जानिए क्या है बाइपोलर डिसआर्डर

Updated at : 04 Oct 2015 2:37 AM (IST)
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जानिए क्या है बाइपोलर डिसआर्डर

यह मानसिक बीमारी है. जिसे मैनिक डिप्रेशन भी कहते हैं. इस बीमारी में व्यक्ति लगातार कई हफ़्तो तक या महिनों तक या तो बहुत उदास या फ़िर अत्यधिक खुश रहता है. उदासी में नकारात्मक या असंभव कार्य करने जैसे विचार आते हैं. यह बीमारी लगभग 100 में से एक व्यक्ति को जीवन में कभी ना […]

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यह मानसिक बीमारी है. जिसे मैनिक डिप्रेशन भी कहते हैं. इस बीमारी में व्यक्ति लगातार कई हफ़्तो तक या महिनों तक या तो बहुत उदास या फ़िर अत्यधिक खुश रहता है. उदासी में नकारात्मक या असंभव कार्य करने जैसे विचार आते हैं.

यह बीमारी लगभग 100 में से एक व्यक्ति को जीवन में कभी ना कभी होती है. इस बीमारी की शुरुआत अक्सर 14 साल से 19 साल के बीच होती है. इस बीमारी से पुरुष तथा महिलाएँ दोनों ही समान रूप से प्रभावित होते हैं.

बाईपोलर के प्रकार…

बाईपोलर एक – इस प्रकार की बीमारी में कम से कम एक बार मरीज में अत्यधिक तेजी, अत्यधिक ऊर्जा, अत्यधिक ऊत्तेजना तथा बड़ी-बड़ी बाते करने का दौर आता है. इस तरह की तेजी लगभग 3-6 महीने तक रहती है. यदि इलाज ना भी किया जाये तो भी मरीज़ अपने आप ठीक हो सकता है. इस प्रकार की बीमारी का दूसरा रूप कभी भी मन में उदासी के रूप मे आ सकता है. उदासी लगातार दो हफ़्ते से अधिक रहने पर इसे डिप्रेशन कहते हैं.

बाईपोलर दो– इस प्रकार की बीमारी में मरीज को बार-बार उदासी (डिप्रेशन) का प्रभाव आता है. कभी-कभार हल्की तेजी भी आ सकती है|

रैपिड साइलिक यानि बाईपोलर एक और दो एक साथ भी हो सकते हैं. इस प्रकार की बीमारी में मरीज को एक साल में कम से कम चार बार उदासी (डिप्रेशन) या मैनिया (तेजी) का असर आता है.

बीमारी के मुख्य कारण…

इस बीमारी का मुख्य कारण सही रूप से बता पाना कठिन है. वैज्ञानिक समझते हैं कि कई बार शारीरिक रोग भी मन में उदासी तथा तेजी कर सकते हैं. कई बार अत्यधिक मानसिक तनाव इस बीमारी की शुरुआत कर सकता है.

लक्षण…

1- डिप्रेशन जैसा होना – इसमें मरीज के मन में अत्यधिक उदासी, कार्य में अरुचि, चिड़चिड़ापन, घबराहट, आत्मग्लानि, भविष्य के बारे में निराशा, शरीर में ऊर्जा की कमी, अपने आप से नफ़रत, नींद की कमी, सेक्स इच्छा की कमी, मन में रोने की इच्छा, आत्मविश्वास की कमी लगातार बनी रहती है. मन में आत्महत्या के विचार आते रहते हैं. मरीज की कार्य करने की क्षमता अत्यधिक कम हो जाती है. कभी-कभी मरीज का बाहर निकलने का मन नहीं करता है. किसी से बातें करने का मन नहीं करता. इस प्रकार की उदासी जब दो हफ़्तो से अधिक रहे तब डिप्रेशन है. बिना देर किए परामर्श लेना चाहिए.

मैनिया या मन में अत्यधिक तेज़ी का महसूस होना- इसमें मरीज मानसिक रूप से कई बार इतने अधिक बढ़ जाते हैं कि मरीज का वास्तविकता से सम्बन्ध टूट जाता है. मरीज को बिना किसी कारण कानों में आवाजें आने लगती है. मरीज अपने आपको बहुत बड़ा समझने लगता है. मरीज मन में अत्यधिक तेजी के कारण इधर-उधर भागता रहता है, नींद तथा भूख कम हो जाती है.

दोनो के बीच की अवस्था- मरीज अक्सर उदासी (डिप्रेशन) के बाद सामान्य हो जाता है. इसी प्रकार तेजी (मैनिया) के बाद भी सामान्य हो जाता है. मरीज काफ़ी समय तक, सालों तक सामान्य रह सकता है और अचानक उसे उदासी या तेजी की बीमारी आ सकती है.

करें मरीज की सहयता

-इस बीमारी में मरीज को एक्स्ट्रा केयर की जरूरत होती है.

-मरीज के मूड पर ध्यान रखना चाहिये. यदि मन में अधिक उदासी या तेजी आये तो तुरन्त डाक्टर के पास ले जाना चाहिए ताकि बीमारी को जल्द से जल्द रोका जा सके.

-ध्यान दें कि मरीज को दोस्तों से तथा परिवारवालों बीच रखें. इस प्रकार के सम्बन्धों का मानसिक स्वास्थय पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

-मरीज को शारीरिक अभ्यास कराते रहना चाहिए.

-साथ ही कोशिश करें की रोगी किसी भी तरह से व्यस्त रहे. रोगी को जिस काम में खुशी मिले वो उसे करने दें पर ख्याल रखें की वो अकेला न रहे.

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