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पीठ, कमर और फेफड़े को मजबूत बनाता है उष्ट्रासन, जानें आसन विधि और सावधानियां

लोगों में मोटापे और किडनी की समस्या आजकल आम है. मोटे तौर पर कहें तो इनसे जुड़ी ज्यादातर समस्याएं बेतरतीब जीवनशैली की उपज है. ऐसे में रोज थोड़ी देर उष्ट्रासन करना बेहद स्वास्थप्रद है.

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
उष्ट्रासन आसन एक लाभ अनेक
उष्ट्रासन आसन एक लाभ अनेक
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उष्ट्रासन आपके शरीर में ऊर्जा का संचार करने में काफी फायदेमंद है. यह संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है- उष्ट्र यानी ऊंट और आसन यानी मुद्रा. इसलिए इसे अंग्रेजी में Camel Pose भी कहते हैं. उष्ट्रासन के अभ्यास से शरीर लचीला बनता है और शरीर का चौथा मुख्य चक्र अनाहत खुलता है. इस चक्र को हृदय चक्र भी कहते हैं.

इस आध्यात्मिक चक्र के सक्रिय होने से व्यक्ति की ऊर्जा, चेतना व भावनाओं का विस्तार होता है. उष्ट्रासन से शरीर के तीन हिस्से- कंधे, छाती और कमर बहुत मजबूत बनते हैं. वहीं यह नपुंसकता, डिस्पेप्सिया, कोलाइटिस, स्पॉन्डिलाइटिस, ब्रोंकाइटिस में भी बहुत लाभप्रद है.

रोजाना इसके अभ्यास से चेहरे की खूबसूरती निखरती है. यह आसन रीढ़ की हड्डी में निहित ऊर्जा चक्रों को संतुलित करने में सहयोगी है. खाली पेट सुबह के वक्त इसका अभ्यास करना सर्वश्रेष्ठ है.

आसन की विधि : वज्रासन में अर्थात् दोनों पैरों को पीछे मोड़कर उन पर बैठ जाएं. घुटने और पंजे पास-पास हों. अब घुटनों के बल खड़े हो जाएं. सांस भरते हुए धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें और दायें हाथ से दायीं एड़ी तथा बायें हाथ से बायीं एड़ी को पकड़ें. ऐसा करते हुए सावधान रहें, ताकि गर्दन को झटका न लगे. जांघें यथासंभव सीधी रहें तथा पैरों और भुजाओं पर शरीर का भार एक समान रहे. गर्दन को ढीला छोड़ दें. इस स्थिति में धीमी-लंबी-गहरी सांस के साथ यथाशक्ति रहें और उसके बाद धीरे-धीरे एड़ियों को छोड़ दें तथा सांस छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में लौट आएं.

अहम सावधानियां

  • कमर या गर्दन के आसपास दर्द या चोट की स्थिति में इसे न करें.

  • थायरॉयड बहुत बढ़ा हुआ हो, तो न आजमाएं.

  • गर्भवती महिलाएं, निम्न रक्तचाप, माइग्रेन और अनिद्रा के रोगी इससे परहेज करें.

आसन के प्रमुख लाभ

  • आंतरिक अंगों की मालिश के कारण पाचन में उपयोगी. कब्ज नहीं रहता है.

  • प्रजनन प्रणाली के लिए फायदेमंद. मासिक चक्र को सामान्य रखता है और इससे जुड़े दर्द को दूर करता है.

  • रीढ़ लचीली बनती है, जिससे पीठ मजबूत बनता है और पीठदर्द से छुटकारा मिलता है.

  • कमर और जांघ के आस-पास की चर्बी घटती है और कमर दर्द खत्म होता है.

  • गर्दन के आसपास खिंचाव से डबल चिन की समस्या दूर होती है और थायरॉयड ग्रंथि से जुड़े रोग ठीक होते हैं.

  • तनाव और क्रोध दूर करता है. नेत्ररोगों में उपयोगी है.

  • तनाव और क्रोध दूर

Posted by: Pritish Sahay

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Published Date

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