गुम हो गई लाइब्रेरी की रौनक, किताबें तो है लेकिन आते नहीं है छात्र

Updated at : 03 Jul 2017 1:14 PM (IST)
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गुम हो गई लाइब्रेरी की रौनक, किताबें तो है लेकिन आते नहीं है छात्र

दो साल से बंद है पटना विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी नये सत्र में भी छात्रों का इंतजार नहीं हुआ खत्म 1 जुलाई को ही होना था हैंडओवर, लेकिन सुस्त गति से हो रहा काम इन्फ्रास्ट्रक्चर के काम की धीमी रफ्तार से छात्रों को हो रही परेशानी पटना : पटना विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी में किताबें […]

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दो साल से बंद है पटना विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी
नये सत्र में भी छात्रों का इंतजार नहीं हुआ खत्म
1 जुलाई को ही होना था हैंडओवर, लेकिन सुस्त गति से हो रहा काम
इन्फ्रास्ट्रक्चर के काम की धीमी रफ्तार से छात्रों को हो रही परेशानी
पटना : पटना विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी में किताबें तो हैं, लेकिन कोई उसे पढ़ नहीं सकता. क्योंकि इसके खुलने का पिछले दो वर्ष से छात्र इंतजार कर रहे हैं. दो वर्ष से यह लाइब्रेरी बंद है. नये सत्र में छात्र इसके खुलने का इंतजार करते रहे, लेकिन यह नहीं खुली. एक जुलाई को बिहार एजुकेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के द्वारा इसे विवि को हैंडओवर करना था, लेकिन उसकी सुस्त गति का काम समाप्त ही नहीं हो रहा है. एेसे में छात्र काफी परेशान हैं और उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि वे कहां जाकर पढ़ाई करें.
पांच लाख की पुस्तकें यूं हीं पड़ीं :
पटना विश्वविद्यालय की ओर से लाइब्रेरी के लिए करीब पांच लाख की किताबें दो वर्ष पहले खरीदी गयी थी, लेकिन अफसोस कि ये किताबें यूं सेल्फ में पड़ी हुई हैं. इसे पढ़ने वाला कोई नहीं है. लाइब्रेरी बंद होने से छात्र यहां आते ही नहीं हैं. इन किताबों पर ऐसे ही धूल जम रही है और यह नयी की नयी पड़ी हुई हैं.
स्टाफ की है कमी :
लाइब्रेरी में स्टाफ की काफी कमी है. इसकी वजह से भी परेशानी है. वहीं जो कर्मचारी हैं उन्हें करीब आठ महीने से पेमेंट नहीं मिला है. वहीं परमानेंट स्टाफ की काफी कमी है. बस जैसे तैसे काम चल रहा है.
इ-लाइब्रेरी की योजना भी अधर में
पीयू के सेंट्रल लाइब्रेरी को ई-लाइब्रेरी बनाने की बात काफी दिनों से चल रही है लेकिन यह योजना भी अधर में हैं. मिली जानकारी के अनुसार पहले इसे विवि को ही करना था लेकिन अब यह केंद्र सरकार के द्वारा ही पूरा किया जायेगा. करीब एक दशक से छात्र यहां ई-लाइब्रेरी का भी इंतजार कर रहे हैं, जो अभी तक खत्म नहीं हुआ.
छात्रों के पास इंतजार के सिवा कोई रास्ता नहीं
दो साल से छात्रों को पढ़ने के लिए लाइब्रेरी से किताबें नसीब नहीं हुई हैं. परीक्षा से पहले छात्रों को लाइब्रेरी से काफी मदद मिल जाती थी, लेकिन इस बार छात्रों को खुद से खरीदी बुक्स या फिर कॉलेज या विभाग की लाइब्रेरी की बुक्स से ही काम चलाना पड़ा है. अब नया सत्र आ गया है और छात्रों को एक बार फिर से यहां की किताबों की जरूरत है, लेकिन उनके पास कोई चारा नहीं सिवाय इंतजार के. इसके पीछे की वजह यह है कि डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के द्वारा अब तक लाइब्रेरी को विवि को हैंडओवर नहीं किया गया है. इस वजह से छात्र वहां बैठ कर तो नहीं ही पढ़ पा रहे हैं बल्कि वहां से किसी भी प्रकार की कोई बुक भी इशु नहीं हो रही है.
अभी तक लाइब्रेरी हैंडओवर नहीं की गयी है. देरी की वजह से कई तरह की दिक्कतें हो रही हैं. कुछ माइनर काम बचा है. हालांकि हम इस कोशिश में हैं कि नये सत्र में लाइब्रेरी को शुरू कर दें. नये छात्रों के क्लास शुरू होते ही हम इसे शुरू कर देंगे.
प्रो एसआर पद्मदेव, पीयू सेंट्रल लाइब्रेरी के इंचार्ज
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