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COVID 19 : कोविड के बाद से 30% तक बढ़ा हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा - शोध

Updated at : 03 Nov 2024 4:06 PM (IST)
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COVID 19 : हालिया शोध के अनुसार कोविड-19 महामारी के लिए जिम्मेदार सार्स-सीओवी-2 के संक्रमण के करण डिस्लिपिडेमिया या हाई कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने का जोखिम लगभग 30% तक बढ़ सकने के अनुमान लगाए जा रहे हैं.

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COVID 19 : हालिया शोध के अनुसार कोविड-19 महामारी के लिए जिम्मेदार सार्स-सीओवी-2 के संक्रमण के करण डिस्लिपिडेमिया या हाई कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने का जोखिम लगभग 30% तक बढ़ सकने के अनुमान लगाए जा रहे हैं. अल्बर्ट आइंस्टीन कॉलेज ऑफ़ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने अपने शोध में 2 लाख से ज्यादा व्ययस्कों को शामिल कर जांच की और पता लगाया कि रक्त में असामान्य लिपिड स्तर बढ़ने पर महामारी के बाद हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ गई है और उनके कारण बढ़ते मृत्यु दर के रहस्य को पता लगाने में यह शोध काफी सहायक हो सकता है. लिपिड का स्तर बढ़ने पर हृदयाघात और स्ट्रोक जैसी हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं.

COVID 19 : Dyslipidemia : वृद्धों में डिस्लिपिडेमिया का खतरा ज्यादा

यह शोध जर्नल ऑफ़ क्लीनिकल इन्वेस्टिगेशन में प्रकाशित हुआ है जिसके अनुसार वृद्ध वयस्कों और टाइप टू डायबिटीज वाले लोगों में डिस्लिपिडेमिया विकसित होने का खतरा लगभग दो गुना तक बढ़ जाता है. आइंस्टीन कॉलेज ऑफ़ मेडिसिन मैं मेडिसिन और मॉलेक्युलर फॉमूलेकोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर गेटानो ने बताया कि सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम  से ताल्लुक रखने वाला कोरोना वायरस एंडोथेलियल कोशिकाओं के कार्य को बाधित कर सकने में सक्षम होता है.

COVID 19 : Lipid : लिपिड स्तर का नियमित रूप से जांच करना है जरूरी – गेटानो

इन सभी को ध्यान में रखते हुए गेटानो ने सभी को अपने लिपिड स्तर की नियमित रूप से निगरानी रखने की सलाह दी और कोलेस्ट्रॉल से पीड़ित रोगियों को जल्द से जल्द अपना उपचार और परहेज करने के लिए निर्देश भी दिए. इसके अतिरिक्त प्रोफेसर गेटानो ने कहा कि यह सलाह केवल कोविड-19 का इलाज करवा चुके लोगों पर ही नहीं बल्कि प्रत्येक व्यक्ति पर लागू होती है जिन्हें नहीं पता चला कि वह वायरस से संक्रमित हो चुके हैं या नहीं.

COVID 19 : इटली के नेपल्स की घटना से की तुलना

कोविड की शुरुआत से पहले 3 वर्षों 2017 से 2019 के दौरान इटली के नेपल्स में रहने वाले 2 लाख से अधिक वयस्कों के समूह में डिसलाइपेडीमिया की घटनाएं सामने आई थी. शोध में इन घटनाओं को ध्यान में रखते हुए 2020 और 2022 के बीच इस समूह के साथ दोनों कंडीशंस की तुलना की, इसके परिणाम में पता चला कि कोविड ने सभी प्रतिभागियों में डिस्लिपिडेमिया विकसित होने का जोखिम लगभग 29 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है. शोध में यह भी पता चला कि 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और पुरानी बीमारियां खासकर मधुमेह और मोटापा, हृदय रोग,और उच्च रक्तचाप वाले लोगों में डिस्लिपिडेमिया का खतरा अधिक होता है.

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Shreya Ojha

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By Shreya Ojha

Shreya Ojha is a contributor at Prabhat Khabar.

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