वर्ल्ड ऑटिज्म डे: बिहार में हर 65 में से एक बच्चा प्रभावित

विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस पर सांकेतिक फोटो, PHOTO AI
World Autism Awareness Day: विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस हर साल 2 अप्रैल को मनाया जाता है. 100 में से एक बच्चे इससे प्रभावित हैं. बिहार की बात करें, तो हर 65 में से एक बच्चा प्रभावित है.
World Autism Awareness Day: क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और पटना यूनिवर्सिटी में विजिटिंग फैकल्टी ईशा सिंह ने ऑटिज्म को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि ऑटिज्म डिसऑर्डर स्पेक्ट्रम बच्चों में होने वाला एक न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जिसमें उनके व्यवहार, संवाद क्षमता और सामाजिक विकास पर असर पड़ता है. बिहार में लगभग हर 65 बच्चों में से एक बच्चा इस डिसऑर्डर से प्रभावित पाया जा रहा है.
लड़कों में ऑटिज्म की समस्या लड़कियों की तुलना में अधिक
ईशा सिंह के अनुसार लड़कों में ऑटिज्म की समस्या लड़कियों की तुलना में अधिक डायग्नोज होती है. इसका अनुपात करीब 3:1 है. हालांकि, इसके पीछे एक सामाजिक कारण भी है. अधिकतर अभिभावक बेटों को जांच के लिए डॉक्टर के पास लाते हैं, जबकि बेटियों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है.
ऑटिज्म के लक्षण
ईशा सिंह ने कहा कि ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों में शुरुआती उम्र से ही विकास संबंधी देरी, बोलने में कठिनाई, और सामाजिक संपर्क में कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. समय रहते पहचान और सही उपचार बेहद जरूरी है, ताकि बच्चे को बेहतर जीवन जीने का अवसर मिल सके.
स्क्रीन टाइम बच्चों में समस्या को और बढ़ा सकता है
ईशा सिंह ने यह भी बताया कि बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों में व्यवहारिक समस्याओं को बढ़ा सकता है. ऐसे मामलों में थेरेपी और जरूरत पड़ने पर दवाओं की मदद ली जाती है. उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के व्यवहार में बदलाव को नजरअंदाज न करें और समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लें.
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लेखक के बारे में
By अरबिंद कुमार मिश्रा
अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.
झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.
करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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