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मणिशंकर पर कार्रवाई कर राहुल गांधी ने खींच दी मर्यादा की लकीर, दूसरी पार्टियों पर बढ़ा नैतिक दबाव

Updated at : 08 Dec 2017 12:20 PM (IST)
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मणिशंकर पर कार्रवाई कर राहुल गांधी ने खींच दी मर्यादा की लकीर, दूसरी पार्टियों पर बढ़ा नैतिक दबाव

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर द्वारा नीचआदमी की संज्ञा देने पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को त्वरित एक्शन लिया और पहले तो अय्यर को माफी मांगने का निर्देश दिया और उसके कुछ देर बाद उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया. कांग्रेस के अध्यक्ष बनने जा […]

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नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर द्वारा नीचआदमी की संज्ञा देने पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को त्वरित एक्शन लिया और पहले तो अय्यर को माफी मांगने का निर्देश दिया और उसके कुछ देर बाद उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया. कांग्रेस के अध्यक्ष बनने जा रहे राहुल गांधीद्वाराउठाया गया यह पहला और बड़ा निर्णय है, जोराजनेताओं कोयहसंदेश देताहै कि राजनीति मेंआलोचना हो, प्रतिद्वंद्विता हो, लेकिनमर्यादा की सीमाएं न लांघी जायें और बेहद हल्के और आपत्तिजनकशब्दों का प्रयोगनकिया जाये.राहुलगांधी का यह कदमदूसरेदलोंकेलिए भी सीख है.

भारतीय राजनीति में मर्यादा और शब्दों की गरिमा हमेशा से एक अहम तत्व रही है. लेकिन, 70-80 के दशक में राजनीतिक भाषा में शुरू हुई गिरावट नयी सदी में बढ़ती गयी. राजनीतिक नेता अपने प्रतद्वंद्वियों की आलोचना में कई बार सीमाएं लांघ जाते हैं. मौत के सौदागर, जीजा-साला, टंच माल, नालायक, बच्चे भूल कर जाते हैं, रामजादे और …जादे, पाकिस्तान चले जाओ जैसे शब्दों-पंक्तियों का प्रयोग राजनेता कर जाते हैं. इन शब्दों का बयानों का इतिहास देखें तो आज तक ऐसे बयान देने वाले नेता व उनकी पार्टी को कभी इसका लाभ नहीं हुआ है, नुकसान अवश्य हुआ है. इससे पार्टी और नेता की निजी छवि तो प्रभावित होती ही है, लोगों की मन:स्थिति भी उनके खिलाफ बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पूर्व में अपनी पार्टी के नेताओं द्वारा आये ऐसे बयानों के प्रभावों का निश्चित रूप से आकलन किया होगी, तभी उन्होंने मणिशंकर अय्यर के खिलाफ ठोस कार्रवाई की. अय्यर ने अपने बचाव में यह तर्क दिया कि वे गैर हिंदी भाषी हैं, अंगरेजी में सोच कर हिंदी में बोलते हैं, ऐसे में गलत शब्द का उनसे भूल वश चयन हो गया. पर, मणिशंकर अय्यर के इस दावे में कोई दम नहीं है. उन्होंने हमेशा दिल्ली की राजनीति की है. वे पत्रकारों व चैनलों पर ज्यादातर हिंदी में ही बात करते हैं और वह भी हिंदी व उर्दू के बेहद स्तरीय शब्दों का प्रयोग करते हुए. ऐसे मेंगुजरातचुनाव सेठीकपहले कांग्रेस द्वारा उन पर कार्रवाई करना पार्टी की जरूरत तो थी ही, लेकिन इस मजबूरी से मर्यादा के पालन की एक लकीर भी खींच गयी. तो क्या दूसरी पार्टियां व उसके शीर्ष नेता भी मर्यादा की ऐसी लाइन खींचेंगे? यह सवाल तबतक कायम रहेगा, जबतक नेता हल्के-फुल्के बयान देंगे और विरोधियों पर ओछी टिप्पणी करेंगे.

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