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…..जब मृत बेटे के शुक्राणुओं से दादी बनी राजश्री, ऐसे हुई थी बेटे की मौत

पुणे : पुणे में रहने वाली राजश्री पाटिल की जिंदगी में दो साल पहले उस वक्त अप्रत्याशित मोड़ आया, जब जर्मनी में उनके बेटे प्रथमेश पाटिल की कैंसर से मौत हो गयी थी. लेकिन अब उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है. प्रथमेश के संरक्षित शुक्राणुओं से राजश्री सरोगेसी विधियों के जरिये पैदा हुए जुड़वां बच्चों […]

पुणे : पुणे में रहने वाली राजश्री पाटिल की जिंदगी में दो साल पहले उस वक्त अप्रत्याशित मोड़ आया, जब जर्मनी में उनके बेटे प्रथमेश पाटिल की कैंसर से मौत हो गयी थी. लेकिन अब उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है. प्रथमेश के संरक्षित शुक्राणुओं से राजश्री सरोगेसी विधियों के जरिये पैदा हुए जुड़वां बच्चों की दादी बन गयी हैं.
पुणे के सह्याद्रि अस्पताल के डॉक्टरों ने आइवीएफ प्रक्रिया से भ्रूण के निर्माण के लिए प्रथमेश के शुक्राणुओं का एक दाता के अंडाणुओं से मेल कराया. जर्मनी में प्रथमेश की मौत से बहुत पहले ही उसके शुक्राणु निकाल कर संरक्षित कर लिये गये थे. बहरहाल, प्रथमेश के शुक्राणुओं से दाता के अंडाणुओं के मेल के बाद भ्रूण एक सरोगेट मां के गर्भ में डाला गया.
जिसने जुड़वां बच्चों, एक लड़का और एक लड़की को जन्म दिया. राजश्री ने बताया कि 2010 में उनका बेटा मास्टर्स डिग्री हासिल करने के लिए जर्मनी गया था जहां उसे ब्रेन ट्यूमर हो गया. उन्होंने कहा कि इससे हमारा पूरा परिवार सदमे में था. जर्मनी में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि प्रथमेश की कीमोथेरेपी और विकिरण प्रक्रिया शुरू की जाये. उन्होंने उससे अपने शुक्राणु संरक्षित करने को भी कहा ताकि इलाज के बाद उसके शरीर पर किसी नकारात्मक प्रभाव को रोका जा सके. बहरहाल, पुणे के एक स्कूल में अध्यापन कार्य करने वाली राजश्री ने बताया कि उसे बेहोशी और ऐंठन हुई और आंखों की रोशनी भी चली गयी.
साल 2016 में हुई थी बेटे की मौत
राजश्री ने बताया कि बेटे को चौथे चरण का कैंसर होने की बात पता चलने पर मेरी पहली कोशिश थी कि प्रथमेश को जर्मनी से भारत लाया जाये. परिवार 2013 में प्रथमेश को भारत लेकर आया और उसे मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन सेहत में थोड़ा-बहुत सुधार होने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और सितंबर 2016 में उसने दम तोड़ दिया. प्रथमेश की मौत के बाद राजश्री को अपना बेटा वापस पाने की चाह थी.
जर्मनी से भारत लाया गया शुक्राणु
बेटे को वापस पाने की चाह में उन्होंने जर्मनी में उन्होंने संरक्षित शुक्राणु कोष से संपर्क किया, जहां प्रथमेश के शुक्राणुओं को संरक्षित रखा गया था. औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसके शुक्राणु भारत लाये गये. राजश्री ने अपने बेटे के शुक्राणुओं की मदद से आइवीएफ प्रक्रिया पूरी करने के लिए सह्याद्रि अस्पताल से संपर्क किया. अस्पताल में आइवीएफ की प्रमुख सुप्रिया पुराणिक ने बताया कि उन्हें खुशी है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी लोगों के चेहरों पर मुस्कान ला रही है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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