Gopashtami 2021: धार्मिक लिहाज से ही नहीं वैज्ञानिक तौर पर भी विशेष हैं गाय, गोपाष्टमी पर जानें कुछ रोचक बातें

Updated at : 10 Nov 2021 1:15 PM (IST)
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Gopashtami 2021: धार्मिक लिहाज से ही नहीं वैज्ञानिक तौर पर भी विशेष हैं गाय, गोपाष्टमी पर जानें कुछ रोचक बातें

Gopashtami 2021: कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को गायों की पूजा की जाती है. इस दिन गोपाष्टमी का त्योहार मनाया जाता है. इस साल 12 नवम्बर 2021 को गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाएगा.

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Gopashtami 2021: कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को गायों की पूजा की जाती है. इस दिन गोपाष्टमी का त्योहार मनाया जाता है. इस साल 12 नवम्बर 2021 को गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाएगा. इस दिन विशेष तौर पर गौमाता के प्रति लोग अपनी कृतज्ञता और आभार को प्रकट करते हैं.

यूं तो हिंदू धर्म में गायों को विशेष महत्व दिया जाता है. लेकिन बहुत कम लोग ही गायों से जुड़े वो रहस्य जानते हैं जो हमारे ऋषि मुनि हमें बता कर गए है. आज के वैज्ञानिक भी गाय को एक अद्भुत प्राणी बता रहे हैं. तो जानते हैं कि आखिर गायों को देवी और देवता तुल्य क्यों माना जाता है.

गाय के रीढ़ में सर्वरोगनाशक गुण

गाय के रीढ़ में सूर्यकेतू नाड़ी होती है. जिसमें सर्वरोगनाशक और सर्वविषनाशक गुण होते हैं. सूर्यकेतू नाड़ी जब सूर्य की रोशनी के संपर्क में आती है तो स्वर्ण का उत्पादन करती है. ये स्वर्ण गाय के दूध, मूत्र और गोबर में मिल जाता है. इस तरह गाय के मिलने वाले इन चीजों का विशेष महत्त्व होता है. इसका इस्तेमाल रोजमर्रा के जीवन में हमारे पूर्वज करते आए हैं.

ऑक्सीजन लेने और छोड़ने वाला एकमात्र प्राणी गाय

ये वैज्ञानिक तौर पर सिद्ध हो चुका है कि गाय एकमात्र ऐसा पशु है जो ऑक्सीजन लेता है और छोड़ता भी है. वहीं, मनुष्य सहित दूसरे प्राणी ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ते हैं. इस तरह गाय के आसपास रहने से ही ऑक्सीजन की भरपुर मात्रा पाई जा सकती है. गाय को घर में पालने का रिवाज भी सालों से रहा है. पहले लोग गाय को चराने जाते थे.

मान्यताओं में गायों का विशेष महत्व

हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है. वहीं, ऐसी भी मान्याता है कि गायों में 33 कोटि यानी 33 प्रकार के देवी-देवताओं का वास होता है. जिसमें 12 आदित्य, 8 वसु, 11 रुद्र, और 2 अश्विन कुमार हैं.

मुक्ति का मार्ग गाय

शास्त्र विद्वानों की मानें तो आत्मा के विकास यात्रा में पशु-पक्षी की योनि से मुक्ति पाने का द्वार गाय से होकर ही जाता है. कहते हैं कि गाय योनि के बाद मनुष्य योनि में आना होता है.

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