Fetal Hydronephrosis: गर्भ में पल रहे बच्चों में हो सकती है हाइड्रेनोफ्रोसिस की समस्या, जानें क्या है इस बीमारी का इलाज

Edited by Sweta Vaidya
Updated:
विज्ञापन

Health tips. Image Credit: AI

Fetal Hydronephrosis: गर्भावस्था में कुछ दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है. हाइड्रोनेफ्रोसिस किडनी से जुड़ी परेशानी है. आइए जानते हैं इस बारे में.

विज्ञापन

Fetal Hydronephrosis: प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए सबसे यादगार और खास समय होता है. मां बनना अपने आप में ही एक खूबसूरत अहसास है. हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनका बच्चा स्वस्थ रहे और डिलीवरी के समय कोई दिक्कत न आए. आजकल गर्भ में भी कई बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. ऐसी ही एक बीमारी है फीटल हाइड्रोनेफ्रोसिस. ये गर्भ में पल रहे शिशु की किडनी से जुड़ी हुई समस्या है. ऐसा ही एक मामला दिल्ली की रितु गुप्ता के साथ देखने को मिला. रितु शादी के कई वर्ष बाद गर्भवती हुई और गर्भावस्था के 28 हफ्ते में प्री-नेटल अल्ट्रा-साउंड से उन्हें अपने डॉक्टर से इस बारे में पता चला. इस बारे में उनकी डॉक्टर ने उन्हें बताया कि ऐसा कई मामलों में देखा जाता है. 

क्या है हाइड्रोनेफ्रोसिस?

हाइड्रोनेफ्रोसिस किडनी से जुड़ी परेशानी है. इस समस्या में किडनी में सूजन देखने को मिलती है जो की यूरीन के जमा होने के कारण होता है. किसी करीबी की सलाह पर रितु ने मेदांता हॉस्पिटल के पीडिएट्रिक सर्जरी एंड पीडिएट्रिक यूरोलॉजी के निदेशक डॉ. संदीप कुमार सिंहा से अपना जांच करवाया. इस दौरान डॉ. सिंहा ने कहा की इस बारे में घबराने की बात नहीं है. आजकल कई ऐसी अल्ट्रासाउंड मशीन हैं जो इस बात को बताती हैं और आगे भी इन पर नजर रख सकते हैं. 

हेल्थ से जुड़ी खबरें यहां पढ़ें

यह भी पढ़ें: Walnuts Health Benefits: कई स्वास्थ्य लाभ समेटे हुए है ये ड्राई फ्रूट, रोजाना सेवन से मिलेगा शरीर को लाभ

कैसे होता है इलाज?

इस बीमारी का इलाज के लिए गर्भ में शिशु पर नजर रखी जाती है और बच्चे के जन्म के बाद कुछ जांच की जाती है. रिपोर्ट के ऊपर निर्भर करता है की इलाज किस तरह से करना है. डॉ. सिंहा ने ये भी बताया कि जब बच्चे का जन्म हुआ “पहले ही सप्ताह में किडनी और ब्लैडर का अल्ट्रा साउंड करा लिया.” यूरिनरी इंफेक्शन को रोकने के लिए एंटी-बायोटिक्स के लो-डोज भी बच्चे को दिया गया. इस समस्या को देखने के लिए ब्लैडर का एक्स-रे और रीनल स्कैन भी किया जाता है. इन जांच के बाद ही आगे की बात साफ होती है कि कहीं ऑपरेशन तो नहीं करना पड़ेगा या फिर समय के साथ ही ठीक हो जाए. इस समस्या को ठीक करने के लिए ऑपरेशन होता है जो मिनिमली इनवेसिव पद्धति (की-होल) से पॉसिबल है. अब नवजात बच्चों में लैप्रोस्कोपिक पायलोप्लास्टी भी होता है. समय पर इलाज से बच्चा पूरी तरीके से ठीक हो जाता है. 

घबराने की बात नहीं 

अगर ये परेशानी आपके साथ या किसी जानने वाले के साथ होती है तो बिल्कुल भी नहीं घबराएं. फीटल हाइड्रोनफ्रोसिस के केस कई बार देखने को मिलते हैं. समय पर पता चलने पर इसे गंभीरता से लें और डॉक्टर की सलाह मानें. 

यह भी पढ़ें: Health Tips for Lungs: स्वस्थ फेफड़ों के लिए इन चीजों का सेवन है फायदेमंद

विज्ञापन
Sweta Vaidya

लेखक के बारे में

By Sweta Vaidya

श्वेता वैद्य प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हैं. उन्हें कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में श्वेता झारखंड बीट को कवर कर रही हैं, जहां वह राज्य की ताजा खबरें, लोगों की भलाई से जुड़े मुद्दे, सरकारी योजनाओं, स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विषयों पर आधारित स्टोरीज तैयार करती हैं. श्वेता की हर बार कोशिश यही रहती है कि बात आसान, साफ और सीधे तरीके से लोगों तक पहुंचे, जिससे कि हर कोई उसे बिना दिक्कत के समझ सके. कंटेंट राइटर के तौर पर उनका फोकस होता है कि कंटेंट सिंपल, रिलेटेबल और यूजर-फ्रेंडली हो. झारखंड बीट से पहले उन्होंने लाइफस्टाइल बीट के लिए भी कंटेंट लिखा. इस बीट में उन्होंने रेसिपी, फैशन, ब्यूटी टिप्स, होम डेकोर, किचन टिप्स, गार्डनिंग टिप्स और लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन्स जैसे रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर आर्टिकल लिखे.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola