- पीजी पाठ्यक्रमों में बड़ा बदलाव

Edited by ASHOK KUMAR
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<P>- पीजी पाठ्यक्रमों में बड़ा बदलाव : यूजीसी का नया फ्रेमवर्क, छात्रों को रिसर्च व करियर की नई राह- नयी शिक्षा नीति पर आधारित होगा नया स्ट्रक्चर<H2>धनबाद. </H2>विश्वविद्यालय अनुदान आयोग

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– पीजी पाठ्यक्रमों में बड़ा बदलाव : यूजीसी का नया फ्रेमवर्क, छात्रों को रिसर्च व करियर की नई राह- नयी शिक्षा नीति पर आधारित होगा नया स्ट्रक्चर

धनबाद.

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने पीजी पाठ्यक्रमों के लिए नया फ्रेमवर्क तैयार किया है, जो नई शिक्षा नीति (एनइपी) पर आधारित है. इस फ्रेमवर्क के लागू होने से छात्रों को लचीलापन के साथ अधिक विकल्प मिलेंगे. छात्र अब अपनी पढ़ाई अपनी सुविधा व रुचि के अनुसार तय कर सकेंगे. बीबीएमकेयू में इसी फ्रेमवर्क के आधार पर पीजी रेगुलेशन में बदलाव की तैयारी है.

स्नातक के बाद अलग-अलग विकल्पअगर विद्यार्थी ने तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूरा किया है तो उसके पास दो वर्षीय पीजी करने का विकल्प होगा. इसमें दूसरे वर्ष में विद्यार्थी रिसर्च पर पूरा ध्यान दे सकेंगे. वहीं, अगर विद्यार्थी ने चार वर्षीय ऑनर्स या ऑनर्स विद रिसर्च कोर्स किया है, तो उसके लिए एक वर्षीय पीजी प्रोग्राम का विकल्प भी होगा. यानी जितनी मेहनत और तैयारी आपने स्नातक में की है, उसके हिसाब से पीजी की अवधि तय होगी.बीई-बीटेक छात्रों के लिए नियमइंजीनियरिंग (बीइ/बीटेक) छात्रों के लिए यूजीसी ने अलग नियम बनाए हैं. उन्हें पीजी की पढ़ाई दो साल में ही पूरी करनी होगी. अन्य कोर्स के छात्र एक साल में ही अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन पूरी कर सकते हैं. दो वर्षीय पीजी कोर्स में छात्रों को 260 क्रेडिट अंक जुटाने होंगे, वहीं एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा में 240 क्रेडिट अंक जुटाने होंगे.क्रेडिट फ्रेमवर्क से जुड़ेंगे कोर्सनए फ्रेमवर्क को नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीएफ) से जोड़ा जाएगा. इसका मतलब है कि छात्रों की पढ़ाई, असाइनमेंट, क्रेडिट अंक, ट्रांसफर और इस्तेमाल का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा. इससे छात्रों को पढ़ाई बीच में छोड़ने या किसी कारणवश ब्रेक लेने पर भी नुकसान नहीं होगा. वे बाद में वहीं से अपनी पढ़ाई फिर शुरू कर सकेंगे.उच्च शिक्षा संस्थानों को निर्देशयूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों से यह नया फ्रेमवर्क अपनाने का आग्रह किया है. 2025 से शुरू होने वाले कोर्स में यह व्यवस्था लागू हो जाएगी. इसका फायदा यह होगा कि छात्रों को एक वर्षीय, दो वर्षीय और इंटीग्रेटेड पांच वर्षीय पीजी पाठ्यक्रमों का विकल्प मिलेगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), मशीन लर्निंग और अन्य उभरते क्षेत्रों में भी पढ़ाई करने का मौका मिलेगा.

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