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Fetal Hydronephrosis: गर्भ में पल रहे बच्चों में हो सकती है हाइड्रेनोफ्रोसिस की समस्या, जानें क्या है इस बीमारी का इलाज

Updated at : 25 Mar 2025 2:30 PM (IST)
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Health tips. Image Credit: AI

Fetal Hydronephrosis: गर्भावस्था में कुछ दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है. हाइड्रोनेफ्रोसिस किडनी से जुड़ी परेशानी है. आइए जानते हैं इस बारे में.

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Fetal Hydronephrosis: प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए सबसे यादगार और खास समय होता है. मां बनना अपने आप में ही एक खूबसूरत अहसास है. हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनका बच्चा स्वस्थ रहे और डिलीवरी के समय कोई दिक्कत न आए. आजकल गर्भ में भी कई बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. ऐसी ही एक बीमारी है फीटल हाइड्रोनेफ्रोसिस. ये गर्भ में पल रहे शिशु की किडनी से जुड़ी हुई समस्या है. ऐसा ही एक मामला दिल्ली की रितु गुप्ता के साथ देखने को मिला. रितु शादी के कई वर्ष बाद गर्भवती हुई और गर्भावस्था के 28 हफ्ते में प्री-नेटल अल्ट्रा-साउंड से उन्हें अपने डॉक्टर से इस बारे में पता चला. इस बारे में उनकी डॉक्टर ने उन्हें बताया कि ऐसा कई मामलों में देखा जाता है. 

क्या है हाइड्रोनेफ्रोसिस?

हाइड्रोनेफ्रोसिस किडनी से जुड़ी परेशानी है. इस समस्या में किडनी में सूजन देखने को मिलती है जो की यूरीन के जमा होने के कारण होता है. किसी करीबी की सलाह पर रितु ने मेदांता हॉस्पिटल के पीडिएट्रिक सर्जरी एंड पीडिएट्रिक यूरोलॉजी के निदेशक डॉ. संदीप कुमार सिंहा से अपना जांच करवाया. इस दौरान डॉ. सिंहा ने कहा की इस बारे में घबराने की बात नहीं है. आजकल कई ऐसी अल्ट्रासाउंड मशीन हैं जो इस बात को बताती हैं और आगे भी इन पर नजर रख सकते हैं. 

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कैसे होता है इलाज?

इस बीमारी का इलाज के लिए गर्भ में शिशु पर नजर रखी जाती है और बच्चे के जन्म के बाद कुछ जांच की जाती है. रिपोर्ट के ऊपर निर्भर करता है की इलाज किस तरह से करना है. डॉ. सिंहा ने ये भी बताया कि जब बच्चे का जन्म हुआ “पहले ही सप्ताह में किडनी और ब्लैडर का अल्ट्रा साउंड करा लिया.” यूरिनरी इंफेक्शन को रोकने के लिए एंटी-बायोटिक्स के लो-डोज भी बच्चे को दिया गया. इस समस्या को देखने के लिए ब्लैडर का एक्स-रे और रीनल स्कैन भी किया जाता है. इन जांच के बाद ही आगे की बात साफ होती है कि कहीं ऑपरेशन तो नहीं करना पड़ेगा या फिर समय के साथ ही ठीक हो जाए. इस समस्या को ठीक करने के लिए ऑपरेशन होता है जो मिनिमली इनवेसिव पद्धति (की-होल) से पॉसिबल है. अब नवजात बच्चों में लैप्रोस्कोपिक पायलोप्लास्टी भी होता है. समय पर इलाज से बच्चा पूरी तरीके से ठीक हो जाता है. 

घबराने की बात नहीं 

अगर ये परेशानी आपके साथ या किसी जानने वाले के साथ होती है तो बिल्कुल भी नहीं घबराएं. फीटल हाइड्रोनफ्रोसिस के केस कई बार देखने को मिलते हैं. समय पर पता चलने पर इसे गंभीरता से लें और डॉक्टर की सलाह मानें. 

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Sweta Vaidya

लेखक के बारे में

By Sweta Vaidya

श्वेता वैद्य प्रभात खबर में लाइफस्टाइल बीट के लिए कंटेंट लिखती हैं. वह पिछले एक साल से व्यंजन (Recipes), फैशन, ब्यूटी टिप्स, होम डेकोर, किचन टिप्स और लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन्स जैसे विषयों पर लेख लिख रही हैं. उनका उद्देश्य पाठकों को रोजमर्रा की जिंदगी को आसान और स्टाइलिश बनाने के लिए प्रैक्टिकल टिप्स देना है.

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