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Rajiv Gandhi Death Anniversary: आज है राजीव गांधी की पुण्यतिथि, जानें उनके जीवन से जुड़ी अनसुनी बातें

आज ही के दिन 21 मई 1991 को एक आत्मघाती हमले में इनकी मृत्यु हो गई. इनको भारत सरकार द्वारा सन 1991 में मरणोपरान्त भारत रत्न से सम्मानित किया गया.1980 के दशक में जब उन्होंने राजनीति में कदम रखा था तो उनकी छवि मिस्टर क्लीन की थी.

By Prabhat khabar Digital
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Rajiv Gandhi Death Anniversary
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Rajiv Gandhi Death Anniversary: सबसे कम उम्र में भारत के प्रधानमंत्री पद का गौरव पाने वाले राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त सन 1944 को मुंबई में हुआ था. इनके पिता का नाम फिरोज गाँधी और माता का नाम इंदिरा गाँधी था. राजीव गाँधी पेशे से पायलट थे और राजनीति में इनकी कोई रूचि नहीं थी. सन 1980 में भाई संजय गाँधी की मृत्यु के बाद राजीव गाँधी सन 1982 में राजनीति में उतर आये.

सन 1985 में भारी मतो से विजयी होकर राजीव गाँधी देश के सातवें प्रधानमंत्री बने. राजीव गाँधी एक सशक्त और कुशल राजनेता थे. आज ही के दिन 21 मई 1991 को एक आत्मघाती हमले में इनकी मृत्यु हो गई. इनको भारत सरकार द्वारा सन 1991 में मरणोपरान्त भारत रत्न से सम्मानित किया गया.

अपने राजनीतिक कार्यकाल में देश को तकनीक और वैश्विक बुलंदियों तक पहुंचाने वाले राजीव गांधी के जीवन के कई दिलचस्प तथ्य हैं जिनसे आप अनजान होंगे. आज उनकी पुण्यतिथि पर हम आपको ऐसी ही अनसुनी बातों के बारे में बताते हैं.

एयर इंडिया के साथ की करियर की शुरुआत

प्रधानमंत्री के तौर पर देश की सेवा करने वाले राजीव गांधी, नेहरू-गांधी परिवार के आखिरी सदस्य थे जो राजनीति में इतने शीर्ष तक पहुंचे. राजनीति में आने से पहले वे पेशे से पायलट थे. राजीव को अपने नाना और मां की तरह राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी. उन्होंने पायलट बनने से पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने की भी बहुत कोशिश की थी, लेकिन किताबी ज्ञान में सीमित हो जाना उन्हें रास नहीं आया.

लंदन में पढ़ाई करने के बाद वे कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज गए. वहां तीन साल पढ़ने के बाद भी उन्हें डिग्री नहीं मिली, फिर उन्होंने लंदन के ही इंपीरियल कॉलेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया, लेकिन उसमें भी उनका मन नहीं लगा. इसके बाद उन्होंने दिल्ली के फ्लाइंग कल्ब में पायलट की ट्रेनिंग शुरू की और 1970 में एयर इंडिया के साथ अपने करियर की शुरुआत की.

कम उम्र में राजनीति की ऊंचाई पर पहुंचे

1980 के दशक में जब उन्होंने राजनीति में कदम रखा था तो उनकी छवि मिस्टर क्लीन की थी. शुरुआत से ही विदेश में रह कर पढ़ाई करने और 40 वर्ष से भी कम उम्र में राष्ट्रीय राजनीति में इतनी ऊंचाई तक पहुंचने के कारण राजीव लोकप्रिय भी थे और बेदाग भी. हालांकि भविष्य में कई बड़े-बड़े घोटालों में नाम आने के बाद उनकी यह छवि धूमिल हो गई.

चुनावी रैलियों में खुद अपनी गाड़ी चलाकर पहुंच जाते थे

राजीव गांधी संभवत: देश के इकलौते ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो कई बार खुद ही अपनी गाड़ी चला कर जगह-जगह जाते थे. कई बार तो राजीव गांधी चुनावी रैलियों में भी खुद ही अपनी कार चला कर पहुंच जाते थे. सुरक्षा गार्डों को तेजी से उनके पीछे चलते रहना पड़ता था.

यहां देखें राजीव गांधी के अनमोल वचन

कुछ दिनों के लिए, लोगों को लगा की भारत हिल गया है. लेकिन उनको यह पता होना चाहिए कि जब एक महान पेड़ गिरता है तो हमेशा झटके लगते है.

भारत एक प्राचीन देश, लेकिन एक युवा राष्ट्र है… मैं जवान हूँ और मेरा भी एक सपना है. मेरा सपना है भारत को मजबूत, स्वतंत्र, आत्मनिर्भर और दुनिया के सभी देशों में से प्रथम रैंक में लाना और मानव जाति की सेवा करना.

कारखानों, बांधों और सड़कों को विकास नहीं कहते. विकास तो लोगों के बारे में है. इसका लक्ष्य लोगों के लिए सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पूर्ति करना है. विकास में मानवीय मूल्यों को प्रथम वरीयता दी जाती है.

महिलायें एक देश की सामाजिक चेतना होती हैं. वे हमारे समाज को एक साथ जोड़ कर रखती है.

हर व्यक्ति को इतिहास से सबक लेना चाहिए. हमें यह समझना चाहिए कि जहाँ कहीं भी आंतरिक झगड़े और देश में आपसी संघर्ष हुआ है, वह देश कमजोर हो गया है. इस कारण, बाहर से खतरा बढ़ता है. देश को ऐसी कमजोरी के कारण देश बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है.

शिक्षा को हमारे समाज में बराबरी का स्थान दिया जाता है. यह एक ऐसा उपकरण है जो हमारे पिछले हजारो वर्षो के सामाजिक व्यवस्था को एक बराबर के स्तर पर ला सकता है.

यदि किसान कमजोर हो जाते हैं तो देश आत्मनिर्भरता खो देता है, लेकिन अगर वे मजबूत हैं तो देश की स्वतंत्रता भी मजबूत हो जाती है. अगर हम कृषि की प्रगति को बरकरार नहीं रख पाए तो देश से हम गरीबी नहीं मिटा पाएंगे. लेकिन हमारा सबसे बड़ा कार्यक्रम गरीबी उन्मूलन हमारे किसानों के जीवन स्तर में सुधार लायेगा. गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम का मकसद किसानों का उत्थान करना है.

हमारा आज का काम भारत को इक्कीसवीं सदी में गरीबी के बोझ से मुक्ति, हमारे औपनिवेशिक अतीत की विरासत और हमारे लोगों की बढ़ती आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होगा.

जब भी कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो जमीन हिलती है.

वह केवल मेरे लिए ही माँ नहीं थी बल्कि पूरे देश के लिए माँ थी. अपने खून की आखिरी बूंद तक उन्होंने भारतीय लोगों की सेवा की.

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