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Worship: स्नान से पहले फूल तोड़ने की परंपरा, धार्मिक महत्व और लाभ

Updated at : 09 Oct 2024 8:02 PM (IST)
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Worship: स्नान से पहले फूल तोड़ने की परंपरा, धार्मिक महत्व और लाभ

Worship: इस लेख में हम समझेंगे कि स्नान से पहले फूल तोड़ने की परंपरा का धार्मिक महत्व क्या है. जानिए क्यों इसे शुद्धता का प्रतीक माना जाता है, पुष्पों को धोने की मान्यता और इससे जीवन के दोषों के निवारण का महत्व.

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Worship: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और धार्मिक आस्था के कई पहलू हैं, जिनमें से एक महत्वपूर्ण परंपरा है स्नान से पहले फूल तोड़ने की. इस परंपरा के पीछे कई आध्यात्मिक और धार्मिक कारण छिपे हुए हैं. आइए, इस विषय में गहराई से समझते हैं कि स्नान से पहले फूल तोड़ना क्यों आवश्यक माना जाता है और इसके पीछे के तर्क क्या हैं.

स्नान से पहले फूल तोड़ने की परंपरा

मान्यता है कि स्नान से पहले तोड़े गए पुष्प भगवान को अधिक प्रिय होते हैं. ऐसा कहा जाता है कि स्नान के बाद तोड़े गए फूलों को भगवान नहीं स्वीकार करते. इसके पीछे यह सोच है कि जब व्यक्ति स्नान करता है, तब उसके शरीर में कुछ अशुद्धता रह सकती है. यदि व्यक्ति नहाने के बाद फूल तोड़ता है, तो वह अशुद्धता उन फूलों में समाहित हो सकती है, जो भगवान को अर्पित किए जाते हैं. इसलिए, यह आवश्यक है कि पुष्प स्नान से पहले ही तोड़े जाएं, ताकि वे पवित्र और शुद्ध हों.

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पुष्पों को धोना नहीं चाहिए

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान के लिए तोड़े गए पुष्पों को धोया नहीं जाना चाहिए. इसे प्राकृतिक रूप में ही भगवान को अर्पित किया जाना चाहिए. इसका तात्पर्य है कि फूलों को उनके प्राकृतिक सौंदर्य और सुगंध के साथ अर्पित करना चाहिए. इस परंपरा के अनुसार, भगवान को प्राकृतिक रूप से अर्पित करने से उनकी कृपा अधिक प्राप्त होती है.

दोष निवारण की मान्यता

स्नान से पहले तोड़े गए पुष्पों को देवी-देवताओं को अर्पित करने से जीवन के कई दोष मिटाने का भी विश्वास है. यह माना जाता है कि जब व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से पुष्पों को अर्पित करता है, तो इसके माध्यम से उसे मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धता प्राप्त होती है. इस प्रक्रिया से जीवन की कठिनाइयों और दोषों का निवारण होता है.

स्नान के बाद फूल तोड़ना क्यों नहीं चाहिए?

स्नान के बाद फूल तोड़ने से शरीर पर बची हुई अशुद्धता फूलों में समाहित हो सकती है, जिससे भगवान उन्हें स्वीकार नहीं करते. इसलिए, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फूल हमेशा स्नान से पहले ही तोड़ने चाहिए ताकि वे शुद्ध रहें.

स्नान से पहले फूल तोड़ने का धार्मिक महत्व क्या है?

स्नान से पहले फूल तोड़ने को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि भगवान शुद्ध भाव से अर्पित फूलों को ही स्वीकार करते हैं और इससे जीवन के दोष दूर होते हैं. पुष्पों को धोने की आवश्यकता नहीं होती, उन्हें प्राकृतिक अवस्था में ही अर्पित करना चाहिए.

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Rinki Singh

लेखक के बारे में

By Rinki Singh

Rinki Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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