Natural Henna : मेहंदी से लीवर की बीमारी का इलाज, स्टडी में किया गया दावा

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Henna Dye Treat Liver Disease

मेंहदी रंग से लिवर की बीमारी का इलाज (Photo: AI)

Natural Henna : मेहंदी में पाए जाने वाले यौगिक लिवर की सूजन कम कर और कोशिका क्षति रोककर लीवर रोग के इलाज में मदद कर सकते हैं. शोधकर्ताओं ने पाया कि मेहंदी के प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट लीवर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाते हैं.

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Natural Henna : अब प्राकृतिक मेहंदी (जो त्वचा और कपड़ों का रंग बदलती है) खतरनाक लीवर बीमारियों के इलाज में भी मदद कर सकती है. ओसाका मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के अनुसार, मेहंदी (लॉसोनिया इनर्मिस) से निकाले गए रंजक लीवर फाइब्रोसिस का इलाज कर सकते हैं. यह बीमारी लीवर में अतिरिक्त ऊतक जमा होने से होती है, जो लंबे समय तक शराब पीने या अस्वस्थ जीवनशैली की वजह से होने वाली लीवर क्षति का परिणाम है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन लोगों को लीवर फाइब्रोसिस होता है, उनमें सिरोसिस, लीवर फेल्योर और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. आबादी के लगभग 3 से 4 प्रतिशत लोगों में यह बीमारी गंभीर रूप लेती है, लेकिन इसके इलाज के विकल्प अब तक बहुत सीमित हैं.

स्टडी कैसे किया गया?

विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक खास रासायनिक जांच प्रणाली विकसित की है, जो उन तत्वों की पहचान करती है जो लीवर की सक्रिय हेपेटिक स्टेलेट कोशिकाओं (HSCs) पर सीधे असर डालते हैं और लीवर का संतुलन बनाए रखते हैं. इस प्रणाली के जरिए उन्होंने लॉसन नामक तत्व को HSCs की सक्रियता को रोकने वाला संभावित यौगिक पाया.

जब लॉसन को चूहों को दिया गया, तो उनके शरीर में लीवर फाइब्रोसिस के संकेतक जैसे YAP, αSMA और COL1A कम हो गए. बायोमेडिसिन एंड फार्माकोथेरपी जर्नल में प्रकाशित इस शोध में वैज्ञानिकों ने बताया कि लॉसन देने के बाद साइटोग्लोबिन नामक प्रोटीन बढ़ा, जो एंटीऑक्सीडेंट काम से जुड़ा होता है. इसका मतलब यह है कि लीवर की क्षतिग्रस्त कोशिकाएं धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटने लगीं, जिससे बीमारी के असर में कमी आई.

स्टडी को लेकर वैज्ञानिकों ने क्या कहा

वैज्ञानिकों का मानना है कि लॉसन पर आधारित दवाएं बनाकर वे पहली ऐसी दवा तैयार कर सकते हैं जो लीवर फाइब्रोसिस को नियंत्रित ही नहीं, बल्कि सुधार भी सकती है. ओसाका मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी की डॉ. अत्सुको दाइकोकू ने बताया कि उनकी टीम ऐसी दवा प्रणाली विकसित कर रही है जो सक्रिय HSCs तक दवा पहुंचा सके. उनका लक्ष्य है कि यह इलाज लीवर फाइब्रोसिस के मरीजों तक जल्द पहुंचे. उन्होंने कहा कि अगर हम HSCs जैसी फाइब्रोब्लास्ट कोशिकाओं की सक्रियता को नियंत्रित कर पाएं, तो फाइब्रोसिस के प्रभावों को सीमित या उलट भी सकते हैं.

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अमिताभ कुमार

लेखक के बारे में

By अमिताभ कुमार

अमिताभ कुमार प्रभात खबर डिजिटल में Sr. Content writer हैं. पिछले 15 साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं.

अमिताभ 1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है.

प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है. 📩 संपर्क : amitabh.kumar@prabhatkhabar.in

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