बंगाल में आशा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया, शुभेंदु अधिकारी बोले- अमानवीय ममता सरकार की ‘बर्बर’ कार्रवाई


ASHA Workers Protest: पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाली आशाकर्मियों ने विधानसभा चुनाव 2026 के पहले अपना आंदोलन तेज कर दिया है. कोलकाता जा रही आशा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. पुलिस की इस कार्रवाई को लीडर ऑफ ऑपोजीशन शुभेंदु अधिकारी ने ‘अमानवीय ममता बनर्जी सरकार’ की ‘बर्बर’ कार्रवाई करार दिया है.
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ASHA Workers Protest: पश्चिम बंगाल में अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन कर रही आशा कार्यकर्ताओं को कोलकाता जाने से पुलिस ने रोक दिया. राज्य के अलग-अलग जिलों से आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य भवन का घेराव करने के लिए कोलकाता पहुंचीं थीं. कई जिलों में आंदोलन के लिए जा रही आशा कार्यकर्ताओं को हरासत में ले लिया. जो कोलकाता पहुंच गयीं, उनको सियालदह और हावड़ा स्टेशनों पर हिरासत में ले लिया गया. ये लोग मिनिमम पेमेंट और इंश्योरेंस कवर बढ़ाने की मांग कर रहीं हैं.
1000 आशा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका, तीखी बहस
स्वास्थ्य भवन जाने से रोकने पर लगभग 1,000 आशा कार्यकर्ताओं ने एस्प्लेनेड और सॉल्ट लेक के करुणामयी में फिर से एकजुट होकर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें फिर से रोक दिया. पुलिस ने मौलाली, सियालदह के प्राची सिनेमा और बहूबाजार समेत कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों को रोका, जिससे पुलिस और प्रदर्शन कर रही कार्यकर्ताओं में तीखी बहस हुई.
शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी सरकार पर लगाये आरोप
इस बीच, पश्चिम बंगाल विधानसभा में लीडर ऑफ ऑपोजीशन शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस की इस कार्रवाई को ‘बर्बर’ करार दिया. शुभेंदु ने दावा किया कि यह ‘अमानवीय ममता बनर्जी सरकार’ के निर्देश पर की गयी कार्रवाई है.
বর্বর সরকার, অমানবিক প্রশাসন, গণতন্ত্র বিপন্ন !!!
— Suvendu Adhikari (@SuvenduWB) January 21, 2026
উত্তরববঙ্গ ও দক্ষিণবঙ্গের নানা প্রান্ত থেকেই কলকাতা আসার চেষ্টায় থাকা আশা কর্মীদের বড় অংশকে দিকে দিকে বাধা পুলিশের।
রাজ্যের বিভিন্ন জায়গা থেকে অভিযানে যোগ দিতে চাওয়া আশা কর্মীদের রেল স্টেশন ও বাসস্ট্যান্ডে জোর পূর্বক আটকানোর… pic.twitter.com/7Zdzqlf7VN
5500 रुपए में हमारा गुजारा कैसे होगा – चंदना बारीक
प्रदर्शन के बीच दक्षिण दिनाजपुर की आशा कार्यकर्ता चंदना बारीक ने कहा कि उन्हें प्रतिदिन 15-16 घंटे काम करने के बदले में हर महीने लगभग 5,500 रुपए मिलते हैं. इतने में हमारे परिवार का गुजारा कैसे होगा. स्वास्थ्य भवन के बाहर प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी बीमार भी पड़ गयी. वहां मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों और पुलिसकर्मियों ने उसकी मदद की.
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23 दिसंबर से आशा कार्यकर्ताओं ने बंद कर रखा है काम
पुलिस ने बताया है कि आशा कार्यकर्ताओं ने 23 दिसंबर से ‘काम बंद’ कर रखा है. ये लोग आंदोलन के लिए कोलकाता की ओर बढ़ रहे थे. उन्हें हिरासत में ले लिया गया है, ताकि कोलकाता में कोई हंगामा न हो. वहीं प्रोटेस्टर्स ने दावा किया कि पुलिस ने सियालदह और हावड़ा रेलवे स्टेशन के बाहर बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया.
आंदोलनकारी ने कहा- स्टेशन से बाहर नहीं निकले दे रही पुलिस
कुछ आशा कार्यकर्ता रेलवे स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर बैठी दिखीं. पश्चिम दिनाजपुर की आशा कार्यकर्ता ने दावा किया कि उन्हें सुबह 6:30 बजे से हावड़ा स्टेशन पर रोक रखा गया है. उन्हें स्टेशन से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा.
आशाकर्मियों की डिमांड – 15000 रुपए सैलरी और 5 लाख का बीमा कवर
पुलिस ने कहा है कि सुबह ‘स्वास्थ्य भवन’ के पास से कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया. ये लोग विरोध प्रदर्शन तेज करने के लिए यहां जमा हुईं थीं. आशा कार्यकर्ताओं की मांगों में कम से कम 15,000 रुपए मंथली सैलरी और ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर 5 लाख रुपए का बीमा कवर भी शामिल है.
8 और 12 जनवरी को स्वास्थ्य भवन पर प्रदर्शन कर चुकी हैं आशा कार्यकर्ता
इससे पहले, 8 जनवरी को आशा कार्यकर्ताओं ने ‘स्वास्थ्य भवन’ तक मार्च किया था. इसके बाद 12 जनवरी को एक बार फिर विरोध प्रदर्शन किया. वे स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलकर अपनी मांगों के बारे में उन्हें बताना चाहतीं थीं. उनकी मांग है कि प्रोडक्शन लिंक्ड अलाउंस की जगह फिक्स्ड मंथली सैलरी दी जाये.
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने प्रदर्शनकारियों को दी थी सलाह
एक अधिकारी ने बताया कि कोलकाता के पास सॉल्ट लेक स्थित ‘स्वास्थ्य भवन’ और उसके आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गयी है. ट्रैफिक को नियंत्रित किया जा रहा है. पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य राज्यमंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने मंगलवार को कानून व्यवस्था संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को ‘स्वास्थ्य भवन’ तक मार्च नहीं करने की सलाह दी थी.
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By Mithilesh Jha
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