Parenting Tips: बच्चों को हर बात के लिए डांटना सही नहीं, जरूर रखें इन चीजों का ध्यान

Edited by Saurabh Poddar
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Parenting Tips: अगर आप भी अपने बच्चों को उनकी हर छोटी-छोटी गलती पर डांटते हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए काफी काम की साबित होने वाली है. आज हम आपको कुछ ऐसे सिचुएशन के बारे में बताने वाले हैं जब आपको अपने बच्चों को डांटना नहीं चाहिए,

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Parenting Tips: बच्चे गलती करते ही हैं. ऐसे में कई बार उनके पेरेंट्स उन्हें बिना सोच समझे डांट देते हैं. अगर आप भी अपने बच्चों को उनकी हर छोटी गलती पर डांट देते हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए ही है. कई बार बच्चों को उनकी गलती के लिए डांटना सही भी होता है लेकिन, कई बार ऐसा करने से उनपर गलत असर भी पड़ता है. आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे सिचुएशन के बारे में बताएंगे जब आपको अपने बच्चों को डांटना नहीं चाहिए. तो चलिए जानते हैं डीटेल से.

अपने बच्चों को दूसरों के सामने अनुशाशन सिखाते समय

अपने बच्चे को पब्लिक प्लेस में डांटने से बचें. ऐसा करने पर, आप उन्हें जो सिखाने की कोशिश कर रहे हैं उस पर वे कम ध्यान देते हैं और इस बात पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं कि आखिर आपकी बातचीत में कौन सुन रहा है. अपने बच्चे को दूसरों के सामने डांटने से उन्हें अजीब और शर्मिंदा महसूस हो सकता है, जो आपके रिश्ते में तनाव पैदा कर सकता है. अगर आप बच्चों को पब्लिक प्लेस में अनुशाशन सिखाते हैं तो पहले सुनिश्चित करें कि आप अपने शब्दों में रिस्पेक्टफुल और जेंटल हों. अगर आप अनुशासन लागू करते समय दृढ, कठोर और विनम्र रहेंगे तो आपका बच्चा सीख जाएगा कि उनका व्यवहार सही नहीं है. उन्हें यह भी पता चलेगा कि पब्लिक प्लेस में उनसे सही बर्ताव की उम्मीद की जाती है.

जब वे अपने भाई-बहन के साथ लड़ाई कर रहे हों

अगर आपके बच्चे अपने भाई-बहन के साथ लड़ाई कर रहे हों ऐसे में उन्हें सही शब्दों का चुनाव कर समझाने की कोशिश करें की उनका यह बर्ताव या फिर व्यवहार सही नहीं है. उन्हें छोटे और आसान शब्दों में इस बात को समझाने की कोशिश करें. उनपर दबाव न डालें और न ही उन्हें समझाने के लिए कठोर शब्दों का इस्तेमाल करें. ऐसा इसलिए है क्योंकि, जब भी कोई इमरजेंसी सिचुएशन आएगी तो वे इसी व्यवहार की नकल करेंगे. कई रिसर्च के अनुसार, जो बच्चे अपने बचपन में नियमित रूप अपने माता-पिता से मार या डांट खाते हैं, वे बड़े होने पर मुकाबला करने के लिए आक्रामक व्यवहार का सहारा लेने की अधिक संभावना रखते हैं. जब वे पहली बार माता-पिता बनते हैं, तो वे अपने बच्चे को मार सकते हैं या डांट सकते हैं क्योंकि यह अनुशासन का वह रूप है जो उन्हें तब दिया गया था जब वे छोटे थे.

1 से 3 साल के बच्चों को न लगाएं डांट

इस नयी दुनिया के साथ एडजस्ट होने के लिए 1 से लेकर 3 साल तक के बच्चों को बहुत सारे प्यार, केयर और लगाव की जरूरत होती है. उन्हें समझाने के लिए बहुत सरे पेशेंस की भी जरूरत पड़ती है. इस उम्र के दौरान वे बच्चे काफी ज्यादा उत्तेजित हो सकते हैं जिस वजह से इसका असर उनके नींद पर भी पड़ सकता है. ऐसा होने की वजह से उनपर भले ही लंबे समय के लिए असर न पड़े लेकिन, फिर भी उनपर बार-बार चिल्लाना सही नहीं है. इस उम्र के बच्चों पर चीजें काफी जल्दी असर डालती हैं और उनके प्रति आपका व्यवहार ऐसी छाप छोड़ता है जिसे भविष्य में बदलना मुश्किल हो सकता है. अपने बच्चों को आपसे अधिक जुड़ाव और माता-पिता होने के साथ मिलने वाली सेफ्टी और कम्फर्ट महसूस कराने के लिए, बच्चे को शांत करें, उन्हें गले लगाएं, उनके साथ खेलें और उनके साथ बातचीत करने की कोशिश करें.

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Saurabh Poddar

लेखक के बारे में

By Saurabh Poddar

सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन विषयों पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की भाषा में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और एसईओ फ्रेंडली होते हैं.

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