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Omicron Virus: कोरोना के नए वैरिएंट के ये हैं लक्षण, जानें नई गाइडलाइन

Published at :29 Nov 2021 5:42 PM (IST)
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Omicron Virus: कोरोना के नए वैरिएंट के ये हैं लक्षण, जानें नई गाइडलाइन

Omicron Virus : दक्षिण अफ्रीका में कोरोना के नए ओमीक्रॉन (B.1.1.529) वैरिएंट मिलने से लोगों के बीच खलबली मच गई है. इसके लिए नई गाइडलाइन जारी की गई है. हम आपको इस नए वैरिएंट के लक्षण और नई गाइडलाइन से अपडेट करा रहे हैं.

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इन देशों में फैल चुका है नया वैरिएंट ओमिक्रॉन

कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन अभी तक बेल्जियम, इस्राइल, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन समेत दुनिया के 10 देशों में फैल चुका है. इसके बाद कई देशों ने अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए हैं. इस्राइल ने तो इस नए वैरिएंट के कारण अपनी सीमाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया है.

कौन हो सकते हैं नए वैरिएंट का सोर्स?

दक्षिण अफ्रीका में चिंताजनक स्वरूप क्यों आया है? हम निश्चित रूप से इस बारे में नहीं जानते हैं. यह निश्चित रूप से संक्रामक वायरस की निगरानी के लिए ठोस प्रयासों के परिणाम से कहीं अधिक प्रतीत होता है. एक सिद्धांत यह है कि अत्यधिक संवेदनशील इम्यून सिस्टम वाले लोग, और जो लंबे समय तक संक्रमण का अनुभव करते हैं, वे नए वैरिएंट का सोर्स हो सकते हैं.

24 नवंबर को WHO के पास पहुंची थी रिपोर्ट

WHO के पास 24 नवंबर 2021 को दक्षिण अफ्रीका में B.1.1.529 वैरिएंट से संक्रमण का पहला मामला सामने आया. हालांकि इस वैरिएंट से संक्रमण का पता 9 नंवबर 2021 को टेस्ट के लिए आए एक सैंपल में मिला था।WHO के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस अधनम घेब्रेसस ((Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर बताया कि नया कोविड-19 वैरिएंट ओमिक्रॉन के बड़ी संख्या में म्यूटेशन हैं जिसमें से कुछ तो काफी चिंताजनक है। इसलिए हमें वैक्सीन को लेकर सजग होना होगा.

कौन हो सकते हैं नए वैरिएंट का सोर्स?

दक्षिण अफ्रीका में चिंताजनक स्वरूप क्यों आया है? हम निश्चित रूप से इस बारे में नहीं जानते हैं. यह निश्चित रूप से संक्रामक वायरस की निगरानी के लिए ठोस प्रयासों के परिणाम से कहीं अधिक प्रतीत होता है. एक सिद्धांत यह है कि अत्यधिक संवेदनशील इम्यून सिस्टम वाले लोग, और जो लंबे समय तक संक्रमण का अनुभव करते हैं, वे नए वैरिएंट का सोर्स हो सकते हैं.

जोखिम वाले लोगों के लिए टीकाकरण ना टालें

65 साल से अधिक उम्र के लोगों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वालों को वैक्सीन की बूस्टर डोज (Booster Dose) लगनी चाहिए. छोटो बच्चों के टीकाकरण को प्राथमिकता देनी चाहिए. बता दें भारत में अभी तक बूस्टर डोज लगनी शुरू नहीं हुई है.

ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर क्या खतरे हैं?

वैज्ञानिकों ने कहा है कि कोरोना वायरस स्पाइक प्रोटीन में ओमीक्रॉन वेरिएंट में सबसे अधिक संख्या में म्यूटेशन होता है. इससे ये प्रभावित कर सकता है कि ये वेरिएंट कितनी आसानी से लोगों में फैलता है. WHO ने ओमिक्रॉन वेरिएंट के डेटा का आकलन करने के लिए शुक्रवार को विशेषज्ञों के एक समूह की बैठक बुलाई.

क्या कोरोना टेस्ट के जरिए ओमीक्रॉन का पता लगाया जा सकता है?

WHO के अनुसार, वर्तमान SARS-CoV-2 PCR डायग्नोस्टिक्स इस वैरिएंट का पता लगा सकता है. इसने कहा, कई लैब्स ने इस बात की ओर इशारा किया है कि एक व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले पीसीआर टेस्ट में तीन टार्गेट जीन का पता नहीं चला है. ऐसे में टेस्ट करने पर अगर ऐसा होता है तो हम इसे ओमिक्रॉन वेरिएंट को पहचानने के लिए एक मार्कर के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं.

ओमिक्रॉन वैरिएंट के लक्षण क्या हैं?

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान (NICD) ने कहा है कि वर्तमान में B.1.1.1.529 वेरिएंट के संक्रमण के बाद कोई असामान्य लक्षण दिखाई देने की बात सामने नहीं आई है. NICD ने यह भी कहा कि डेल्टा जैसे अन्य संक्रामक रूपों के साथ कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित लोगों में से कुछ एसिम्प्टोमैटिक भी हैं.

कोताही न बरतें

देश में कोरोना मरीजों की संख्‍या बढ़ रही है. आगे मरीजों की संख्‍या के बढ़ने का ट्रेंड क्‍या रहेगा इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता. कोरोना मे नए-नए वैरिएंट आ रहे हैं ऐसे में हमें सतर्क रहने की जरूरत है.कोविड नियमों का पालन करें और वैक्‍सीन अवश्‍य लगवायें. वैक्‍सीन को लेकर बिलकुल भी कोताही न बरतें. इससे आप कोविड के अलावा संक्रामक बीमारियों से भी बचें रहेंगे.

कैसी हो सकती है Omicron वैरिएंट से संक्रमित व्यक्ति की स्थिति

अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं है कि Omicron वेरिएंट से संक्रमित व्यक्ति की स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है. अभी ऐसी कोई जानकारी नहीं है, जो यह स्पष्ट कर सके कि Omicron के लक्षण कोरोना वायरस (Omicron Symptoms) के अन्य वैरिएंट से अलग है या उससे मिलते-जुलते.

डेल्टा वैरिएंट में ही 25 बार म्यूटेशन

इन्साकॉग के अनुसार, भारत में अब तक 1.15 लाख सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग पूरी हो चुकी है. इनमें से 45394 सैंपल में गंभीर वैरिएंट मिले हैं. डेल्टा के 28880 मामले मिल चुके हैं. डेल्टा वेरिएंट में ही 25 बार म्यूटेशन हो चुका है और इन म्यूटेशन की पहचान अब तक 6611 सैंपल में सामने आए हैं.

ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर देश में अलर्ट

देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है. अंतरराष्ट्रीय फ्लाइटों पर फिर से विचार किया जा रहा है. इस बीच दक्षिण अफ्रीका से महाराष्ट्र लौटा एक शख्स कोरोना संक्रमित पाया गया है. रिपोर्ट सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग से लेकर प्रशासन तक में हड़कंप मच गया है. हालांकि, संक्रमित व्यक्ति में अभी तक ओमिक्रॉन वैरिएंट की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन उसे आइसोलेशन में भेज दिया गया है.

क्या डेल्टा से ज्यादा खतरनाक है ओमिक्राॅन?

WHO का कहना है कि शुरुआती साक्ष्य बता रहे हैं कि ओमिक्रॉन वैरिएंट से उन लोगों को ज्यादा खतरा है जो पहले कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं. हालांकि कि अभी ये स्पष्ट नहीं हुआ है कि डेल्टा और दूसरे वैरिएंट के मुकाबले ओमिक्रॉन आसानी से फैलने वाला है या नहीं. अभी आरटी-पीसीआर टेस्ट से इसका पता लगाया जा सकता है. ये कितना घातक है अभी इसका भी पता नहीं चल पाया है.

कितना खतरनाक ओमिक्रॉन वेरिएंट?

दक्षिण अफ्रीका समेत अन्य देशों में ओमिक्रॉन इंफेक्शन के प्रारंभिक विश्लेषण के आधार पर इसे डेल्टा वैरिएंट से छह गुना ज्यादा ताकतवर यानी ज्यादा संक्रामक बताया जा रहा है. डेल्टा वही वैरिएंट है जिसने भारत में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान तबाही मचाकर रख दी थी. यह वैरिएंट इम्यून सिस्टम को भी चकमा दे सकता है. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ओमिक्रॉन पिछले वैरिएंट्स से ज्यादा संक्रामक है और वैक्सीनेशन या नेचुरल इंफेक्शन से होने वाले इम्यून रिस्पॉन्स को भी बेअसर कर सकता है.

क्या है ओमिक्रॉन (Omicron) का इलाज

ओमिक्रॉन के इलाज को लेकर WHO ने कहा है कि वह वैक्सीनेशन सहित मौजूदा काउंटर-उपायों को इलाज के दौर पर इस्तेमाल करने और इसके प्रभावों को समझने पर काम कर रहा है. संगठन का कहना है कि कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स और IL6 (corticosteroids and IL6) रिसेप्टर ब्लॉकर्स अभी भी गंभीर कोविड -19 के मरीजों के लिए प्रभावी है. हालांकि दूसरे उपचारों का मूल्यांकन अभी किया जा रहा है.

मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी भी बेअसर

ज्यादा इंफेक्शन और लोगों को तेजी से मौत के घाट उतारने वाले डेल्टा वैरिएंट पर मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी का असर दिखाई देता है जबकि डेल्टा प्लस वैरिएंट पर इस थेरेपी का कोई असर नहीं होता है, जो कि कोविड-19 इंफेक्शन के शुरुआती चरणों में एक चमत्कारी इलाज माना जाता है. डेल्टा प्लस वैरिएंट के बाद ओमिक्रॉन दूसरा ऐसा वैरिएंट है जिस पर मोनोक्लोनल एंटीबॉडी ट्रीटमेंट का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है.

ओमिक्रॉन इंफेक्शन के लक्षण?

दक्षिण अफ्रीका में सबसे पहले ओमिक्रॉन वैरिएंट की पहचान करने वाली डॉक्टर एंजेलीके कोएट्जी ने बीबीसी के हवाले से कहा, ‘मैंने इसके लक्षण सबसे पहले कम उम्र के एक शख्स में देखे थे जो तकरीबन 30 साल का था.’ उन्होंने बताया कि मरीज को बहुत ज्यादा थकावट रहती थी. उसे हल्के सिरदर्द के साथ पूरे शरीर में दर्द की शिकायत थी. उसे गला छिलने जैसी दिक्कत भी थी. हालांकि, उसे ना तो खांसी थी और ना ही लॉस ऑफ टेस्ट एंड स्मैल (स्वाद और गंध की क्षमता खत्म होना) जैसा कोई लक्षण दिख रहा था. हालांकि, डॉक्टर ने मरीजों के एक छोटे से समूह को देखकर ही ये प्रतिक्रिया दी थी.

10 देशों में फैल चुका है नया वैरिएंट

कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन अभी तक बेल्जियम, इस्राइल, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन समेत दुनिया के 10 देशों में फैल चुका है. इसके बाद कई देशों ने अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए हैं. इस्राइल ने तो इस नए वैरिएंट के कारण अपनी सीमाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया है. 

SARS-CoV-2 PCR ओमीक्रोन वैरिएंट को पकड़ने में सक्षम

WHO ने अपने बयान में वायरस की जांच को लेकर बताया है कि मौजूदा वक्त में SARS-CoV-2 PCR इस वैरिएंट को पकड़ने में सक्षम है. नए वैरिएंट को देखते हुए भारत के साथ-साथ कई अन्य देश भी सतर्क हो गए हैं. बता दें कि दक्षिण अफ्रीका से आने वाले यात्रियों को क्वारंटाइन में रहना होगा और टेस्ट कराना होगा.

ओमीक्रॉन वैरिएंट के लक्षण क्या हैं?

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान (NICD) ने कहा है कि वर्तमान में B.1.1.1.529 वैरिएंट के संक्रमण के बाद कोई असामान्य लक्षण दिखाई देने की बात सामने नहीं आई है. NICD ने यह भी कहा कि डेल्टा जैसे अन्य संक्रामक रूपों के साथ कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित लोगों में से कुछ एसिम्प्टोमैटिक भी हैं.

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दक्षिण अफ्रीका में पाया गया था पहला मामला

बता दें कि ओमिक्रॉन वैरिएंट के पहले मामले की पुष्टि 24 नवंबर को हुई थी. इस वायरस के सबसे पहले मरीज की पहचान दक्षिण अफ्रीका में हुई थी. कई देश ओमिक्रॉन के प्रसार को रोकने के लिए हर संभव कोशिश में जुटे हुए हैं. इसी क्रम में दक्षिण अफ्रीकी देशों से उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया है.

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Omicron वेरिएंट के बारे में कही गई ये बात

अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं है कि Omicron वेरिएंट से संक्रमित व्यक्ति की स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है. अभी ऐसी कोई जानकारी नहीं है, जो यह स्पष्ट कर सके कि Omicron के लक्षण कोरोना वायरस (Omicron Symptoms) के अन्य वेरिएंट से अलग है या उससे मिलते-जुलते.

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