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मोदी और नेतन्याहू की मौजूदगी में तीन मूर्ति चौक का नाम इस्राइली शहर हइफा के नाम पर रखा गया

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके इस्राइली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू ने यहां तीन मूर्ति चौक का नाम तीन मूर्ति हाइफा चौक करने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में रविवार को हिस्सा लिया. दोनों नेताओं ने स्मारक पर पुष्पचक्र चढ़ाया और वहां रखी आगंतुक पत्रिका पर भी हस्ताक्षर किया. नेतन्याहू छह दिवसीय दौरे पर […]

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके इस्राइली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू ने यहां तीन मूर्ति चौक का नाम तीन मूर्ति हाइफा चौक करने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में रविवार को हिस्सा लिया. दोनों नेताओं ने स्मारक पर पुष्पचक्र चढ़ाया और वहां रखी आगंतुक पत्रिका पर भी हस्ताक्षर किया.

नेतन्याहू छह दिवसीय दौरे पर रविवारको यहां पहुंचे और प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी अगवानी की. तीन मूर्ति पर कांस्य की तीन मूर्तियां हैदराबाद, जोधपुर और मैसूर लैंसर का प्रतिनिधित्व करती हैं जो 15 इंपीरियल सर्विस कैवलरी ब्रिगेड का हिस्सा थे. ब्रिगेड ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 23 सितंबर 1918 के दौरान हाइफा शहर पर हमला कर जीत हासिल की थी. इस युद्ध के दौरान 44 भारतीय सैनिकों को शहादत मिली थी. आज तक, 61वीं कैवलरी ब्रिगेड 23 सितंबर को स्थापना दिवस या ‘हाइफा दिवस’ मनाती है.

सालभर पहले एनडीएमसी ने इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया था. इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू की निर्धारित भारत यात्रा के बाद यह घोषणा की गयी है. पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस्राइल यात्रा के दौरान नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने तीन मूर्ति मार्ग और चौक का नाम हाइफा के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा. अप्रैल में एक बैठक में एनडीएमसी के कुछ सदस्यों ने दावा किया कि यह प्रस्ताव पारित हो गया है, लेकिन पर परिषद के अध्यक्ष नरेश कुमार ने बाद में घोषणा की थी कि यह मुद्दा टाल दिया गया.

परिषद के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके इस्राइली समकक्ष बेंजामिन नेतान्याहू स्मारक पर संयुक्त रूप से श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे.’ उन्होंने कहा, ‘हैफा की लड़ाई के सौंवे साल में भारत और इस्राइल के बीच मित्रता के प्रतीक के तौर पर तीन मूर्ति चौक का नाम अब तीन मूर्ति हाइफा चौक होगा.’ द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों ने हाइफा को ऑटोमन साम्राज्य के कब्जे से मुक्त कराया था. 15 वीं इंपेरियल सर्विस कैवलरी ब्रिग्रेड के बहुत सारे भारतीय सैनिक इस शहर को आजाद कराने की लड़ाई में शहीद हुए थे और करीब 900 का इस्राइल में अंतिम संस्कार किया गया था. पिछले कुछ सालों में आरएसएस समेत कई संगठनों ने तीनमूर्ति चौक रोड और चौक का नाम बदलने की मांग की थी.

Prabhat Khabar Digital Desk
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