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Coronavirus Test : भारत में इन पांच तरीकों से की जा रही कोविड-19 टेस्टिंग, जानें किसका कितना है रेट

Updated at : 18 Jun 2020 12:43 PM (IST)
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Coronavirus Test : भारत में इन पांच तरीकों से की जा रही कोविड-19 टेस्टिंग, जानें किसका कितना है रेट

Coronavirus Test, Antigen, elisa, rt pcr, rapid antibody, truenat : देश में टेस्टिंग फैसिलिटी को बढ़ाने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने कोरोनोवायरस एंटीजन टेस्ट को मंजूरी दे दी है. ऐसा दावा किया गया है कि यह टेस्ट सिर्फ 30 मिनट में परिणाम दे सकता है. हाल ही में एलिसा (ELISA) टेस्ट को भी मंजूरी दी गयी थी. कोरोना के लगातार बढ़ रहे मामले को देखते हुए इन टेस्टों को मंजूरी दी जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना के प्रसार को इसी से रोका जा सकता है. आइये जानते हैं इनके बारे में विस्तार से-

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Coronavirus Test, Antigen, elisa, rt pcr, rapid antibody, truenat : देश में टेस्टिंग फैसिलिटी को बढ़ाने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने कोरोनोवायरस एंटीजन टेस्ट को मंजूरी दे दी है. ऐसा दावा किया गया है कि यह टेस्ट सिर्फ 30 मिनट में परिणाम दे सकता है. हाल ही में एलिसा (ELISA) टेस्ट को भी मंजूरी दी गयी थी. कोरोना के लगातार बढ़ रहे मामले को देखते हुए इन टेस्टों को मंजूरी दी जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना के प्रसार को इसी से रोका जा सकता है. आइये जानते हैं इनके बारे में विस्तार से-

रैपिड एंटीबॉडी टेस्टिंग

यह टेस्टिंग सस्ती के साथ-साथ कम समय में रिजल्ट देती है. हालांकि, इसमें गलत परिणाम मिलने के ज्यादा चांसेस रहते है. आपको बता दें कि इस टेस्टिंग की रिजल्ट महज 30 मीनट के अंदर आ जाती है. इसमें मरीजों के रक्त और थूक के सैंपल लिए जाते है.

क्या है एलिसा (ELISA) तकनीक की ‘एंजाइम-लिंक्ड’ टेस्टिंग

आपको बता दें कि वर्ष 1974 में विकसित एलिसा (ELISA) यह पता लगाता है कि हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली किसी संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी का उत्पादन कर रही है या नहीं. इसका उपयोग एचआईवी में भी होता है. इस टेस्ट में खून के नमूने लिए जाते है. जिसमें एंटीबॉडी की उपस्थिति का पता लगाने के लिए एंजाइम का प्रयोग किया जाता है. यही कारण है कि इस टेस्ट का नाम ‘एंजाइम-लिंक्ड’ रखा गया है. फिलहाल, भारत में एलिसा (ELISA) टेस्ट की सिर्फ सेरोसुरिव्स को अनुमति दी गयी है. देश में कुल सात कंपनियां इस तकनीक का प्रयोग करके किट निर्माण कर रही हैं. इन कपनियों में ज़ाइडस कैडिला, जे मित्रा एंड कंपनी, मेरिल डायग्नोस्टिक्स, वोक्सटर बायो, कारवा एंटरप्राइज, त्रिवित्रन हेल्थकेयर और एवोकन हेल्थकेयर भी शामिल हैं.

आरटी-पीसीआर (RT-PCR)

आरटी-पीसीआर (RT-PCR) टेस्ट का इस्तेमाल पूरी दुनियाभर में किया जा रहा है. देश में इसका उपयोग कोविड-19 के लिए अंतिम चरण के पुष्टि के लिए किया जा रहा है. आपको बता दें कि पूर्व में इसे इबोला और जीका जैसे गंभीर संक्रामक बीमारियों के ईलाज के दौरान किया जा चुका है. इस टेस्टिंग के दौरान मरीजों के नाक और मुंह से स्वैब का सैंपल लिया जाता है. इस तकनिक के जरिये वायरस के इंफेक्शन का शरीर में प्रभाव का पता चल जाता है. निजी लैब इसी टेस्टिंग के बदले 4500 रुपये वसूल रहे है. हालांकि, सरकारी अस्पताल में यह बिल्कुल मुफ्त में होता है.

ट्रू-नेट टेस्टिंग (TrueNat Testing)

ट्रू-नेट किट का डिजाइन गोवा की मोलबायो डायग्नोस्टिक में तैयार किया है. यह किट निजी कंपनी ने बनाया है लेकिन सबसे सटीक माने जाने वाले आरटी-पीसीआर के सिद्धांत पर यह भी कार्य करता है और बेहद कम समय में बेहतर और सटीक परिणाम देने कके लिए मशहूर है. इसका इस्तेमाल भी एचआईवी के लिए किया जाता रहा है. दरअसल यह मशीन पोर्टेबल होती है और करीब एक घंटे के अंदर ही रिजल्ट दे देती है.

एंटीजन टेस्ट

एंटीजन टेस्ट किट एक दक्षिण कोरियाई जैव प्रौद्योगिकी फर्म एसडी बायोसॉर द्वारा विकसित किया गया है. प्रत्येक किट में 450 रूपये का खर्च आएगा जो बेहद सस्ता है और यह महज 30 मीनट के भीतर परिणाम बता सकता है. आपको बता दें कि सबसे सटीक माने जाने वाले टेस्ट RTPCR के दौरा 3-4 घंटे लगते हैं. आईसीएमआर ने इस किट के उपयोग करने की सलाह दी है. इसी 17 जून से इसका प्रयोग दिल्ली में किया जाने लगा है.

Posted By : Sumit Kumar Verma

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