मुंबई हादसा : भगदड़ में दफन महानगर की कहानी

मुंबई : मुंबई के एलफिंस्टन ब्रिज पर मची भगदड़ की वजह से कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई लेकिन इन मौतों के साथ ही न जाने कितने सपनें तबाह हो गए. ऐसे ही लोगों में से एक 24 वर्षीय हिलोनी देधिया भी थीं, जो एक्सिस बैंक के कॉरपोरेट रिलेशन विभाग में काम […]
मुंबई : मुंबई के एलफिंस्टन ब्रिज पर मची भगदड़ की वजह से कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई लेकिन इन मौतों के साथ ही न जाने कितने सपनें तबाह हो गए. ऐसे ही लोगों में से एक 24 वर्षीय हिलोनी देधिया भी थीं, जो एक्सिस बैंक के कॉरपोरेट रिलेशन विभाग में काम करती थीं. आसमान को छूती हुई मुंबई की ऊंची-ऊंची इमारतें लाखों लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करती है. लेकिन ये इमारतें कल परेल और एलफिंस्टन रोड स्टेशन को जोड़ने वाली फुट ओवर ब्रिज पर कल हुए हादसे की भी मौन गवाह हैं.
बड़ी संख्या में लोगों की अफरा-तफरी से इतर इस क्षेत्र के सूती कपडों के मिल ने मुंबई को इसकी पहचान दी थी और इसी वजह से मुंबई को पूर्व का मैनचेस्टर कहा जाता है. यहां लोग कपड़ा मिलों में चिमनियों और सायरन की आवाजों के बीच काम करते थे. समय बदलने के साथ यह क्षेत्र भी तेजी से बदलता चला गया. साल 1980 के बाद मिलों ने आकाश छूने वाली इमारतों को जगह देना शुरू कर दिया था क्योंकि समृद्धि की इच्छा के साथ लाखों लोगों के सपने बढ़ते गए थे.
मुंबई फुटओवर ब्रिज भगदड़ : मिल तो गगनचुंबी इमारतों में बदल गये, बुनियादी ढांचा रहा जस का तस
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