प्री-डायबिटिक यानी खतरे की घंटी, संभल जाएं वरना उम्र भर पड़ेगा झेलना

Updated:
विज्ञापन
Diabetes

शुगर एक महामारी

Diabetes : शुगर को नियंत्रित करने के लिए वाॅकिंग बहुत अच्छा उपाय है. इसमें ब्रिस्क वाॅक बहुत जरूरी होता है. ब्रेस वाॅक में एक मिनट में 100 स्टेप चलना जरूरी होता है. 100 कदम चलने से हार्ट बीट पर भी असर पड़ता है, इसलिए ब्रेस वाॅक बहुत जरूरी है.

विज्ञापन

Diabetes : आधुनिक जीवनशैली में शुगर एक महामारी का रूप ले चुका है. इसकी सबसे बड़ी वजह है सुविधाभोगी लाइफस्टाइल. आज के समय में आम आदमी मेहनत कम करता है, लेकिन उसका खानपान उसके वजन को बढ़ा रहा है. काम का बोझ बढ़ा है और तनाव भी, जो डायबिटीज को बढ़ाने का प्रमुख कारण बना है. शुगर की बीमारी और इसके बचाव के बारे में जानकारी देते हुए सदर अस्पताल के मेडिसीन एक्सपर्ट डाॅ हिमालय झा ने कहा कि कई दवाइयों और रिफाइंड फूड की वजह से भी डायबिटीज होता है. डायबिटीज वह स्थिति है जिसमें शरीर ब्लड शुगर को ठीक से नियंत्रित नहीं कर पाता है.

प्री-डायबिटिक और डायबिटिक में फर्क

डाॅ हिमालय झा ने बताया कि प्री-डायबिटिक उसे कहते हैं, जिसमें ब्लड शुगर सामान्य से ज्यादा होती है लेकिन डायबिटीज की श्रेणी तक नहीं पहुंचती है. यह चेतावनी है कि अपने जीवनशैली और खानपान में सुधार करें तो आगे डायबिटीज हो सकता है. इस स्थिति में फास्टिंग में शुगर 100–125 mg/dl होता है. वहीं डायबिटिक पेंशेट में ब्लड शुगर लगातार ऊंची रहती है. इसमें दवाइयों की जरूरत पड़ सकती है. इसमें फास्टिंग शुगर लेवल 126 mg/dl या उससे ज्यादा होता है.

शुगर नियंत्रित करने के लिए रामबाण है वाॅकिंग

शुगर को नियंत्रित करने के लिए वाॅकिंग बहुत अच्छा उपाय है. इसमें ब्रिस्क वाॅक बहुत जरूरी होता है. ब्रेस वाॅक में एक मिनट में 100 स्टेप चलना जरूरी होता है. 100 कदम चलने से हार्ट बीट पर भी असर पड़ता है, इसलिए ब्रेस वाॅक बहुत जरूरी है.

फास्टिंग फर्स्ट की जांच मधुमेह में महत्वपूर्ण

अकसर होता यह है कि कई मरीजों में फास्टिंग में शुगर जांच बढ़ा हुआ रहता है, जबकि खाने के बाद उनका शुगर सामान्य हो जाता है. इसमें देखा यह जाता है कि फास्टिंग में लीवर से ग्लूकोज डिस्चार्ज होता है. इसे रोकने के लिए अपनी दिनचर्या और खानपान को सुधारना जरूरी है.

मधुमेह से बचाव और नियंत्रण के उपाय

  • वजन नियंत्रित रखें – मोटापा बड़ा रिस्क फैक्टर है
  • नियमित व्यायाम – रोजाना 30 मिनट तेज चलना
  • तनाव कम करें – मेडिटेशन, पर्याप्त नींद लें
  • नियमित चेकअप – साल में कम से कम एक बार शुगर टेस्ट करवाएं, साथ ही अन्य जांच भी कराएं

क्या खाएं क्या नहीं

  • साबुत अनाज (ब्राउन राइस, दलिया, जौ, ओट्स)
  • हरी सब्ज़ियां, सलाद, दालें, चना
  • मौसमी फल (सेब, अमरूद, पपीता, संतरा)
  • मेवे (बादाम, अखरोट – सीमित मात्रा में)
  • लो-फैट दूध और दही

इन चीजों से बचें

  • चीनी और मिठाई, मीठे पेय (कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस)
  • मैदा, सफेद ब्रेड, तली हुई चीज़ें
  • ज्यादा चावल और आलू
  • रेड मीट और बहुत ज्यादा तेल/घी
विज्ञापन
रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola