले में कहा है कि जजों की नियुक्ति में अंतिम फैसला कोलेजियम का होता है ना कि सरकार का. सरकार राय दे सकती है लेकिन फैसला कोलेजियम ही करती है.
कल पूर्व चीफ जस्टिस आर एम लोढ़ा ने सुप्रीम कोर्ट में मौजूदा स्थिति को ‘ दुर्भाग्यपूर्ण ‘ बताया. उन्होंने कहा कि सीजेआई भले ही न्यायाधीशों को मामले आवंटित करने के मामले में सर्वेसर्वा हों, लेकिन यह काम ‘ निष्पक्ष तरीके से और संस्था के हित ‘ में होना चाहिए. न्यायमूर्ति लोढ़ा ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता से समझौता नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि सीजेआई को नेतृत्व कौशल का परिचय देकर और अपने सहकर्मियों को साथ लेकर संस्था को आगे बढ़ाना चाहिए.
न्यायमूर्ति लोढ़ा को भी प्रधान न्यायाधीश के तौर पर ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा था, जैसा उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के एम जोसफ के मामले में हुआ है. उस वक्त भी राजग सरकार ने कॉलेजियम की सिफारिश को अलग किया था और कॉलेजियम से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रह्मण्यम को उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने की अपनी सिफारिश पर पुनर्विचार करने को कहा था.
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