भगवान राम व सत्यनारायण स्वामी को लेकर जीतन राम मांझी का फिर विवादित बयान, अब नेहरू का भी किया जिक्र
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Apr 2022 8:17 PM
हम पार्टी के सुप्रीमो व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने फिर एकबार भगवान राम और सत्यनारायण स्वामी को लेकर विवादित बयान दिया है. इस बार मांझी ने जवाहर लाल नेहरू और तिलक का जिक्र किया है.
अपने विवादित बयानों से अक्सर सुर्खियों में रहने वाले पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने जमुई जिला अंतर्गत सिकंदरा प्रखंड के लछुआड़ में एक बार फिर से भगवान राम एवं सत्यनारायण स्वामी को लेकर विवादित बयान दिया है. इस दौरान जीतन राम मांझी ने खुद को माता शबरी का वंशज बताते हुए भगवान राम को काल्पनिक बता दिया. भगवान राम को काल्पनिक बताते हुए उन्होंने कहा कि राम कोई भगवान नहीं थे बल्कि महर्षि वाल्मीकि और तुलसीदास के काव्य ग्रंथ के महज एक पात्र थे.
वहीं उन्होंने लोगों को सत्यनारायण स्वामी की पूजा नहीं कराने की नसीहत देते हुए कहा कि सत्यनारायण स्वामी की पूजा कराने से कोई स्वर्ग नहीं चला जाता. पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा द्वारा आयोजित अंबेदकर जयंती सह शबरी महोत्सव में शामिल होने शुक्रवार को प्रखंड क्षेत्र के लछुआड़ पहुंचे थे. अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एक बार फिर से ब्राह्मणों के लिए अपशब्द का प्रयोग करते हुए कहा कि पहले बड़े लोग सत्यनारायण स्वामी की पूजा कराते थे. लेकिन अब अनुसूचित जाति के लोग भी सत्यनारायण स्वामी की पूजा कराने लगे हैं.
जीतन राम मांझी ने कहा कि जो मांस खाता है, शराब पीता है, झूठ बोलता है, व्यभिचारी है, कम पढ़ा लिखा है ऐसे लोगों से पूजा कराने से क्या फायदा है. इस अवसर पर उन्होंने भगवान राम के ऊपर भी विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि हम खुले तौर पर कहना चाहते हैं कि हम राम को नहीं मानते. राम महर्षि बाल्मीकि और तुलसीदास द्वारा रचित काव्य ग्रंथ के एक पात्र थे. लेकिन जो राम को मानते हैं मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि राम ने तो शबरी के जूठे बेर खाए थे लेकिन तुम हमारा छुआ तक नहीं खाते हो.
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मांझी ने कहा कि कल के अखबार में खबर छपेगा की जीतन राम मांझी पागल हो गया है लेकिन हम आज ये बात खुलेआम कह रहे हैं. जीतन राम मांझी ने पिछड़े, दलित और आदिवासी को भारत का मूलनिवासी बताते हुए कहा कि तमाम इतिहासकारों ने बताया है कि बाहर से आकर यहां लोग बसे थे. जवारलाल नेहरू और लोकमान्य तिलक ने भी अपनी पुस्तक में इस बात का जिक्र किया है. लेकिन यही बात हम बोलते हैं तो लोग हमें गाली देते हैं.
POSTED BY: Thakur Shaktilochan
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