विश्व मधुमेह दिवस आज, डाइबिटीज से जुड़ी कुछ खास बातें जिसे जानना आपके लिए है जरूरी

Published by : Pritish Sahay Updated At : 14 Nov 2023 11:51 AM

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मधुमेह और हृदय अनुसंधान केंद्र धनबाद और धनबाद एक्शन ग्रुप ने झारखंड में मधुमेह पर ताजा अपडेट को लेकर मीडिया से बात की. इस दौरान डॉ एनके सिंह, राष्ट्रीय कार्यकारी आरएसएसडीआई (डायबिटीज के अध्ययन के लिए अनुसंधान सोसायटी) कई बातों का जिक्र किया.

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मधुमेह और हृदय अनुसंधान केंद्र धनबाद और धनबाद एक्शन ग्रुप ने झारखंड में मधुमेह पर ताजा अपडेट को लेकर मीडिया से बात की. इस दौरान डॉ एनके सिंह, राष्ट्रीय कार्यकारी आरएसएसडीआई (डायबिटीज के अध्ययन के लिए अनुसंधान सोसायटी) कई बातों का जिक्र किया. डॉ. सिंह ने बताया कि इंसुलिन आइसोडेक एक नया आविष्कार है और यह अगले साल यानी 2024 के अंत तक उपलब्ध हो सकता हैं. इसे हफ्ते में मात्र एक बार दिया जा सकता है.

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डॉ एनके सिंह ने कहा कि परीक्षण में पाया गया है कि हरदिन एक बार देने वाले basal इंसुलिन की तुलना में उतना ही इफेक्टिव है और सुरक्षित है. निश्चित रूप से जो मरीज अभी इंसुलिन रोज लेने में आनाकानी करते हैं उनके लिए हफ्ते में इन्सुलिन का  एक प्रिक लेना आसान और उपयोगी होगा. इसके इस्तेमाल से यह फायदा होगा कि अगर साल में किसी मरीज को 365 बार सुई  देनी पड़ती है, उसे मात्र 52  बार ही देना होगा.

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आज डायबिटीज के इलाज में सबसे महत्वपूर्ण दवा एसजीएलटी (SGLT2 inhibitor) है जिसमें Emapagliflozin ,Dapagliflozin and Canagliflozin शामिल है. इसका कारण यह है कि यह   डायबिटीज के मरीजों में होने वाले जानलेवा दुष्परिणाम जो हार्ट फेल होना है या किडनी का फेल होना है उससे यह बचाता है.

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कुछ रिसर्च ने  दिखाया है कि इस ग्रुप की दवा देने से मरीजों का जीवन करीब 15 साल तक बढ़  सकता है. आज अनडिस्प्यूटेड तौर पर यह दवा डायबिटीज के मरीजों को देने की बात हो रही है. इस दवा को देने से कुछ मरीजों के मूत्र में होनेवाले इंफेक्शन या यौन अंगों पर कुछ जेनिटल ट्रैक्ट इनफेक्शन जेनिटलहोने का डर बना रहता है लेकिन यह  खतरा बहुत ज्यादा नहीं है.

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डॉ एनके सिंह की देखरेख में भारत में एक जीनियस स्टडी की गई है और इसमें करीब 16000 मरीज का डाटा लिया गया है और उसमें यूरिनरी ट्रैक्ट और जेनिटल ट्रैक्ट इनफेक्शन होने के , इंसीडेंस और अन्य दवाइयों जैसे ग्लिप्टिन देने से क्या  सुरक्षा मिलती है इस पर अध्ययन किया गया है ,जो शीघ्र  प्रकाशित होगा.

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अभी हाल में 11 नवंबर को अमेरिकन फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन एफडीए द्वारा त्रिज्यिपेटाइट  दवा डायबिटीज के मरीजों में अगर मोटापा है तो उसके लिए अप्रूव कर दी गई है यह एक अत्यंत उपयोगी दवा होगी और इसका इंजेक्शन मात्र हफ्ते में एक बार ही देना होगा और इससे करीब पाया गया है की 5 किलो से लेकर 10 किलो तक वजन घट जाता है.

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डायबिटीज के मरीजों में पेनक्रियाज के बीटा (Beta) सेल में और लीवर में चर्बी जमा होती है वह डायबिटीज होने का एक मुख्य कारण बनता जा रहा है .वजन घटने से उसमें फैट की  घटेगा और यह दवा इस तरह मरीजों के फ्यूचर के लिए वरदान साबित हो सकती है.

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अब एक और नई दवा IMEGIMILIN भारत के बाजारों में उपलब्ध है और यह डायबिटीज में होने वाले बीटा सेल के secretion की जो कमी होती है और  मांशपेशियों पर जो इन्सुलिन रेजिस्टेंस होता है, यह दोनों स्तरों पर बहुत उपयोगी है. नई सुरक्षित दवा भी है.

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डायबिटीज के इलाज में भी जो सबसे बड़ा चेंज धीरे-धीरे होता दिख रहा है वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग है. Chat Gpt  के आने के बाद जनसाधारण को भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का पता है खासकर डायबिटीज  में होने वाले डायबीटिक रेटिनोपैथी जो  आपके पर्दे में  खराबी होती है. उसके डिटेक्शन में इसकी अहम भूमिका भारत में पिछले दो-तीन सालों से तेजी से बढ़ी  है.

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इसी तरह ग्लूकोज के नियंत्रण में कंटीन्यूअस ग्लूकोस मॉनिटरिंग  continuous glucose monitoring में आर्टिफिशियल  इंटेलिजेंस का प्रयोग अत्यंत सुरक्षित और प्रभावकारी है इससे मरीजों को अपना वजन घटाने अपने इंसुलिन के डोज पर नजर रखने  अपने शरीर में होने वाले कॉम्प्लिकेशंस की टोह लेने में मदद मिल रही है. इस तकनीक के सरल और कम दाम होने के कारण या जल सुलभ तक शीघ्र पहुंचेगी.

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2023 में सबसे  बड़ी बात फिर भी वही है की हर मरीज को पर्याप्त व्यायाम की जरूरत है इसके बिना शुगर का नियंत्रण और शरीर में होने वाले दुष्परिणामों को रोकना संभव नहीं लगता है. अभी एरोबिक्स 1 घंटे रोज ,जो कि आप एक घंटा फास्ट वॉक या दौड़ने से या बैडमिंटन खेलने  से  हो जाता है. इसके अलावा जो जिम वाले एक्सरसाइज हैं जैसे रेजिस्टेंस एक्सरसाइज इस हफ्ते में काम से कम 10 से 15 मिनट तीन बार करना इंसुलिन की संवेदनशीलता को बढ़ा देता है और इस तरह बहुत शुगर का नियंत्रण बहुत अच्छा होने लगता है.

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इस फास्ट फूड के कल्चर में एक्सरसाइज की विधा  हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेंनिंग  HIIT डायबिटीज के शुगर नियंत्रण में उपयोगी पाई गई है और यह उन मरीजों के लिए खासकर बहुत फायदेमंद है जिनके पास 10 से 15 मिनट का ठीक टाइम है. योग पर भी अभी बहुत से रिसर्च चल रहे हैं और खासकर सूर्य नमस्कार का अगर 12 राउंड किया जाए तो है इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ जाता है और  इन्सुलिन रजिस्टेंस  सुधार जाता है. यह आपके शुगर को बहुत अच्छी तरह नियंत्रित करता है तो इसे आप जरूर करें. एक्सरसाइज बिलियन डॉलर ड्रग है जिसे  मरीज नहीं करते हैं.

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सुबह का एक्सरसाइज करें या शाम का इसमें शाम का एक्सरसाइज भी बहुत फायदेमंद पाया जाता है लेकिन जो भी समय सूट करें आपके रूटिंग से उसे आप कर सकते हैं.  डाइट के बारे में नया अपडेट यही है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग पर काफी रिसर्च हो चले हैं और अगर एक टाइम का खाना आप छोड़ देते हैं ( क्रोनो न्यूट्रिशन का कॉन्सेप्ट) उपयोगी पाया गया है.

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अगर आप खाना शाम में 6 बजे के बाद ना खाएं. उसके पहले ही जो खाना है खा ले तो  नेचुरल  में शरीर में होने वाले जो चेंज हैं, जो ब्रेन से केमिकल स्रावित होते हैं उससे  इन्सुलिन रेजिस्टेंस कम हो जाता है और इस तरह शुगर का नियंत्रण में भी यह बहुत उपयोगी पाया गया है. क्रोनो न्यूट्रिशन, प्रोटेक्टिव फूड्स और तले हुए चीजों का कम से कम प्रयोग ताजी सब्जियों फलों का उपयोग बादाम आदि का प्रयोग काफी उपयोगी पाया गया है.

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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