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आस्था का अद्भुत संगम गोड़धुआ मंदिर, 300 साल पुरानी भक्ति की कहानी

Updated at : 24 Sep 2025 9:51 PM (IST)
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आस्था का अद्भुत संगम गोड़धुआ मंदिर, 300 साल पुरानी भक्ति की कहानी

आस्था का अद्भुत संगम गोड़धुआ मंदिर, 300 साल पुरानी भक्ति की कहानी

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गोड़धुआ दुर्गा मंदिर में नवरात्र की भक्ति व ऐतिहासिक महिमा गौरव कश्यप, पंजवारा शारदीय नवरात्र के आगमन के साथ ही पूरा इलाका भक्ति में लीन है. इस दौरान सबसे अधिक चर्चा गोड़धुआ दुर्गा मंदिर की होती है. मंदिर की महिमा और इतिहास करीब 300 साल पुराना है. इसका निर्माण लक्ष्मीपुर स्टेट के महाराजा चंद्रदेव नारायण द्वारा कराया गया था. भक्तों का मानना है कि यहां आने से उनकी हर मनोकामना पूरी होती है. यही वजह है कि यह मंदिर दूर-दूर तक प्रसिद्ध है और श्रद्धालुओं की भीड़ हर साल नवरात्र के दौरान उमड़ती है. गोड़धुआ दुर्गा मंदिर की प्रतिमा व चमत्कारिक घटना स्थानीय लोगों के अनुसार, महाराजा चंद्रदेव नारायण के परिवार में पूजा के दौरान एक अप्रिय घटना घट गयी. इससे क्रोधित होकर उन्होंने मां दुर्गा की प्रतिमा को पास की चांदन नदी में विसर्जित करवा दिया और पूजा बीच में ही रोक दी. इस घटना से पूरे गांव में निराशा छा गई. किंतु उसी रात मां दुर्गा ने गांव के एक दलित परिवार के मुखिया को स्वप्न में दर्शन दिए. उन्होंने बताया कि प्रतिमा नदी की तेज धार में पड़ी है. उसे निकालकर पूजा दोबारा शुरू की जानी चाहिए, ताकि गांव में सुख-शांति लौट आए. अगले दिन सुबह वह व्यक्ति मां के बताए स्थान पर पहुंचा, वहां सचमुच वहां प्रतिमा को पाया. पूरे गांव के लोगों ने मिलकर प्रतिमा को निकाला व पूजा पुनः शुरू की. इस घटना के बाद मंदिर की महिमा व श्रद्धा में और वृद्धि हुई. भक्ति, आस्था व सामाजिक समरसता का प्रतीक गोड़धुआ दुर्गा मंदिर की परंपरा आज भी जीवित है. साल 1950 के बाद से यह नियम बना है कि जब तक उस दलित परिवार का कोई सदस्य प्रतिमा को स्पर्श नहीं करता, तब तक उसे उठाया नहीं जाता. यह परंपरा इस बात का प्रमाण है कि सच्ची भक्ति जाति या वर्ग की मोहताज नहीं होती. मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं है, बल्कि सच्ची श्रद्धा व सामाजिक समरसता का प्रतीक भी है. हर साल यहां हजारों भक्त आते हैं. मां दुर्गा की पूजा में शामिल होकर आस्था का अनुभव करते हैं. मंदिर की यह कथा हमें सिखाती है कि भक्ति और आस्था में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए. गांव व आसपास के लोग इस मंदिर को अपनी सांस्कृतिक व धार्मिक धरोहर मानते हैं. गोड़धुआ मंदिर सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि यह सामाजिक एकता और समानता का संदेश भी देता है. श्रद्धालुओं ने व्यक्त की अटूट आस्था मंदिर के पुजारी फूल बाबा ने कहा कि मंदिर में आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है. उन पर मां दुर्गा की कृपा बनी रहती है. ग्रामीण संदीप कुमार यादव ने बताया, दुर्गा पूजा के शुभ अवसर पर आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए मां के दरबार में आते हैं. ग्रामीण नीतीश कुमार ने कहा पूरे गांव में भक्ति का माहौल छाया रहता है. जहां सभी महिलाएं और पुरुष पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचते हैं. ग्रामीण छोटू कुमार ने कहा कि आसपास के दर्जनों गांवों से लोग सच्चे मन से यहां आते हैं. श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाता है और इस साल के मेले को लेकर ग्रामीणों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GOURAV KASHYAP

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